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पुल हादसा: जांच रिपोर्ट शासन स्तर पर अटकी, पुल निर्माण की तैयारी
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फोटो21एचएएमपी 26- लोहे के फ्रेम में वेल्डिंग करते कंपनी के कर्मचारी। संवाद
हमीरपुर। मोराकांदर गांव और कंडौर के बीच 28 मई की आधी रात हुए पुल हादसे की उच्चस्तरीय समिति ने जांच पूरी करके आख्या रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उधर वाराणसी की प्रयोगशाला में की गई निर्माण सामग्री की रिपोर्ट भी जा चुकी है।
शासन स्तर से अभी तक रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया और इधर पुल बनाने वाली कंपनी ने अगले चरण की तैयारी भी शुरू कर दी है। डैमेज हुए सपोर्ट स्ट्रक्चर (लोहे के फ्रेम) की मरम्मत की जा रही है। संवाद न्यूज की टीम ने शुक्रवार को जब घटना स्थल का निरीक्षण किया तो यह चौंकाने वाली बात सामने आई।
28 मई की रात 12:20 बजे आए आंधी-तूफान में मोराकांदर गांव और कंडौर के बीच बेतवा नदी पर बन रहे 700.90 मीटर लंबे पुल का पांच नंबर पिलर और उस पर रखे सेगमेंट भरभराकर गिर गए थे। मलबे में दबने से चार श्रमिकों और दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी। 92.52 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल के हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई गई। सूत्रों के मुताबिक जांच समिति अपनी रिपोर्ट शासन को भेज चुकी है लेकिन रिपोर्ट में हादसे की वजह क्या बताई गई और जिम्मेदारी किसकी तय हुई, इसका आधिकारिक खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों की नजर अब शासन के फैसले पर टिकी है।
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दो टीमें कर रहीं सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार
निर्माण स्थल पर फिलहाल दो टीमें काम कर रही हैं। कंपनी से जुड़े फोरमैन अतवर रहमान के अनुसार सेगमेंट के सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार करने में करीब एक से दो माह लग सकते हैं। तीन स्पैन खराब हो गए है। एक स्पैन बचा है जिसे ठीक किया जा रहा है। जो बनने लायक नहीं है उसे कबाड़ में डाल दिया गया, उसकी जगह नया स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। रात में कोई काम नहीं किया जाता है। दिन में ही दो अलग-अलग टीमें काम कर रहीं है।
खुले में पड़े सरियों में लग रहीं जंग
पुल हादसे में पांच नंबर पिलर और 21 सेगमेंट हादसे में धाराशायी हो गए थे। सेगमेंट तैयार कराए जाएंगे लेकिन सवाल यह है कि सामग्री जो प्रयोग में लाई जाएगी वह बचत वाली लगेगी या नहीं यह भी सवाल है। क्योंकि जो सामग्री वर्कशॉप में खुले मैदान में पड़ी है वह बारिश से खराब हो रही है। सरियों में जंग लगने लगी है। कई कुंतल सरिया खुले में पड़ा है। टीनशेड के नीचे वेल्डिंग का काम किया जा रहा है।
छह मौतों का जवाब अभी बाकी
हादसे में छह लोगों की जान जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुल निर्माण में बरती गई सुरक्षा और तकनीकी खामियों को लेकर उठा था। जांच समिति ने मौके का निरीक्षण करने के साथ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की। अब रिपोर्ट शासन तक पहुंच चुकी है लेकिन उसके सार्वजनिक होने का इंतजार है। निर्माण की तैयारियां भले शुरू हो गई हों, मगर हादसे की असली वजह पर पड़ा पर्दा अभी तक नहीं उठा है।
इनकी भी सुनिए
परसनी डेरा निवासी श्याम लाल का कहना है कि पुल हादसे की वजह से काम अटक गया है। पुल मानक के आधार पर बना होता तो हादसा न होता। हम पढ़े लिखे तो है नहीं लेकिन आंधी तूफान में इसके पहले कभी कोई निर्माणाधीन पुल गिरते नहीं सुना है। अफसरों ने जो देखा है वही सही।
परसनी डेरा निवासी लल्लू का कहना है कि काम तेजी से चल रहा था, लेकिन यह हादसा हो गया। जिस रात हादसा हुआ उस रात तूफान आया था। उसी दौरान पुल का एक हिस्सा गिरा है। इस पर हम क्या कहें बड़े अफसर जाने। इतना जरूर है कि कहीं न कहीं कोई कमी रही होगी।
