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श्रीमद्भागवत कथा का 6वां दिन: सत्य स्वरूप परमात्मा का ध्यान ही उत्तम भक्ति: अखंडानंद महाराज

Sun, 22 Dec 2019 10:45 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Sun, 22 Dec 2019 10:45 AM IST
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Swami Akhandanand Bhagwat Katha day 6th day organise bhaiya ji daal bhaat parivar gorakhpur
कथा व्यास स्वामी अखंडानंद - फोटो : अमर उजाला
शरीर नश्वर है, इसलिए इसे विभिन्न रूपों में भागवत भजन के कार्य में ही लगाना उत्तम प्रवृत्ति है। भागवत भजन के जरिए हम सत्य स्वरूप परमात्मा का ध्यान करते हैं। कथा व्यास अखंडानंद ने यह बात परिणय स्थली मैरेज हाउस बैंक रोड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कही। उन्होंने शनिवार को मन, वासना और कर्म के महत्व से श्रद्धालुओं का परिचय कराया।  
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भूख मुक्त भारत का संकल्प भईया जी का दाल भात के उद्देश्यों को समर्पित श्रीमद भागवत कथा के का आरंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यजमान परिवार की ओर से पूजन अर्चन और दीप जलाने के साथ कथा व्यास अखंडानंद ने किया। आरंभ कार्य में सुबोध सिंह, राणा राहुल सिंह, अजय सिंह, बाबा मिश्र, संगीता रूंगटा, योगेंद्र नाथ दुबे, वासुकीनाथ अग्रवाल, अतुल मिश्र (प्रयाग) रमेश चक्त्रस्वर्ती और बृजेंद्र सिंह ने किया।
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उद्धव गोपी संवाद का रसास्वादन

Swami Akhandanand Bhagwat Katha day 6th day organise bhaiya ji daal bhaat parivar gorakhpur
परिणय स्थली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा - फोटो : अमर उजाला
कथा व्यास ने बताया कि श्रीमदभागवत का अर्थ है भगवान में रत, लीन हो जाना। गोपी लीला वर्णन करते हुए उद्धव गोपी संवाद का रसास्वादन कराया। बताया कि गुरु से मिलने और मंदिर कभी खाली जाना नहीं जाना चाहिए। आचरण को निष्काम भाव से करते रहना चाहिए, अच्छे भक्त का यही लक्षण है।

कथा सुनने से मन की व्यथा दूर हो जाती है, यदि हृदय से कथा सुनेंगे तो आप को खुद ही साक्षात भगवान की अनुभूति होगी। कथा व्यास ने बाल लीला में सभी असुरों के वध का भी उल्लेख किया।

शनिवार को भागवत कथा सुनने के लिए अनेक श्रद्धालु पहुंचें थे। कथा के अंत में आरती हुई, प्रयागराज से आये शत्रुध्न  ब्रह्मचारी, सुधा विश्वबिंदु, रंजीत ओझा, सोनू निगम, एमपी सिंह, राजीव, सिद्धार्थ, महानंद यादव मौजूद रहे।

इसके बाद पारुल सिंह, अतुल तिवारी, प्रमुख व्यवस्था समिति से भईया जी का दाल भात के यशवंत सिंह ने दाल भात परिवार की परिकल्पना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भूख मुक्ति के लिए एक मुट्ठी अनाज-भूख मुक्त समाज मुहिम में सहयोग की अपील की।

‘बस यूं मरूं की तिरंगा नसीब हो मुझको’

गोरखपुर। भाई जी का दाल-भात परिवार की गोरखपुर इकाई और भारत विकास परिषद गोरक्ष प्रांत उत्तर मध्य क्षेत्र की तरफ से शनिवार को बैंक रोड स्थित परिणय स्थली पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसका उद्घाट कथाव्यास स्वामी अखंडानंद, संत अलख राम और डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने किया।

सुभाष यादव ने ... यही आरजू है और यही तमन्ना है कि बस यूं मरूं की तिरंगा नसीब हो मुझको... कविता पढ़कर देशभक्ति का भाव जगाया। प्रदीप मिश्रा, शाहीन शेख, निशा राय, वसीम मजहर गोरखपुरी और शाकिर अली शाकिर ने भी काव्य पाठ करके वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर डॉ. कलीम कैसर और संचालन मिन्नतुल्लाह मिन्नत गोरखपुरी ने किया। इस मौके पर जसवंत सिंह, गुड्डू मिश्रा, डॉ. अमित सिंह, डॉ. निशा अग्रवाल, संजय जायसवाल, कनकहरी अग्रवाल, राजन तिवारी, महेंद्र यादव और सोनू निगम मौजूद रहे।
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