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अब मनरेगा मजदूरों के बहुरेंगे दिन
Hamirpur
Updated Fri, 12 Sep 2014 05:31 AM IST
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हमीरपुर। मनरेगा में काम मांगने पर 15 दिन के अंदर काम न देने पर अधिकारियाें पर भी जुर्माना लगेगा। शासन ने मनरेगा मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए अहम फैसला लिया है।
भोजन व काम के अधिकार
क्षेत्र मेें कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र गॉधी ने बताया 02 फरवरी 2006 को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को लागू किया। मनरेगा से जुड़े परिवारो ंको साल में 100 दिन गॉव में रोजगार दिए जाने का प्रावधान किया गया। इस कानून में समयबद्वता पर जोर देते हुए समय पर काम न देने पर मजदूरों को शिकायत का अधिकार देते हुए कानून का उल्लंघन करने पर दोषियो के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। श्री गांधी ने बताया कानून में काम मांगने पर 15 दिन के अंदर काम न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की बात कही गई। मगर जिले में अभी तक किसी को भी बेरोजगारी भत्ता नहीं दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। अधिकतर जगहों पर ग्राम रोजगार सेवक से लेकर जिला स्तर पर मजदूरों के काम मांगने संबंधी
आवेदन पत्रों की पावती मजदूरो को नही दी जा रही हैं। शासन ने इसे गंभीरता से लेकर मनरेगा मजूदरों को काम मांगने के 15 दिन के अंदर संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। मनरेगा को जनहित गारंटी कानून में शामिल करते हुए यह आदेश जारी किया गया है।
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यह हैं नई व्यवस्था में प्रावधान
मजदूरों के काम मांगने के 15 दिन के अंदर काम मुहैया कराने कीे जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी की होगी। ऐसा न करने पर उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। अगर वह चुप्पी साध लेते है या फि र कोई तर्क देते है तो मुख्यविकास अधिकारी के यहां अपील की जा सकती है। अपील की सुनवाई कर सात दिन के अंदर फैसला देना होगा। मुख्य विकास अधिकारी के फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी के यहां अपील की जा सकती है। डीएम को भी सात दिन में फैसला देना होगा।
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भोजन व काम के अधिकार
क्षेत्र मेें कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र गॉधी ने बताया 02 फरवरी 2006 को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को लागू किया। मनरेगा से जुड़े परिवारो ंको साल में 100 दिन गॉव में रोजगार दिए जाने का प्रावधान किया गया। इस कानून में समयबद्वता पर जोर देते हुए समय पर काम न देने पर मजदूरों को शिकायत का अधिकार देते हुए कानून का उल्लंघन करने पर दोषियो के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। श्री गांधी ने बताया कानून में काम मांगने पर 15 दिन के अंदर काम न दिए जाने पर बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की बात कही गई। मगर जिले में अभी तक किसी को भी बेरोजगारी भत्ता नहीं दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। अधिकतर जगहों पर ग्राम रोजगार सेवक से लेकर जिला स्तर पर मजदूरों के काम मांगने संबंधी
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आवेदन पत्रों की पावती मजदूरो को नही दी जा रही हैं। शासन ने इसे गंभीरता से लेकर मनरेगा मजूदरों को काम मांगने के 15 दिन के अंदर संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। मनरेगा को जनहित गारंटी कानून में शामिल करते हुए यह आदेश जारी किया गया है।
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यह हैं नई व्यवस्था में प्रावधान
मजदूरों के काम मांगने के 15 दिन के अंदर काम मुहैया कराने कीे जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी की होगी। ऐसा न करने पर उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। अगर वह चुप्पी साध लेते है या फि र कोई तर्क देते है तो मुख्यविकास अधिकारी के यहां अपील की जा सकती है। अपील की सुनवाई कर सात दिन के अंदर फैसला देना होगा। मुख्य विकास अधिकारी के फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी के यहां अपील की जा सकती है। डीएम को भी सात दिन में फैसला देना होगा।