{"_id":"60a69e488ebc3e34d94a9c17","slug":"agriculter-civic-hamirpur-news-hamirpur-news-knp629354272","type":"story","status":"publish","title_hn":"50 वर्षों बाद बैसाख माह हुई अच्छी बारिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
50 वर्षों बाद बैसाख माह हुई अच्छी बारिश
विज्ञापन
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। ताउते तूफान ने जहां कई राज्यों में भीषण तबाही मचाई है, वहीं बुंदेलखंड के लिए बारिश वरदान साबित हुई। किसानों के मुताबिक 50 वर्षों के बाद बैसाख मास में इस तरह की बारिश हुई है। इससे गर्मी के सीजन में खेतों की जुताई करने में आसानी होगी।
गर्मी में खेत की जुताई खरीफ और रबी की फसलों के लिए बेहद मुफीद होती है। इस जुताई के बाद अच्छे उत्पादन की उम्मीद किसान करते हैं। कस्बे के किसान राधेश्याम तिवारी, सोनू पांडेय ने बताया बुंदेलखंड में 50 वर्ष पूर्व अक्षय तृतीया के दिन से गर्मी की जुताई का क्रम शुरू होता था। इस जुताई के बाद किसान जैविक खाद (गोबर खाद) खेत में डालते थे। उन्हें उम्मीद रहती थी गर्मी की जुताई के बाद खेत में डाली गई गोबर की खाद उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित होगी। धीरे-धीरे मौसम बदला तो खेती का तौर तरीका बदल गया।
गर्मी की जुताई का चलन ही बंद सा हो गया। इससे उत्पादन घटा और किसानों को नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कुदरत के इस तोहफे को कुबूल कर गर्मी की जुताई करने से लाभ होगा। किसान सुरेश यादव ने कहा गर्मी की जुताई के बाद खेत की मिट्टी मुलायम हो जाती है। बैसाख माह में बारिश के बाद होने वाली जुताई के बाद मगर गोबर की खाद का प्रयोग किया जाए इससे खेतों में केंचुआ पैदा होता है जो भारी बारिश के बाद खेत की मिट्टी को मुलायम बनाने में मददगार साबित होता है और खेत की उत्पादन क्षमता में डेढ़ से दोगुना इजाफा हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गर्मी में खेत की जुताई खरीफ और रबी की फसलों के लिए बेहद मुफीद होती है। इस जुताई के बाद अच्छे उत्पादन की उम्मीद किसान करते हैं। कस्बे के किसान राधेश्याम तिवारी, सोनू पांडेय ने बताया बुंदेलखंड में 50 वर्ष पूर्व अक्षय तृतीया के दिन से गर्मी की जुताई का क्रम शुरू होता था। इस जुताई के बाद किसान जैविक खाद (गोबर खाद) खेत में डालते थे। उन्हें उम्मीद रहती थी गर्मी की जुताई के बाद खेत में डाली गई गोबर की खाद उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित होगी। धीरे-धीरे मौसम बदला तो खेती का तौर तरीका बदल गया।
विज्ञापन
गर्मी की जुताई का चलन ही बंद सा हो गया। इससे उत्पादन घटा और किसानों को नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कुदरत के इस तोहफे को कुबूल कर गर्मी की जुताई करने से लाभ होगा। किसान सुरेश यादव ने कहा गर्मी की जुताई के बाद खेत की मिट्टी मुलायम हो जाती है। बैसाख माह में बारिश के बाद होने वाली जुताई के बाद मगर गोबर की खाद का प्रयोग किया जाए इससे खेतों में केंचुआ पैदा होता है जो भारी बारिश के बाद खेत की मिट्टी को मुलायम बनाने में मददगार साबित होता है और खेत की उत्पादन क्षमता में डेढ़ से दोगुना इजाफा हो जाता है।
विज्ञापन