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दिनभर प्लास्टिक इस्तेमाल न करने की नसीहत, दोपहर बाद सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतल में पानी गटकते दिखे पूर्व केंद्रीय मंत्री
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दिनभर प्लास्टिक इस्तेमाल न करने की नसीहत, दोपहर बाद सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतल में पानी गटकते दिखे पूर्व केंद्रीय मंत्री
एहतेशाम उद्दीन अहमद
गोरखपुर। महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में शनिवार की सुबह विद्यार्थियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने की नसीहत देने वाले पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल दोपहर बाद खुद की ही नसीहत भूल गए। एम्स के शैक्षणिक भवन का निरीक्षण करने के बाद बैठक में आए पूर्व मंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करके पानी पीते नजर आए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल व समाज कल्याण मंत्री और जिले के प्रभारी रमापति शास्त्री ने शनिवार को अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में जल संरक्षण की बात कही। साथ ही कहा कि हर परिवार को यह जानना होगा कि प्लास्टिक नष्ट नहीं होता है। इसे रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता है। इसका जीवन स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए पूर्व मंत्री ने शपथ भी दिलाई। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच सीखने वाली बात कहकर पूर्व मंत्री जब एम्स पहुंचे तो सब धरा रह गया। एम्स परिसर में हुई बैठक में उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल किया। बोतल का ढक्कन खोलकर दो बार पानी भी पीया। जनप्रतिनिधि व अफसरों की मौजूदगी वाली बैठक में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और अभियान के बारे में पूछा गया तो अजीब तर्क दिया। जनप्रतिनिधि के साथ अफसरों की तरफ से कहा गया कि इस तरह की बोतलों का इस्तेमाल दो अक्तूबर से बंद होना है। अब सवाल उठता है कि जनप्रतिनिधि व अफसर एक मानक नहीं स्थापित करेंगे तो फिर आम जनता से अनुपालन कैसे कराएंगे?
बहरहाल, सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल लंबे समय से प्रतिबंधित है। अब इसपर अमल की कवायद चल रही है। दरअसल, विश्व पर्यावरण दिवस 2018 की बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन रखी गई थी। इसकी वैश्विक मेजबानी भारत को मिली थी। तभी प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी ने इस्तेमाल पर रोक लगाने की मंशा जाहिर की थी। यूपी के मुख्य सचिव ने किसी भी सरकारी कार्यक्रम और प्रशासनिक बैठकों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूर्णतया प्रतिबंधित किया है। कलेक्ट्रेट की बैठकों में भी तांबे का गिलास रखा जाता है। बावजूद इसके शनिवार को एम्स में सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी पानी की बोतलें रखी गईं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सेवा सप्ताह मनाया जा रहा है। कई विद्यालयों में जाकर शनिवार को विद्यार्थियों को दो अक्तूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की शपथ दिलाई है। दो अक्तूबर से इस तरह की बोतलों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
शिव प्रताप शुक्ला, सांसद, राज्यसभा
खराब प्लास्टिक से बनती है पानी की बोतल
गोरखपुर। पानी की बोतलें सिंगल यूज प्लास्टिक की श्रेणी में आती हैं। इसके इस्तेमाल के दो बड़े नुकसान हैं। ज्यादातर लोग पानी की बोतल का दोबारा प्रयोग करते हैं, जो बेहद खतरनाक है। एमएमएमयूटी में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष व पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय का कहना है कि पानी का बोतल खराब प्लास्टिक से बनती है। हर बोतल पर लिखा होता है कि इस्तेमाल के बाद ही बोतल को नष्ट कर दें। इसे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है। रेलवे स्टेशन सहित तमाम जगहों पर बॉटल क्रसिंग मशीनें भी लगी हैं। गोरखपुर सहित देश के अन्य शहरों के ज्यादातर लोग पानी की बोतल का दोबारा इस्तेमाल करते हैं, जो सेहत के लिहाज से नुकसानदायक है। दोबारा इस्तेमाल में पानी के साथ माइक्रो प्लास्टिक निकलता है। बोतल का प्लास्टिक ऐसा होता है, जिसमें बिसफिनॉल-ए रसायन भी पाया जाता है। सभी नुकसानदायक तत्व पानी के साथ मनुष्य के साथ शरीर में पहुंचते हैं। बिसफिनॉल ए तो ह्दयरोग से लड़ने वाले एंजाइम को कमजोर करता है। इससे कई तरह की बीमारियां भी होती हैं।
