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हर दिल में गहरा गम हर आंख हुई नम
आशुतोष मिश्र
Updated Tue, 27 Jun 2017 02:29 AM IST
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शहीद का शव गांव में पहुंचने पर सभी की आंखे नम हो गई थी।
- फोटो : Amar Ujala
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साहब शुक्ला की शहादत से लोगों के मन में कुर्बानी के तसव्वुर के साथ देश प्रेम का जज्बा उफान ले रहा था तो पाकिस्तान और आतंकवाद के प्रति आक्रोश व नफरत का ज्वार भी उठ रहा था। सोमवार सुबह गोरखपुर से सैन्य सम्मान के साथ शहीद का पार्थिव शरीर लेकर चला सुरक्षा बल और पुलिस का काफिला जैसे ही कसिहार मोड़ पर पहुंचा तो गांव से बाहर निकलकर अपने प्रिय साहब के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रही भीड़ के कदम गांव में दाखिल होते वाहनों की कतार की ओर बढ़ गए। कुछ युवाओं के समूह ने मोटर साइकिलें दौड़ा दीं। इसके साथ ही गूंजने लगे ‘साहब शुक्ला अमर रहें’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे। रास्तों से लेकर शहीद के घर तक भीड़ का रेला था तो साहब के घर से लेकर अंत्येष्टि स्थल तक भी जनसैलाब का ऐसा ही नजारा देखने को मिला। गहरे गम से नम हुई आंखों से अंतिम दर्शन के बाद साहब को अंतिम विदाई दी गई।
गम और गुस्से का भाव गांव में मौजूद हर शख्स के चेहरे पर था। पूरे इलाके की दुकानें बंद थीं तो हर छत पर महिलाओं और बच्चों की भीड़ थी। कहीं से फूलों की बारिश तो कहीं हाथ जोड़कर अंतिम प्रणाम की मुद्रा थी। घर के दरवाजे पर जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा तो पत्नी शुभा शुक्ला और बहुएं ज्योति व रागिनी फूट पड़ीं। दो दिन से बरसती आंखों के बीच मुंह से भी बहुत कुछ निकला। ताबूत से लिपटकर रोते परिवार के सदस्यों को संयत करने वाले पड़ोस के परिवार खुद भी असंयत हो जा रहे थे। पति की शहादत पर गर्व होने की बात कहते-कहते शुभा बेहोश हो गईं। बहुओं ने सहारा दिया तो जरूरी रस्में आगे बढ़ीं। अपने साथी को खोने से गमजदा सीआरपीएफ जवानों ने 72 राउंड फायर करके और शस्त्र झुकाकर शहीद को अंतिम सलामी दी। जिला प्रशासन, पुलिस, सीआरपीएफ के अफसरों ने पुष्प चक्र के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की तो कई दलों के नेता व जनप्रतिनिधि श्रद्धा सुमन अर्पित करने आगे आए।
शहीद के प्रति श्रद्धा का सैलाब ऐसा था कि जब चारों बेटे शहीद के पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर निकले तो घाट से बंधे तक करीब डेढ़ किलोमीटर के हिस्से में लोगों का रेला ही नजर आया।
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गोरखपुर। शहीद साहब शुक्ला के प्रति श्रद्धा के साथ पाकिस्तान के प्रति आक्रोश का भाव लिए तमाम युवाओं ने जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर आते देखा तो उनके बीच से गूंज उठी, ‘देखो-देखो कौन आया... भारत मां का शेर आया’। जब तक सूरज-चांद रहेगा, साहब तेरा नाम रहेगा... वंदे मातरम जैसे नारे भी गुंजायमान हुए। आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को कोसते कुछ युवकों ने आनन फानन पाक का पुतला तैयार करके आग के हवाले कर दिया।
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गम और गुस्से का भाव गांव में मौजूद हर शख्स के चेहरे पर था। पूरे इलाके की दुकानें बंद थीं तो हर छत पर महिलाओं और बच्चों की भीड़ थी। कहीं से फूलों की बारिश तो कहीं हाथ जोड़कर अंतिम प्रणाम की मुद्रा थी। घर के दरवाजे पर जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा तो पत्नी शुभा शुक्ला और बहुएं ज्योति व रागिनी फूट पड़ीं। दो दिन से बरसती आंखों के बीच मुंह से भी बहुत कुछ निकला। ताबूत से लिपटकर रोते परिवार के सदस्यों को संयत करने वाले पड़ोस के परिवार खुद भी असंयत हो जा रहे थे। पति की शहादत पर गर्व होने की बात कहते-कहते शुभा बेहोश हो गईं। बहुओं ने सहारा दिया तो जरूरी रस्में आगे बढ़ीं। अपने साथी को खोने से गमजदा सीआरपीएफ जवानों ने 72 राउंड फायर करके और शस्त्र झुकाकर शहीद को अंतिम सलामी दी। जिला प्रशासन, पुलिस, सीआरपीएफ के अफसरों ने पुष्प चक्र के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की तो कई दलों के नेता व जनप्रतिनिधि श्रद्धा सुमन अर्पित करने आगे आए।
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शहीद के प्रति श्रद्धा का सैलाब ऐसा था कि जब चारों बेटे शहीद के पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर निकले तो घाट से बंधे तक करीब डेढ़ किलोमीटर के हिस्से में लोगों का रेला ही नजर आया।
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