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बुंदेलखंड की सूखी धरती पर लहलहाया ड्रैगन फ्रूट
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हमीरपुर। बुंदेलखंड की सूखी धरती पर पहली बार साउथ अमेरिका की फसल ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू हुई है। कम बारिश में अधिक मुनाफा देने वाली ये फसल बुंदेलखंड के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। शासन की ओर से इसे बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग के जरिए प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये अनुदान भी देना शुरू कर दिया है। एक बार लागत लगाकर 15 से 20 वर्ष तक इसका बराबर उत्पादन लिया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फल की भारी मांग है। बाजार में इस फल की कीमत तीन सौ से चार सौ रुपये प्रति किलो है। इसी को देखते मंडलीय उपनिदेशक उद्यान डा. चंद्रमोहन चौधरी ने पाटनपुर में तैयार ड्रैगन फ्रूट की फसल का निरीक्षण कर किसान को उपयोगी जानकारी दी।
ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे पाटनपुर निवासी किसान ऋषि शुक्ला ने बताया ड्रैगन फूट की खेती करने की प्रेरणा उन्हें कौशांबी के परिचित किसान रविंद्र कुमार पांडेय से मिली। इसके बाद गूगल से जानकारी कर वर्ष 2019 में 100 पौधे लगाए, लेकिन तापमान अधिक होने के कारण काफी पौधे नष्ट हो गए। बताया फिर उन्होंने अपने बाग में इसका प्लांटेशन कराया और रासायनिक खाद का इस्तेमाल बंदकर जैविक खाद का प्रयोग किया। तब कहीं जाकर पौधे की ग्रोथ बढ़ी है। बताया वर्तमान में 400 प्लांट तैयार हैं। जिनमें 100 पौधों पर फ्रूट आना शुरू हो गया है। करीब 50 फल तोड़ चुके हैं। बताया 400 रुपये किलो के भाव से मौदहा कस्बे के व्यापारी इसे मांग रहे हैं। बताया कृषि विज्ञान केंद्र से समय-समय पर जानकारी मिलती रहती है। कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत के मार्गदर्शन और उद्यान विभाग के सहयोग से आधा हेक्टेयर में प्लांटेशन कराने की तैयारी कर रहे हैं।
एक एकड़ में करीब 400 सीमेंट के पोल खड़े करने पड़ते हैं। उनके ऊपर एक प्लेट रखनी होती है। जिनमें करीब 1600 प्लांट लगाने होते हैं। जिसमें डेढ़ से दो लाख तक खर्च आता है। किसान जलभराव वाली जगह पर इसकी खेती न करें। क्योंकि अधिक पानी के भराव में पौधे की जड़े सड़ जाती हैं। मुख्यत ड्रेगन फ्रूट की तीन वैरायटी हैं। जिसमें ए वैरायटी में लाल प्रकार का फूल व फल आता है। वहीं बी में बाहर से पीला व अंदर से सफेद, वहीं सी वैरायटी में सफेद फ्लावरिंग होती है। (संवाद)
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प्रति एकड़ दस लाख तक का मुनाफा
एक साल के पौधे पर फल लगना शुरू हो जाता है। लेकिन किसान को दूसरे व तीसरे वर्ष से आमदनी होना शुरू होती है। प्रति वर्ष 6 से 8 टन तक का उत्पादन लिया जा सकता है। जिसमें करीब 10 लाख तक की आमदनी किसान कर सकते हैं। इसकी भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग है।
कैंसर रोधी व इम्यूनिटी पावर में कारगर
ड्रैगन फूट बहुत ही ताकतवर व रोगों से लड़ने में सहायक है। इसके प्रयोग डेंगू मरीजों के लिए व खून बढ़ाने, कैंसर को बढ़ने से रोकने व शरीर की इम्यूनिटी पावर बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है।
कैसे करें इसकी खेती
केवीके के वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने बताया ड्रैगन फ्रूट खेती साउथ अमेरिकन देशों में अधिक की जाती है। अपने यहां महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना आदि राज्यों में इसकी खेती हो रही है। इस फसल को पानी की कम आवश्यकता पड़ती है। कहते हैं कि सर्वप्रथम खेत में सीमेंट पोल की जरूरत होती है। जिसमें पोल से पोल की दूरी 6 फीट व कतार से कतार की दूरी 8 से 10 फीट तक होनी चाहिए। पोल के चारों तरफ डेढ़ से दो किलो गोबर खाद डालकर उसके चारों कोनों में चार पौधे रोपने होते हैं। बताया इसकी रोपाई फरवरी से लेकर अक्तूबर माह तक की जा सकती है।