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शासन स्तर से अभी तक रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया और इधर पुल बनाने वाली कंपनी ने अगले चरण की तैयारी भी शुरू कर दी है। डैमेज हुए सपोर्ट स्ट्रक्चर (लोहे के फ्रेम) की मरम्मत की जा रही है। संवाद न्यूज की टीम ने शुक्रवार को जब घटना स्थल का निरीक्षण किया तो यह चौंकाने वाली बात सामने आई।
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28 मई की रात 12:20 बजे आए आंधी-तूफान में मोराकांदर गांव और कंडौर के बीच बेतवा नदी पर बन रहे 700.90 मीटर लंबे पुल का पांच नंबर पिलर और उस पर रखे सेगमेंट भरभराकर गिर गए थे। मलबे में दबने से चार श्रमिकों और दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी। 92.52 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल के हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई गई। सूत्रों के मुताबिक जांच समिति अपनी रिपोर्ट शासन को भेज चुकी है लेकिन रिपोर्ट में हादसे की वजह क्या बताई गई और जिम्मेदारी किसकी तय हुई, इसका आधिकारिक खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों की नजर अब शासन के फैसले पर टिकी है।
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दो टीमें कर रहीं सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार
निर्माण स्थल पर फिलहाल दो टीमें काम कर रही हैं। कंपनी से जुड़े फोरमैन अतवर रहमान के अनुसार सेगमेंट के सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार करने में करीब एक से दो माह लग सकते हैं। तीन स्पैन खराब हो गए है। एक स्पैन बचा है जिसे ठीक किया जा रहा है। जो बनने लायक नहीं है उसे कबाड़ में डाल दिया गया, उसकी जगह नया स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। रात में कोई काम नहीं किया जाता है। दिन में ही दो अलग-अलग टीमें काम कर रहीं है।
खुले में पड़े सरियों में लग रहीं जंग
पुल हादसे में पांच नंबर पिलर और 21 सेगमेंट हादसे में धाराशायी हो गए थे। सेगमेंट तैयार कराए जाएंगे लेकिन सवाल यह है कि सामग्री जो प्रयोग में लाई जाएगी वह बचत वाली लगेगी या नहीं यह भी सवाल है। क्योंकि जो सामग्री वर्कशॉप में खुले मैदान में पड़ी है वह बारिश से खराब हो रही है। सरियों में जंग लगने लगी है। कई कुंतल सरिया खुले में पड़ा है। टीनशेड के नीचे वेल्डिंग का काम किया जा रहा है।
छह मौतों का जवाब अभी बाकी
हादसे में छह लोगों की जान जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुल निर्माण में बरती गई सुरक्षा और तकनीकी खामियों को लेकर उठा था। जांच समिति ने मौके का निरीक्षण करने के साथ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की। अब रिपोर्ट शासन तक पहुंच चुकी है लेकिन उसके सार्वजनिक होने का इंतजार है। निर्माण की तैयारियां भले शुरू हो गई हों, मगर हादसे की असली वजह पर पड़ा पर्दा अभी तक नहीं उठा है।
इनकी भी सुनिए
परसनी डेरा निवासी श्याम लाल का कहना है कि पुल हादसे की वजह से काम अटक गया है। पुल मानक के आधार पर बना होता तो हादसा न होता। हम पढ़े लिखे तो है नहीं लेकिन आंधी तूफान में इसके पहले कभी कोई निर्माणाधीन पुल गिरते नहीं सुना है। अफसरों ने जो देखा है वही सही।
परसनी डेरा निवासी लल्लू का कहना है कि काम तेजी से चल रहा था, लेकिन यह हादसा हो गया। जिस रात हादसा हुआ उस रात तूफान आया था। उसी दौरान पुल का एक हिस्सा गिरा है। इस पर हम क्या कहें बड़े अफसर जाने। इतना जरूर है कि कहीं न कहीं कोई कमी रही होगी।

फोटो21एचएएमपी 26- लोहे के फ्रेम में वेल्डिंग करते कंपनी के कर्मचारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 26- लोहे के फ्रेम में वेल्डिंग करते कंपनी के कर्मचारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 26- लोहे के फ्रेम में वेल्डिंग करते कंपनी के कर्मचारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 26- लोहे के फ्रेम में वेल्डिंग करते कंपनी के कर्मचारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 26- लोहे के फ्रेम में वेल्डिंग करते कंपनी के कर्मचारी। संवाद