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पोषण वाटिका से आत्मनिर्भरता की इबारत लिख रहीं अर्चना
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हमीरपुर। पचखुरा खुर्द गांव की अर्चना की पोषण वाटिका गांव की अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही है। वह परिवार को सेेहतमंद बना रहीं हैं। साथ ही बाजार में सब्जी बेचकर आमदनी भी कर रहीं हैं। उनके इस प्रयास से परिवार का भरण पोषण भी आसान हो गया है।
सुमेरपुर क्षेत्र के पचखुरा खुर्द गांव निवासी अर्चना देवी पांचवी पास हैं। दो साल पहले केवीके की गृह वैज्ञानिक डा. फूलकुमारी के मार्गदर्शन से उन्हें पोषण वाटिका तैयार करने का प्रशिक्षण मिला। उन्होंने अनेक सब्जियों के अच्छी प्रजाति के बीज उपलब्ध कराए। जिससे यह वाटिका तैयार की है। बताती हैं कि वर्तमान में उनकी पोषण वाटिका में बैगन, टमाटर, मिर्च, हरी धनिया, मूली आदि सब्जी तैयार है। जिससे घर के लिए सब्जी तो मिलती ही है, साथ में बाजार में भी प्रतिदिन हजार पांच सौ रुपये की सब्जी बेच लेती हैं। जिससे घर के अन्य खर्च निकल आता है। उसके इस कार्य को देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी अपने घरों में पोषण वाटिका तैयार कर रही हैं। जिसके लिए वैज्ञानिक गांव आकर उन्हें प्रशिक्षित भी करते हैं।
वाटिका में लगाए फलदार पौधे
अर्चना देवी कहती हैं कि उन्हें फलदार पौधे लगाना अत्यंत प्रिय है। बताया कि पति से कहकर 37 पेड़ आंवला, सात आम, पांच अनार, 50 मुसम्मी, 50 अमरूद व 100 पेड़ पपीता लगाया है जो तैयार हो रहे हैं।
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बच्चे भी करते हैं मदद
बताती हैं कि एक बेटा जो इंटर बायो की पढ़ाई कर रहा है। वहीं तीन बेटियों में बड़ी बेटी सुमन बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है, दूसरी बेटी सुशीला 11वीं व तीसरी कक्षा 9वीं में पढ़ती है। जो पढ़ाई के बाद उसके साथ वाटिका में उसका हाथ बटाती है।
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सुमेरपुर क्षेत्र के पचखुरा खुर्द गांव निवासी अर्चना देवी पांचवी पास हैं। दो साल पहले केवीके की गृह वैज्ञानिक डा. फूलकुमारी के मार्गदर्शन से उन्हें पोषण वाटिका तैयार करने का प्रशिक्षण मिला। उन्होंने अनेक सब्जियों के अच्छी प्रजाति के बीज उपलब्ध कराए। जिससे यह वाटिका तैयार की है। बताती हैं कि वर्तमान में उनकी पोषण वाटिका में बैगन, टमाटर, मिर्च, हरी धनिया, मूली आदि सब्जी तैयार है। जिससे घर के लिए सब्जी तो मिलती ही है, साथ में बाजार में भी प्रतिदिन हजार पांच सौ रुपये की सब्जी बेच लेती हैं। जिससे घर के अन्य खर्च निकल आता है। उसके इस कार्य को देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी अपने घरों में पोषण वाटिका तैयार कर रही हैं। जिसके लिए वैज्ञानिक गांव आकर उन्हें प्रशिक्षित भी करते हैं।
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वाटिका में लगाए फलदार पौधे
अर्चना देवी कहती हैं कि उन्हें फलदार पौधे लगाना अत्यंत प्रिय है। बताया कि पति से कहकर 37 पेड़ आंवला, सात आम, पांच अनार, 50 मुसम्मी, 50 अमरूद व 100 पेड़ पपीता लगाया है जो तैयार हो रहे हैं।
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बच्चे भी करते हैं मदद
बताती हैं कि एक बेटा जो इंटर बायो की पढ़ाई कर रहा है। वहीं तीन बेटियों में बड़ी बेटी सुमन बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है, दूसरी बेटी सुशीला 11वीं व तीसरी कक्षा 9वीं में पढ़ती है। जो पढ़ाई के बाद उसके साथ वाटिका में उसका हाथ बटाती है।