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ऑक्सीजन का भुगतान रोकने वाले तीन बाबू सस्पेंड

Fri, 25 Aug 2017 07:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Fri, 25 Aug 2017 07:48 PM IST
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Three suspend in BRD Medical college incident
मेडिकल कॉलेज।
बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में हुई मासूमों की मौतों का कारण बनी लिक्विड ऑक्सीजन के भुगतान की फाइल लटकाने वाले तीन बाबू नप गए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने इन्हें निलंबित कर दिया है। प्राचार्य की इस कार्रवाई से कर्मचारियों में खलबली है।
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10-11 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो गई थी। ऑक्सीजन संकट के बीच कॉलेज के नेहरू अस्पताल में भर्ती कई मासूमों की मौत हो गई थी। मामला सुर्खियों में आया तो जीवनरक्षक ऑक्सीजन जैसे संवेदनशील मामले में भारी लापरवाही भी उजागर हुई। शासन के निर्देश पर मामले में तत्कालीन प्राचार्य का निलंबन करके उन्हें डीजी हेल्थ कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इसके साथ ही फंड होने के बाद भुगतान लटकाने को लेकर तीन लिपिकों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए। डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई तो इसमें भी इन बाबुओं की भूमिका पर प्रश्न चिह्न लगा। मुख्य सचिव की हाई लेवल कमेटी की जांच के बाद अब प्राचार्य ने इन बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई की है।
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गुरुवार को भुगतान लटकाने वाले लिपिक संजय कुमार त्रिपाठी, उदय शर्मा और सुधीर पांडेय के निलंबन का आदेश जारी किया गया। इनमें संजय कुमार त्रिपाठी और उदय को निलंबन का आदेश रिसीव करा दिया गया है। सुधीर पांडेय को आदेश रिसीव कराने के लिए जब कर्मचारी पहुंचा तो वह गायब मिले। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि सुधीर को भी निलंबन आदेश जल्द ही रिसीव करा दिया जाएगा। इस मामले से जुड़े अन्य लोगों पर कार्रवाई शासन एवं उच्चाधिकारियों के स्तर से की जाएगी। उन पर कार्रवाई मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
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ढाई करोड़ रुपये लौटने पर भी मिले थे दोषी
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने जिन तीन लिपिकों का निलंबन किया है वो वित्तीय वर्ष 2016-17 में ढाई करोड़ रुपये का फंड शासन को लौटने के मामले में भी दोषी पाए गए थे। तब तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। इस जांच में इन लिपिकों की भूमिका पर सवाल उठाया गया था। भुगतान की कई फाइलें लटकाने का मामला सामने आया था। ऑक्सीजन सप्लाई से लेकर दवा एवं सर्जिकल सामान का बकाया था। मेडिकल कॉलेज के खाते में ढाई करोड़ रुपये की रकम थी फिर भी बकाया भुगतान न करके इन बाबुओं ने फाइल लटका रखी थी। हालांकि, जांच रिपोर्ट आने के बाद भी इन बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई थी।
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