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राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तकनीक व सद्गुण दोनों का समावेश : प्रो हरिकेश
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ब्रम्हलीन मंहत दिग्विजय नाथ के 125 वीं जयंती वर्ष एंव राष्ट्र संत ब्रम्हलीन मंहत अवेद्यनाथ के जन्?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तकनीक व सद्गुण दोनों का समावेश : प्रो हरिकेश
गोरखपुर। जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा, बिहार के कुलपति प्रो हरिकेश सिंह ने कहा कि जीवन जीने के लिए तकनीकी एवं सद्गुण दोनों ही जरूरी हैं। वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दोनों का समावेश है। इसका ड्राफ्ट विश्व स्तर पर युवा पीढ़ी को तैयार करने के लिए अच्छा है लेकिन इसके क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
यह बातें प्रो हरिकेश सिंह ने रविवार को दिग्विजयनाथ एलटी प्रशिक्षण महाविद्यालय के सभागार में कहीं। वे महंत दिग्विजयनाथ की 126 वीं जयंती एवं महंत अवेद्यनाथ के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं महंत दिग्विजयनाथ’ को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। प्रो हरिकेश ने सनातन धर्म परंपरा और महंत दिग्विजयनाथ के क्रिया-कलापों की चर्चा की।
मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष प्रो. नरेश प्रसाद भोक्ता ने 1968 से 2019 तक की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रत्येक पहलुओं पर प्रकाश डाला। कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने संसद में शिक्षा नीति पर अपना नोट आफ डिसेंट की चर्चा करते हुए उसके विभिन्न विषयों को सरल ढंग से प्रस्तुत किया। उस समय महंत दिग्विजयनाथ की जो सोच थी, उसका उल्लेख आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 में मिलता है।
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अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राम अचल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी है। आज के परिवेश में विषय ज्ञान के साथ चारित्रिक ज्ञान दिए जाने की जरूरत है।
नई शिक्षा नीति सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित है। प्राचार्य प्रो सुमित्रा सिंह ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार ज्ञापन तथा संचालन डॉ मधुसूदन सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. शोभा गौड़, डॉ गिरीश चंद पाठक, डॉ एसपी सिंह, अंजनी सिंह आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर। जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा, बिहार के कुलपति प्रो हरिकेश सिंह ने कहा कि जीवन जीने के लिए तकनीकी एवं सद्गुण दोनों ही जरूरी हैं। वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दोनों का समावेश है। इसका ड्राफ्ट विश्व स्तर पर युवा पीढ़ी को तैयार करने के लिए अच्छा है लेकिन इसके क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
यह बातें प्रो हरिकेश सिंह ने रविवार को दिग्विजयनाथ एलटी प्रशिक्षण महाविद्यालय के सभागार में कहीं। वे महंत दिग्विजयनाथ की 126 वीं जयंती एवं महंत अवेद्यनाथ के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं महंत दिग्विजयनाथ’ को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। प्रो हरिकेश ने सनातन धर्म परंपरा और महंत दिग्विजयनाथ के क्रिया-कलापों की चर्चा की।
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मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष प्रो. नरेश प्रसाद भोक्ता ने 1968 से 2019 तक की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रत्येक पहलुओं पर प्रकाश डाला। कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने संसद में शिक्षा नीति पर अपना नोट आफ डिसेंट की चर्चा करते हुए उसके विभिन्न विषयों को सरल ढंग से प्रस्तुत किया। उस समय महंत दिग्विजयनाथ की जो सोच थी, उसका उल्लेख आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 में मिलता है।
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अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राम अचल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी है। आज के परिवेश में विषय ज्ञान के साथ चारित्रिक ज्ञान दिए जाने की जरूरत है।
नई शिक्षा नीति सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित है। प्राचार्य प्रो सुमित्रा सिंह ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार ज्ञापन तथा संचालन डॉ मधुसूदन सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. शोभा गौड़, डॉ गिरीश चंद पाठक, डॉ एसपी सिंह, अंजनी सिंह आदि मौजूद रहे।