{"_id":"56f69e084f1c1b7521f14e84","slug":"recognized-by-the-committee-will-examine-the-b-ed","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमेटी बनाकर होगी बीएड मान्यता की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमेटी बनाकर होगी बीएड मान्यता की जांच
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 26 Mar 2016 08:04 PM IST
विज्ञापन
गोरखपुर यूनिवर्सिटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्जी एनओसी और शिक्षक अनुमोदन से एनसीटीई से बीएड की मान्यता हासिल करने के मामले को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। सीधे तौर पर तो दो ही कॉलेज ऐसी धांधली को लेकर पकड़ में आए हैं लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन को ऐसे कई और कॉलेजों पर संदेह है, जिन्होेंने ऐसी धांधली से मान्यता पाई है। इसे लेकर करीब 40 कॉलेज संदेह के घेरे मेें हैं।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि जिन-जिन कॉलेजों ने इस तरह धांधली की है, उन्हें चिन्हित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रजिस्ट्रार के शहर में न रहने से इसे लेकर कमेटी के गठन का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। सोमवार को रजिस्ट्रार के आने के बाद कमेटी गठित कर दी जाएगी और जो चिन्हित कॉलेजों के प्रपत्रों की जांच करेगी। इसके लिए कमेटी एनसीटीई से भी संपर्क साधेगी, जिससे फर्जी प्रपत्रों की स्थिति साफ हो सके। साथ ही इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी चिन्हित किया जा सके। इस मामले में यदि कोई यूनिवर्सिटी का कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीटीई के दोषी कर्मचारी को दंडित करने के लिए संस्था के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी लिखा जाएगा। दोषी कॉलेजों की सम्बद्धता रद्द करने पर भी विचार किया जाएगा।
धांधली का मामला तब सामने आया, जब मान्यता हासिल करने के बाद दो कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी से संबद्धता हासिल करने के लिए निरीक्षण मंडल गठित करने के लिए आवेदन किया। फाइल कुलपति के सामने गई तो उन्हें यह जानकार आश्चर्य हुआ कि जब यूनिवर्सिटी ने शिक्षक अनुमोदन किया ही नहीं तो निरीक्षण मंडल की बात कहां से सामने आ गई? पड़ताल करने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आ गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि जिन-जिन कॉलेजों ने इस तरह धांधली की है, उन्हें चिन्हित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रजिस्ट्रार के शहर में न रहने से इसे लेकर कमेटी के गठन का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। सोमवार को रजिस्ट्रार के आने के बाद कमेटी गठित कर दी जाएगी और जो चिन्हित कॉलेजों के प्रपत्रों की जांच करेगी। इसके लिए कमेटी एनसीटीई से भी संपर्क साधेगी, जिससे फर्जी प्रपत्रों की स्थिति साफ हो सके। साथ ही इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी चिन्हित किया जा सके। इस मामले में यदि कोई यूनिवर्सिटी का कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीटीई के दोषी कर्मचारी को दंडित करने के लिए संस्था के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी लिखा जाएगा। दोषी कॉलेजों की सम्बद्धता रद्द करने पर भी विचार किया जाएगा।
विज्ञापन
धांधली का मामला तब सामने आया, जब मान्यता हासिल करने के बाद दो कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी से संबद्धता हासिल करने के लिए निरीक्षण मंडल गठित करने के लिए आवेदन किया। फाइल कुलपति के सामने गई तो उन्हें यह जानकार आश्चर्य हुआ कि जब यूनिवर्सिटी ने शिक्षक अनुमोदन किया ही नहीं तो निरीक्षण मंडल की बात कहां से सामने आ गई? पड़ताल करने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आ गया।
विज्ञापन