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कर्ज में डूबे ट्रांसपोर्टर ने की खुदकुशी
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कर्ज में डूबे ट्रांसपोर्टर ने की खुदकुशी
गोरखपुर। रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल वसुंधरा इन्क्लेव में किराए का कमरा लेकर रहने वाले ट्रांसपोर्टर दुर्गेश सिंह (30) ने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि व्यापार में घाटा होने की वजह से वह कर्ज में डूब गए थे और फिर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। शनिवार की सुबह घटना की जानकारी होने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के मुताबिक, बेलघाट के बहादुरपुर गांव के मूल निवासी स्व. सुदामा सिंह के इकलौते पुत्र दुर्गेश सिंह मां, पत्नी माला और पांच साल के बेटे के साथ किराए के कमरे में रहते थे। वह ट्रांसपोर्ट और साझेदारी में सिक्योरिटी कंपनी चलाने का काम करते थे। दोस्तों के मुताबिक, दुर्गेश तीन ट्रक फाइनेंस कराकर चलवा रहे थे। इधर कुछ माह से ट्रक का किस्त जमा नहीं हो पाने पर फाइनेंस कंपनी के प्राइवेट कर्मचारी लगातार तगादा कर रहे थे। इससे परेशान होकर उन्होंने दो ट्रक बेच दिए। इस बीच वह साझेदारी में शहर में सिक्योरिटी एजेंसी चला रहे थे। उसमें भी घाटा होने पर वह काफी परेशान थे। शुक्रवार की देर शाम वह वसुंधरा इन्क्लेव पहुंचे। इन्क्लेव के पार्किंग स्थल पर वह खड़े होकर काफी देर तक किसी से बात किए। रात में तकरीबन 11 बजे वह कमरे पर पहुंचे। पत्नी और बच्चे को दूसरे कमरे में सोने के लिए भेज दिए। सुबह जब काफी देर तक उनका कमरा नहीं खुला तो पत्नी ने कुछ लोगों को फोन कर बुलाया। वह दरवाजे को धक्का देकर देखे तो मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस दरवाजा तोड़ कर कमरे में पहुंची तो पंखे में फंदे से उनकी लाश लटक रही थी।
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गोरखपुर। रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल वसुंधरा इन्क्लेव में किराए का कमरा लेकर रहने वाले ट्रांसपोर्टर दुर्गेश सिंह (30) ने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि व्यापार में घाटा होने की वजह से वह कर्ज में डूब गए थे और फिर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। शनिवार की सुबह घटना की जानकारी होने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के मुताबिक, बेलघाट के बहादुरपुर गांव के मूल निवासी स्व. सुदामा सिंह के इकलौते पुत्र दुर्गेश सिंह मां, पत्नी माला और पांच साल के बेटे के साथ किराए के कमरे में रहते थे। वह ट्रांसपोर्ट और साझेदारी में सिक्योरिटी कंपनी चलाने का काम करते थे। दोस्तों के मुताबिक, दुर्गेश तीन ट्रक फाइनेंस कराकर चलवा रहे थे। इधर कुछ माह से ट्रक का किस्त जमा नहीं हो पाने पर फाइनेंस कंपनी के प्राइवेट कर्मचारी लगातार तगादा कर रहे थे। इससे परेशान होकर उन्होंने दो ट्रक बेच दिए। इस बीच वह साझेदारी में शहर में सिक्योरिटी एजेंसी चला रहे थे। उसमें भी घाटा होने पर वह काफी परेशान थे। शुक्रवार की देर शाम वह वसुंधरा इन्क्लेव पहुंचे। इन्क्लेव के पार्किंग स्थल पर वह खड़े होकर काफी देर तक किसी से बात किए। रात में तकरीबन 11 बजे वह कमरे पर पहुंचे। पत्नी और बच्चे को दूसरे कमरे में सोने के लिए भेज दिए। सुबह जब काफी देर तक उनका कमरा नहीं खुला तो पत्नी ने कुछ लोगों को फोन कर बुलाया। वह दरवाजे को धक्का देकर देखे तो मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस दरवाजा तोड़ कर कमरे में पहुंची तो पंखे में फंदे से उनकी लाश लटक रही थी।
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