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बाजार में नहीं कोई मंदी, बस कैश का फ्लो घटा
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अमर उजाला की ओर से आयोजित समृद्धि संवाद में प्रशांत राय,अतुल सिंह, श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ‘अनिल’,
बाजार में नहीं कोई मंदी, बस कैश का फ्लो घटा
गोरखपुर। सोशल मीडिया पर आर्थिक मंदी के शोर के बीच लोगों ने खर्च की सीमा घटा दिया है। कैश का फ्लो घट जाने से इसका असर बाजार पर पड़ रहा है। जीडीपी में सुधार के लिए जरूरी है कि लोग खरीद-फरोख्त करते रहें। इससे बाजार सुदृढ़ होगा और मंदी का संकट भी खत्म हो जाएगा।
ये बातें अमर उजाला की ओर से सिटी ऑफिस में आयोजित ‘समृद्धि संवाद’ कार्यक्रम में शुक्रवार को इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों ने कहीं। कार्यक्रम में आर्थिक मंदी के असर को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। व्यापारियों ने कहा कि न लोगों ने खाना-पीना छोड़ा है और न ही कपड़े पहनना या घूमना। मंदी के शोर की वजह से लोग बस जरूरत की चीजों की खरीदारी पर ही फोकस कर रहे हैं। तकरीबन हर वर्ष जुलाई से सितंबर तक का समय कारोबार के नजरिए से धीमा होता है। इसकी कमी आने वाले त्योहारी सीजन से पूरी की जाती है। इसे लेकर सभी व्यापारियों ने विशेष तैयारियां की हैं।
उद्यमी बोले
युवाओं के खर्च की सीमा बढ़ी
मंदी के शोर के बीच लोग अपनी बजत को सुरक्षित रखना चाह रहे हैं। कम निवेश हो रहे हैं, जिस वजह से अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से आगे बढ़नी चाहिए, नहीं बढ़ रही है। ये आर्थिक सुस्ती हर वर्ष रहती है, कोई दुकानदार अगर दस उत्पाद रखता है तो जरूरी नहीं कि सभी समान उसी तेजी से बढ़े, डिमांड के मुताबिक वह उत्पादों को बढ़ाता और घढ़ाता है। नई पीढ़ी के खर्च की सीमा बढ़ी है, पितृपक्ष में भी खरीदारी हो रही है।
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आनंद रूंगटा, निदेशक, रूंगटा एजेंसी
50 फीसदी बढ़ा गीजर का कारोबार
मंदी को लेकर व्यर्थ का शोरगुल है। कंपनियां भी जानती हैं कि ये महीने कारोबार के लिहाज से थोड़ा मंदा रहता है। इससे उबरने के लिए वे इस दौरान कई तरह के लुभावने ऑफर देती हैं। लोगों की सोच बदली है। अब पितृपक्ष में भी लोग खरीदारी कर रहे हैं। घूमने और खाने-पीने पर खर्च कर रहे हैं। गीजर के कारोबार ने 50 फीसदी की बढ़त पिछले साल से हासिल की है। अगर वाकई मंदी है तो व्यापार बूम कैसे कर सकता है।
श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ‘अनिल’, प्रोपराइटर एसएस पॉवर एजेंसी
ग्राहक के खर्च करने की क्षमता बढ़ी
आर्थिक मंदी का शोर महज सोशल मीडिया की वजह से है। ग्राहक के मन में मंदी को लेकर कुछ भी नहीं है। मार्केट में डिमांड का कम होना सीजनल है। ऐसा हर साल होता है। इस सीजन में क्रय विक्रय में थोड़ी सुस्ती रहती ही है। आज ग्राहक 10 हजार रुपया लेकर मार्केट में आता है और 15 हजार का सामान खरीदकर जाता है। ग्राहक के खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। वह अपनी पसंद से कोई समझौता नहीं चाहता है।
अतुल सिंह, प्रोपराइटर क्लाइमेट वर्ल्ड
ऑनलाइन कंपनियों ने पेश की चुनौती
ऑनलाइन कंपनियों ने रिटेल कारोबारियों के सामने चुनौती पेश की है। किसी सामान को खरीदने के लिए जब कोई घर से बाहर निकलेगा तो पेट्रोल डलाएगा, घूमेगा-फिरेगा, भूख लगेगी तो कुछ खाएगा। ये सब कैश के फ्लो को बढ़ाता है। घर बैठे खरीदारी होने से ये पूरी प्रक्रिया खत्म हो गई है। बाजार की चुनौतियों के मुताबिक व्यापारी तैयार हैं, मगर सरकार को भी ऑनलाइन कंपनियों पर थोड़ा लगाम लगाने की जरूरत है।
प्रशांत राय, वसुंधरा कम्यूनिकेशन
कारोबार अच्छा, मंदी जैसा कुछ नहीं
मंदी जैसा कुछ भी नहीं है। इस समय कारोबार अच्छा चल रहा है। आने वाले त्योहार और शादी के सीजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पितृपक्ष के दौरान हर साल कारोबार थोड़ा ठंडा रहता है। इसकी भरपाई इस सीजन के शुरू होने से पहले से ही कारोबारी कर लेते हैं। मई और जून में ही सिलाई मशीन और कूलर की डबल डिमांड पूरी की गई है। मंदी का कोई असर नहीं है, यह बस सोशल मीडिया की उपज है।