इस वर्ष शासन से ड्रैगन फ्रूट पर प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये अनुदान देने के आदेश मिले हैं। जनपद के दो किसानों को योजना में शामिल किया है। जिसमें राठ के गोहानी पनवाड़ी से किसान राजेंद्र सिंह व मौदहा के पाटनपुर निवासी किसान ऋषि शुक्ला ने आधे हेक्टेयर में खेती कर रहे हैं। कहा बुंदेलखंड में पहले दो किसान हैं, जिन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने की ठानी है। -डा. रमेश पाठक, जिला उद्यान अधिकारी
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ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे पाटनपुर निवासी किसान ऋषि शुक्ला ने बताया ड्रैगन फूट की खेती करने की प्रेरणा उन्हें कौशांबी के परिचित किसान रविंद्र कुमार पांडेय से मिली। इसके बाद गूगल से जानकारी कर वर्ष 2019 में 100 पौधे लगाए, लेकिन तापमान अधिक होने के कारण काफी पौधे नष्ट हो गए। बताया फिर उन्होंने अपने बाग में इसका प्लांटेशन कराया और रासायनिक खाद का इस्तेमाल बंदकर जैविक खाद का प्रयोग किया। तब कहीं जाकर पौधे की ग्रोथ बढ़ी है। बताया वर्तमान में 400 प्लांट तैयार हैं। जिनमें 100 पौधों पर फ्रूट आना शुरू हो गया है। करीब 50 फल तोड़ चुके हैं। बताया 400 रुपये किलो के भाव से मौदहा कस्बे के व्यापारी इसे मांग रहे हैं। बताया कृषि विज्ञान केंद्र से समय-समय पर जानकारी मिलती रहती है। कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत के मार्गदर्शन और उद्यान विभाग के सहयोग से आधा हेक्टेयर में प्लांटेशन कराने की तैयारी कर रहे हैं।
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एक एकड़ में करीब 400 सीमेंट के पोल खड़े करने पड़ते हैं। उनके ऊपर एक प्लेट रखनी होती है। जिनमें करीब 1600 प्लांट लगाने होते हैं। जिसमें डेढ़ से दो लाख तक खर्च आता है। किसान जलभराव वाली जगह पर इसकी खेती न करें। क्योंकि अधिक पानी के भराव में पौधे की जड़े सड़ जाती हैं। मुख्यत ड्रेगन फ्रूट की तीन वैरायटी हैं। जिसमें ए वैरायटी में लाल प्रकार का फूल व फल आता है। वहीं बी में बाहर से पीला व अंदर से सफेद, वहीं सी वैरायटी में सफेद फ्लावरिंग होती है। (संवाद)
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प्रति एकड़ दस लाख तक का मुनाफा
एक साल के पौधे पर फल लगना शुरू हो जाता है। लेकिन किसान को दूसरे व तीसरे वर्ष से आमदनी होना शुरू होती है। प्रति वर्ष 6 से 8 टन तक का उत्पादन लिया जा सकता है। जिसमें करीब 10 लाख तक की आमदनी किसान कर सकते हैं। इसकी भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग है।
कैंसर रोधी व इम्यूनिटी पावर में कारगर
ड्रैगन फूट बहुत ही ताकतवर व रोगों से लड़ने में सहायक है। इसके प्रयोग डेंगू मरीजों के लिए व खून बढ़ाने, कैंसर को बढ़ने से रोकने व शरीर की इम्यूनिटी पावर बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है।
कैसे करें इसकी खेती
केवीके के वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने बताया ड्रैगन फ्रूट खेती साउथ अमेरिकन देशों में अधिक की जाती है। अपने यहां महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना आदि राज्यों में इसकी खेती हो रही है। इस फसल को पानी की कम आवश्यकता पड़ती है। कहते हैं कि सर्वप्रथम खेत में सीमेंट पोल की जरूरत होती है। जिसमें पोल से पोल की दूरी 6 फीट व कतार से कतार की दूरी 8 से 10 फीट तक होनी चाहिए। पोल के चारों तरफ डेढ़ से दो किलो गोबर खाद डालकर उसके चारों कोनों में चार पौधे रोपने होते हैं। बताया इसकी रोपाई फरवरी से लेकर अक्तूबर माह तक की जा सकती है।
इस वर्ष शासन से ड्रैगन फ्रूट पर प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये अनुदान देने के आदेश मिले हैं। जनपद के दो किसानों को योजना में शामिल किया है। जिसमें राठ के गोहानी पनवाड़ी से किसान राजेंद्र सिंह व मौदहा के पाटनपुर निवासी किसान ऋषि शुक्ला ने आधे हेक्टेयर में खेती कर रहे हैं। कहा बुंदेलखंड में पहले दो किसान हैं, जिन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने की ठानी है। -डा. रमेश पाठक, जिला उद्यान अधिकारी