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राज नर्सिंग होम पर 3.52 लाख का जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2015 01:39 AM IST
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राज नर्सिंग होम पर 3.52 लाख का जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ट्यूमर के मरीज की बायोप्सी तथा अन्य रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष एससी सिंह, सदस्य राकेश कुमार सिंह एवं संगीता राय ने दुर्गाबाड़ी रोड स्थित राज नर्सिंग होम के खिलाफ आदेश दिया है कि गलत इलाज से दाहिना पैर गंवा चुके मरीज को तीन लाख 52 हजार रुपया क्षतिपूर्ति एक माह के अंदर भुगतान करें। अन्यथा देय धनराशि पर छह प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
फोरम में तिवारीपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर मोहल्ला निवासी वादी फेकू की ओर से कमलेश कुमार एडवोकेट ने कहा था कि वादी के दाहिने पैर में ट्यूमर हो गया था। इसके इलाज के लिए उसने विपक्षी राज नर्सिंग होम से संपर्क किया। यहां के डॉ. विनीत मल्होत्रा ने वादी का जनवरी 2005 में दाहिने पैर का ऑपरेशन किया था। लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ। पैर से मवाद आना शुरू हो गया। शिकायत करने पर दोबारा ऑपरेशन किया गया। इसके बाद स्थिति और खराब हो गई। पीड़ित ने डॉ. आरए अग्रवाल को 12 मार्च 2007 को दिखाया। उन्होंने कहा कि पूर्ण इलाज संभव नहीं है इसलिये दाहिने पैर को ऑपरेशन करके काटना पड़ेगा। अंत में 7 दिसंबर 2009 को वादी का दाहिना पैर काट दिया गया। आरोप लगाया गया कि विपक्षी की लापरवाही से वादी विकलांग हो गया। चार लाख क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए वाद दायर किया गया। फोरम ने नर्सिंग होम को मरीज की बायोप्सी व अन्य अभिलेख न रखने पर उक्त निर्णय पारित करते हुए दोनों डॉक्टरों को दोषमुक्त कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ट्यूमर के मरीज की बायोप्सी तथा अन्य रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष एससी सिंह, सदस्य राकेश कुमार सिंह एवं संगीता राय ने दुर्गाबाड़ी रोड स्थित राज नर्सिंग होम के खिलाफ आदेश दिया है कि गलत इलाज से दाहिना पैर गंवा चुके मरीज को तीन लाख 52 हजार रुपया क्षतिपूर्ति एक माह के अंदर भुगतान करें। अन्यथा देय धनराशि पर छह प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
फोरम में तिवारीपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर मोहल्ला निवासी वादी फेकू की ओर से कमलेश कुमार एडवोकेट ने कहा था कि वादी के दाहिने पैर में ट्यूमर हो गया था। इसके इलाज के लिए उसने विपक्षी राज नर्सिंग होम से संपर्क किया। यहां के डॉ. विनीत मल्होत्रा ने वादी का जनवरी 2005 में दाहिने पैर का ऑपरेशन किया था। लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ। पैर से मवाद आना शुरू हो गया। शिकायत करने पर दोबारा ऑपरेशन किया गया। इसके बाद स्थिति और खराब हो गई। पीड़ित ने डॉ. आरए अग्रवाल को 12 मार्च 2007 को दिखाया। उन्होंने कहा कि पूर्ण इलाज संभव नहीं है इसलिये दाहिने पैर को ऑपरेशन करके काटना पड़ेगा। अंत में 7 दिसंबर 2009 को वादी का दाहिना पैर काट दिया गया। आरोप लगाया गया कि विपक्षी की लापरवाही से वादी विकलांग हो गया। चार लाख क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए वाद दायर किया गया। फोरम ने नर्सिंग होम को मरीज की बायोप्सी व अन्य अभिलेख न रखने पर उक्त निर्णय पारित करते हुए दोनों डॉक्टरों को दोषमुक्त कर दिया।
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