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एहतेशाम उद्दीन अहमद
गोरखपुर। महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में शनिवार की सुबह विद्यार्थियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने की नसीहत देने वाले पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल दोपहर बाद खुद की ही नसीहत भूल गए। एम्स के शैक्षणिक भवन का निरीक्षण करने के बाद बैठक में आए पूर्व मंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करके पानी पीते नजर आए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल व समाज कल्याण मंत्री और जिले के प्रभारी रमापति शास्त्री ने शनिवार को अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में जल संरक्षण की बात कही। साथ ही कहा कि हर परिवार को यह जानना होगा कि प्लास्टिक नष्ट नहीं होता है। इसे रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता है। इसका जीवन स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए पूर्व मंत्री ने शपथ भी दिलाई। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच सीखने वाली बात कहकर पूर्व मंत्री जब एम्स पहुंचे तो सब धरा रह गया। एम्स परिसर में हुई बैठक में उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल किया। बोतल का ढक्कन खोलकर दो बार पानी भी पीया। जनप्रतिनिधि व अफसरों की मौजूदगी वाली बैठक में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और अभियान के बारे में पूछा गया तो अजीब तर्क दिया। जनप्रतिनिधि के साथ अफसरों की तरफ से कहा गया कि इस तरह की बोतलों का इस्तेमाल दो अक्तूबर से बंद होना है। अब सवाल उठता है कि जनप्रतिनिधि व अफसर एक मानक नहीं स्थापित करेंगे तो फिर आम जनता से अनुपालन कैसे कराएंगे?
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बहरहाल, सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल लंबे समय से प्रतिबंधित है। अब इसपर अमल की कवायद चल रही है। दरअसल, विश्व पर्यावरण दिवस 2018 की बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन रखी गई थी। इसकी वैश्विक मेजबानी भारत को मिली थी। तभी प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी ने इस्तेमाल पर रोक लगाने की मंशा जाहिर की थी। यूपी के मुख्य सचिव ने किसी भी सरकारी कार्यक्रम और प्रशासनिक बैठकों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूर्णतया प्रतिबंधित किया है। कलेक्ट्रेट की बैठकों में भी तांबे का गिलास रखा जाता है। बावजूद इसके शनिवार को एम्स में सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी पानी की बोतलें रखी गईं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सेवा सप्ताह मनाया जा रहा है। कई विद्यालयों में जाकर शनिवार को विद्यार्थियों को दो अक्तूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की शपथ दिलाई है। दो अक्तूबर से इस तरह की बोतलों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
शिव प्रताप शुक्ला, सांसद, राज्यसभा
खराब प्लास्टिक से बनती है पानी की बोतल
गोरखपुर। पानी की बोतलें सिंगल यूज प्लास्टिक की श्रेणी में आती हैं। इसके इस्तेमाल के दो बड़े नुकसान हैं। ज्यादातर लोग पानी की बोतल का दोबारा प्रयोग करते हैं, जो बेहद खतरनाक है। एमएमएमयूटी में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष व पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय का कहना है कि पानी का बोतल खराब प्लास्टिक से बनती है। हर बोतल पर लिखा होता है कि इस्तेमाल के बाद ही बोतल को नष्ट कर दें। इसे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है। रेलवे स्टेशन सहित तमाम जगहों पर बॉटल क्रसिंग मशीनें भी लगी हैं। गोरखपुर सहित देश के अन्य शहरों के ज्यादातर लोग पानी की बोतल का दोबारा इस्तेमाल करते हैं, जो सेहत के लिहाज से नुकसानदायक है। दोबारा इस्तेमाल में पानी के साथ माइक्रो प्लास्टिक निकलता है। बोतल का प्लास्टिक ऐसा होता है, जिसमें बिसफिनॉल-ए रसायन भी पाया जाता है। सभी नुकसानदायक तत्व पानी के साथ मनुष्य के साथ शरीर में पहुंचते हैं। बिसफिनॉल ए तो ह्दयरोग से लड़ने वाले एंजाइम को कमजोर करता है। इससे कई तरह की बीमारियां भी होती हैं।