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पैथोलॉजी से बैक डेट में तैयार हो रही रिपोर्ट
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Dec 2015 08:34 PM IST
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जिला अस्पताल के पैथोलॉजी से बैक डेट में इंट्री कर फर्जी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। फर्जी रिपोर्ट के जरिए मेडिकल बनाए जाने का खुलासा एसआईसी के जांच में हो चुका है। दरअसल, सुरेश प्रसाद गौड़ (50) नामक एक शख्स का दो अलग-अलग डेट में रिपोर्ट तैयार करने के लिए रजिस्टर में इंट्री तो कर दी गई मगर डबल डेट होने पर मामला पकड़ में आ गया।
जांच में सामने आया है कि सुरेश प्रसाद की 4 सितंबर को ब्लड और पेशाब की जांच हुई। इसमें कई जांच के बाद उन्हें बेहद बीमार दिखाया गया। 24 अक्टूबर को फिर जांच रिपोर्ट तैयार कर सब कुछ ठीक दिखा दिया गया। बताया जाता है कि सुरेश खुद ही घूमकर इस बात को कहने लगा कि रुपये देकर यहां पर मेडिकल रिपोर्ट तैयार हो जाती है। मामला एसआईसी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने पर्ची रख ली और रजिस्टर मंगवाया तो सामने आया कि 4 दिसंबर को क्रम संख्या 24 को डबल लिखा गया था और एक पर अमरेंद्र था तो दूसरे पर नाम सुरेश का दर्ज है।
ठीक यही काम 24 अक्टूबर को हुआ है। क्रम संख्या 31 डबल लिखा गया और एक पर कृष्ण पांडेय थे तो दूसरे पर सुरेश। मामला उजागर होने के बाद पैथोलॉजी प्रभारी डॉ. केएम सिंह, डॉ. जेपी सिंह, केपी शुक्ला लैब टेक्नीशियन को बुलाया। दोनों ही डॉक्टरों ने इसकी जानकारी न होने से इंकार किया तो वही जेपी शुक्ला ने गलत हुआ यह तो स्वीकार किया मगर किसने और क्यों किया इस पर कुछ नहीं बोले।
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एसआईसी डॉ. एचआर यादव ने बताया कि पैथोलॉजी से बैक डेट में रिपोर्ट तैयार हुआ है। इस मामले में पूछताछ करने के बाद जवाब मांगा गया है, इस मामले में कार्रवाई होगी। बुधवार को कर्मचारियों द्वारा किया गया सारा विवाद इसी वजह से हुआ है। चूंकि इसकी जांच में वह दोषी साबित हो चुके हैं।
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जांच में सामने आया है कि सुरेश प्रसाद की 4 सितंबर को ब्लड और पेशाब की जांच हुई। इसमें कई जांच के बाद उन्हें बेहद बीमार दिखाया गया। 24 अक्टूबर को फिर जांच रिपोर्ट तैयार कर सब कुछ ठीक दिखा दिया गया। बताया जाता है कि सुरेश खुद ही घूमकर इस बात को कहने लगा कि रुपये देकर यहां पर मेडिकल रिपोर्ट तैयार हो जाती है। मामला एसआईसी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने पर्ची रख ली और रजिस्टर मंगवाया तो सामने आया कि 4 दिसंबर को क्रम संख्या 24 को डबल लिखा गया था और एक पर अमरेंद्र था तो दूसरे पर नाम सुरेश का दर्ज है।
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ठीक यही काम 24 अक्टूबर को हुआ है। क्रम संख्या 31 डबल लिखा गया और एक पर कृष्ण पांडेय थे तो दूसरे पर सुरेश। मामला उजागर होने के बाद पैथोलॉजी प्रभारी डॉ. केएम सिंह, डॉ. जेपी सिंह, केपी शुक्ला लैब टेक्नीशियन को बुलाया। दोनों ही डॉक्टरों ने इसकी जानकारी न होने से इंकार किया तो वही जेपी शुक्ला ने गलत हुआ यह तो स्वीकार किया मगर किसने और क्यों किया इस पर कुछ नहीं बोले।
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एसआईसी डॉ. एचआर यादव ने बताया कि पैथोलॉजी से बैक डेट में रिपोर्ट तैयार हुआ है। इस मामले में पूछताछ करने के बाद जवाब मांगा गया है, इस मामले में कार्रवाई होगी। बुधवार को कर्मचारियों द्वारा किया गया सारा विवाद इसी वजह से हुआ है। चूंकि इसकी जांच में वह दोषी साबित हो चुके हैं।