एसके साहू, निदेशक, साहू समूह
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गोरखपुर। सोशल मीडिया पर आर्थिक मंदी के शोर के बीच लोगों ने खर्च की सीमा घटा दिया है। कैश का फ्लो घट जाने से इसका असर बाजार पर पड़ रहा है। जीडीपी में सुधार के लिए जरूरी है कि लोग खरीद-फरोख्त करते रहें। इससे बाजार सुदृढ़ होगा और मंदी का संकट भी खत्म हो जाएगा।
ये बातें अमर उजाला की ओर से सिटी ऑफिस में आयोजित ‘समृद्धि संवाद’ कार्यक्रम में शुक्रवार को इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों ने कहीं। कार्यक्रम में आर्थिक मंदी के असर को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। व्यापारियों ने कहा कि न लोगों ने खाना-पीना छोड़ा है और न ही कपड़े पहनना या घूमना। मंदी के शोर की वजह से लोग बस जरूरत की चीजों की खरीदारी पर ही फोकस कर रहे हैं। तकरीबन हर वर्ष जुलाई से सितंबर तक का समय कारोबार के नजरिए से धीमा होता है। इसकी कमी आने वाले त्योहारी सीजन से पूरी की जाती है। इसे लेकर सभी व्यापारियों ने विशेष तैयारियां की हैं।
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उद्यमी बोले
युवाओं के खर्च की सीमा बढ़ी
मंदी के शोर के बीच लोग अपनी बजत को सुरक्षित रखना चाह रहे हैं। कम निवेश हो रहे हैं, जिस वजह से अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से आगे बढ़नी चाहिए, नहीं बढ़ रही है। ये आर्थिक सुस्ती हर वर्ष रहती है, कोई दुकानदार अगर दस उत्पाद रखता है तो जरूरी नहीं कि सभी समान उसी तेजी से बढ़े, डिमांड के मुताबिक वह उत्पादों को बढ़ाता और घढ़ाता है। नई पीढ़ी के खर्च की सीमा बढ़ी है, पितृपक्ष में भी खरीदारी हो रही है।
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आनंद रूंगटा, निदेशक, रूंगटा एजेंसी
50 फीसदी बढ़ा गीजर का कारोबार
मंदी को लेकर व्यर्थ का शोरगुल है। कंपनियां भी जानती हैं कि ये महीने कारोबार के लिहाज से थोड़ा मंदा रहता है। इससे उबरने के लिए वे इस दौरान कई तरह के लुभावने ऑफर देती हैं। लोगों की सोच बदली है। अब पितृपक्ष में भी लोग खरीदारी कर रहे हैं। घूमने और खाने-पीने पर खर्च कर रहे हैं। गीजर के कारोबार ने 50 फीसदी की बढ़त पिछले साल से हासिल की है। अगर वाकई मंदी है तो व्यापार बूम कैसे कर सकता है।
श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ‘अनिल’, प्रोपराइटर एसएस पॉवर एजेंसी
ग्राहक के खर्च करने की क्षमता बढ़ी
आर्थिक मंदी का शोर महज सोशल मीडिया की वजह से है। ग्राहक के मन में मंदी को लेकर कुछ भी नहीं है। मार्केट में डिमांड का कम होना सीजनल है। ऐसा हर साल होता है। इस सीजन में क्रय विक्रय में थोड़ी सुस्ती रहती ही है। आज ग्राहक 10 हजार रुपया लेकर मार्केट में आता है और 15 हजार का सामान खरीदकर जाता है। ग्राहक के खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। वह अपनी पसंद से कोई समझौता नहीं चाहता है।
अतुल सिंह, प्रोपराइटर क्लाइमेट वर्ल्ड
ऑनलाइन कंपनियों ने पेश की चुनौती
ऑनलाइन कंपनियों ने रिटेल कारोबारियों के सामने चुनौती पेश की है। किसी सामान को खरीदने के लिए जब कोई घर से बाहर निकलेगा तो पेट्रोल डलाएगा, घूमेगा-फिरेगा, भूख लगेगी तो कुछ खाएगा। ये सब कैश के फ्लो को बढ़ाता है। घर बैठे खरीदारी होने से ये पूरी प्रक्रिया खत्म हो गई है। बाजार की चुनौतियों के मुताबिक व्यापारी तैयार हैं, मगर सरकार को भी ऑनलाइन कंपनियों पर थोड़ा लगाम लगाने की जरूरत है।
प्रशांत राय, वसुंधरा कम्यूनिकेशन
कारोबार अच्छा, मंदी जैसा कुछ नहीं
मंदी जैसा कुछ भी नहीं है। इस समय कारोबार अच्छा चल रहा है। आने वाले त्योहार और शादी के सीजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पितृपक्ष के दौरान हर साल कारोबार थोड़ा ठंडा रहता है। इसकी भरपाई इस सीजन के शुरू होने से पहले से ही कारोबारी कर लेते हैं। मई और जून में ही सिलाई मशीन और कूलर की डबल डिमांड पूरी की गई है। मंदी का कोई असर नहीं है, यह बस सोशल मीडिया की उपज है।
एसके साहू, निदेशक, साहू समूह