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रामधुन: आंदोलन ला रहा रंग
Hamirpur
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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हमीरपुर। सुमेरपुर विकासखंड क्षेत्र के बीहड़ी गांव कैंथी में रामधुन के जरिए अंादोलनरत ग्रामीणों की पहल सार्थक होती नजर आ रही है। मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे इस गांव में जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने एएनएम सेंटर में स्वास्थ्य कर्मी तैनात कर दी है और विद्युत सप्लाई के लिए तार-खंभे उपलब्ध करा दिए गए है। इसके अलावा पुल के एप्रोच मार्ग, इंटर कालेज खोले जाने की समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
चंद्रावल नदी किनारे बीहड़ क्षेत्र में स्थित कैंथी गांव मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। करीब 28 वर्ष पूर्व इस गांव का विद्युतीकरण किया गया था, लेकिन तार चोरी हो जाने के चलते इस गांव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। इसके साथ ही 2005-06 में के न नदी पर पुल बनाए जाने का काम शुरू हुआ। लेकिन एप्रोच मार्ग की धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद बांदा जनपद के सेतु अंश में चली गई। जिससे एप्रोच मार्ग भी अभी तक बनना शुरू नही हुआ। जिससे लोग नदी की जलधारा से होकर आज भी निकलने को मजबूर है। एएनएम सेंटर बना लेकिन कर्मचारी तैनात नही किया गया। इन्हीं समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर जागरूकता दिखाई। बार-बार प्रार्थनापत्र देने और आश्वासन पाकर जब हार गए तो इस पिछड़े क्षेत्र के लोगों ने गांव के विकास के लिए अनोखा आंदोलन शुरू किया। गांव के शिव मंदिर में रामधुन की ऐसी लगन लगाई जो आज 45 दिन भी जारी है। हालांकि रामधुन में शामिल भोला (52) की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। भोला की मौत होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। शुक्रवार को जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने बताया कि गांव के एएनएम सेंटर में स्वास्थ्य कर्मी तैनात कर दिया गया है और विद्युत सप्लाई के लिए खंभे व तार दे दिए गए है। नए ट्रांसफार्मर की भी व्यवस्था कराई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने पुल के एप्रोच मार्ग की फंसी धनराशि की आपत्तियां दूर होने की बात कही और धन आवंटन प्राप्त होते ही कार्य शुरू कराए जाने की बात कही। इसके साथ ही शिक्षा के लिए इंटर कालेज की बजाए नवीन हाईस्कूल खोले जाने का प्रस्ताव जिला योजना में प्रस्तावित होने की बात कही।
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चंद्रावल नदी किनारे बीहड़ क्षेत्र में स्थित कैंथी गांव मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। करीब 28 वर्ष पूर्व इस गांव का विद्युतीकरण किया गया था, लेकिन तार चोरी हो जाने के चलते इस गांव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। इसके साथ ही 2005-06 में के न नदी पर पुल बनाए जाने का काम शुरू हुआ। लेकिन एप्रोच मार्ग की धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद बांदा जनपद के सेतु अंश में चली गई। जिससे एप्रोच मार्ग भी अभी तक बनना शुरू नही हुआ। जिससे लोग नदी की जलधारा से होकर आज भी निकलने को मजबूर है। एएनएम सेंटर बना लेकिन कर्मचारी तैनात नही किया गया। इन्हीं समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर जागरूकता दिखाई। बार-बार प्रार्थनापत्र देने और आश्वासन पाकर जब हार गए तो इस पिछड़े क्षेत्र के लोगों ने गांव के विकास के लिए अनोखा आंदोलन शुरू किया। गांव के शिव मंदिर में रामधुन की ऐसी लगन लगाई जो आज 45 दिन भी जारी है। हालांकि रामधुन में शामिल भोला (52) की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। भोला की मौत होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। शुक्रवार को जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने बताया कि गांव के एएनएम सेंटर में स्वास्थ्य कर्मी तैनात कर दिया गया है और विद्युत सप्लाई के लिए खंभे व तार दे दिए गए है। नए ट्रांसफार्मर की भी व्यवस्था कराई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने पुल के एप्रोच मार्ग की फंसी धनराशि की आपत्तियां दूर होने की बात कही और धन आवंटन प्राप्त होते ही कार्य शुरू कराए जाने की बात कही। इसके साथ ही शिक्षा के लिए इंटर कालेज की बजाए नवीन हाईस्कूल खोले जाने का प्रस्ताव जिला योजना में प्रस्तावित होने की बात कही।
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