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खाली कराया गया गेस्ट हाउस का कमरा

Wed, 27 Jul 2016 09:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Wed, 27 Jul 2016 09:15 PM IST
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The room of university guest house has been vaccented
गोरखपुर यूनिवर्सिटी
बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के दो साल से अधिक समय से गोरखपुर यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में काबिज रहने वाले कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष मनीष त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। पूर्व अध्यक्ष से गेस्ट हाउस का कमरा खाली करा लिया गया है और अब कमरे के किराए के रिकवरी की तैयारी है। यूनिवर्सिटी के संपत्ति अधिकारी ने त्रिपाठी पर तीन लाख 15 हजार रुपये की देनदारी तय की है।
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पूर्व अध्यक्ष मनीष त्रिपाठी के यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस में लंबे समय की रिहाइश को लेकर खलीलाबाद के चंदन उपाध्याय ने आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। सूचना मिलने के बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत की। कहा था कि मनीष त्रिपाठी 14 अप्रैल 2014 से 16 फरवरी 2015 तक गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 306 में रहते थे। जिसका किराया 2 लाख 44 हजार हुआ, जबकि 17 दिसंबर 2015 से 5 जनवरी 2016 तक रूम नंबर 215 में वह ठहरे। इसका किराया 6000 रुपये हुआ।
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शिकायत के बाद भी पूर्व अध्यक्ष गेस्ट हाउस में काबिज रहे और बकाया किराया बढ़कर तीन लाख 15 हजार पहुंच गया। मनीष से गेस्ट हाउस तो खाली कराया ही गया, रिकवरी का नोटिस भी जारी किया गया है। रजिस्ट्रार अशोक कुमार अरविंद ने बताया कि संपत्ति अधिकारी को रिकवरी का निर्देश जारी कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी की संपत्ति के इस्तेमाल का किराया तो देना ही होगा। 
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लंबी रिहाइश की वैधता पर उठा सवाल
दो वर्ष से अधिक समय तक गेस्ट हाउस में काबिज रहने वाले कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष मनीष त्रिपाठी के लिए रिकवरी का आदेश तो जारी हो गया लेकिन लंबी रिहाइश की वैधता का सवाल अब भी निरुत्तर है। नियमानुसार गेस्ट हाउस में कोई भी अतिथि तीन दिन से अधिक नहीं रह सकता। यदि उसे रहने की जरूरत है तो बाकायदा यूनिवर्सिटी प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। जानकारों की मानें तो बिना अनुमति के मनीष इतने लंबे समय तक गेस्ट हाउस में रहे तो उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी होनी चाहिए, लेकिन इस सवाल पर यूनिवर्सिटी प्रशासन जवाब देने से कतरा रहा है।
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