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इलाज कराना हो तो इंतजाम भी खुद करें
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 04 Jun 2016 08:34 PM IST
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मेडिकल कालेज मे बन्द पड़ा ई ई जी रूम ।
- फोटो : mahesh kumar
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मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस की इलाज की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। पहले दवा खत्म हुई और अब ईईजी जांच, एक्सरे भी ठप पड़ चुकी है। दरअसल, एक्सरे टेक्नीशियन के काम छोड़ देने से वहां ताला लग गया है। ऐसे में अब मरीजों को बाहर से जांच और एक्सरे कराना पड़ रहा है।
यूं तो शासन से प्रशासन इंसेफेलाइटिस को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है। इलाज मुफ्त हो सके, इसके लिए सारी सुविधाएं भी मेडिकल कॉलेज को मुहैया कराई गई हैं। मगर एक तरफ बजट की कमी के कारण कईं मशीनें बेकार पड़ी हैं। तो दूसरी तरफ केमिकल और पेपर न होने से ईईजी जांच भी बंद है। वहीं, एक्सरे जांच केंद्र पर टेक्नीशियन के न होने से ताला लटक गया है।
मुफ्त में होने वाली ईईजी जांच के लिए मरीजों को प्राइवेट पैथोलॉजी में 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। दवाएं भी पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। खुद एसआईसी ने दवाओं को लेकर पत्राचार कर मरीजों को मुसीबत होने की बात कही है और जल्द इंतजाम करने के लिए लिखा है। करीब एक हफ्ते पहले ही इंसेफेलाइटिस की 25 दवाएं खत्म हो चुकी हैं।
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बता दें कि यह हाल सिर्फ इंसेफेलाइटिस की दवाओं का ही नहीं है। करीब पांच महीने से एक-एक कर अस्पताल से दवाएं खत्म होती जा रही हैं। तीमारदार जब बाहर से दवा लेकर आते हैं तब उनके मरीज का इलाज शुरू हो पाता है।
दवाएं जल्द आएं, इसकी कोशिश की जा रही है। ईईजी व एक्सरे की जांच भी जल्द ही शुरू करा दी जाएगी।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, प्रभारी एसआईसी, मेडिकल कॉलेज
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यूं तो शासन से प्रशासन इंसेफेलाइटिस को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है। इलाज मुफ्त हो सके, इसके लिए सारी सुविधाएं भी मेडिकल कॉलेज को मुहैया कराई गई हैं। मगर एक तरफ बजट की कमी के कारण कईं मशीनें बेकार पड़ी हैं। तो दूसरी तरफ केमिकल और पेपर न होने से ईईजी जांच भी बंद है। वहीं, एक्सरे जांच केंद्र पर टेक्नीशियन के न होने से ताला लटक गया है।
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मुफ्त में होने वाली ईईजी जांच के लिए मरीजों को प्राइवेट पैथोलॉजी में 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। दवाएं भी पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। खुद एसआईसी ने दवाओं को लेकर पत्राचार कर मरीजों को मुसीबत होने की बात कही है और जल्द इंतजाम करने के लिए लिखा है। करीब एक हफ्ते पहले ही इंसेफेलाइटिस की 25 दवाएं खत्म हो चुकी हैं।
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बता दें कि यह हाल सिर्फ इंसेफेलाइटिस की दवाओं का ही नहीं है। करीब पांच महीने से एक-एक कर अस्पताल से दवाएं खत्म होती जा रही हैं। तीमारदार जब बाहर से दवा लेकर आते हैं तब उनके मरीज का इलाज शुरू हो पाता है।
दवाएं जल्द आएं, इसकी कोशिश की जा रही है। ईईजी व एक्सरे की जांच भी जल्द ही शुरू करा दी जाएगी।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, प्रभारी एसआईसी, मेडिकल कॉलेज