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‘महातीर्थ’ और ‘ऑक्टोपस’ का हुआ मंचन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 07 May 2016 01:30 AM IST
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रैम्पस स्कूल मे चल रहे नाटक कर्यक्रम मे नाटक का मंचन करते कलाकार ।
- फोटो : rajesh kumar
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शहर के रैंपस स्कूल परिसर में दो मई से चल रहे पांच दिवसीय पूर्वांचल नाट्य महोत्सव का शुक्रवार को समारोह पूर्वक समापन हुआ। ‘अभियान’ ग्रुप ऑफ थिएटर और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नाटक ‘महातीर्थ’ और मजदूरों की दुर्दशा पर आधारित नाटक ‘ऑक्टोपस’ का मंचन हुआ।
दोनों ही नाटकों के कलाकारों के जीवंत अभिनय ने महोत्सव के समापन समारोह को यादगार बना दिया। अंतिम दिन नाटकों के निर्देशक और बेहतर अभिनय के लिए कलाकार सम्मानित भी किए गए। यह सम्मान रैंपस स्कूल के प्रबंधक प्रेमचंद श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
अंतिम दिन के मंचन की शुरुआत ‘महातीर्थ’ से हुई। तीर्थ के मायने समझाने वाले इप्टा की ओर से प्रस्तुत इस नाटक में समाज में फैल रहे दिखावे के रोग खूबसूरत प्रस्तुति थी। नाटक में दिखाया गया कि इंद्रमणि नाम के एक व्यक्ति की संतान रुद्र का घर की नौकरानी कैलासी से बेहद लगाव हो जाता है। मालकिन द्वारा घर से निकाले जाने के बाद कैलासी तीर्थ यात्रा को जाने की तैयारी करने लगती है, इस बीच उसे पता चलता है कि रुद्र की तबियत बेहद खराब हो गई है और इसकी वजह उसका घर छोड़ना है तो वह यात्रा रद्द कर रुद्र की सेवा में जुट जाती है।
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अपने इस सुकृत्य से कैलासी यह साबित कर देती है कि सेवा ही महातीर्थ है। कहानी का नाट्य रूपांतरण और निर्देशन करने वाले रंगकर्मी डॉ. मुमताज खान की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। रीना श्रीवास्तव, प्रियंका अग्रहरी, विनोद चंद्रेश, रोशन श्रीवास्तव, धर्मेंद्र दुबे, तनवीर आजाद, एस रफत हुसैन आदि ने बतौर कलाकार वाहवाही बटोरी।
मजदूरों की दुर्दशा पर आधारित नाटक ‘ऑक्टोपस’ के मंचन की शुरुआत मानव के आदिकालीन जीवन से शुरू हुई और यह दिखाया गया कि किस तरह मजदूर तब से लेकर आज तक शोषण का शिकार होते रहे हैं। जागृति सेवा संस्थान की ओर प्रस्तुत और मलय पाल द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन धर्मेंद्र भारती ने किया। मुकेश विद्यार्थी, अमित मौर्य और विक्रांत त्रिपाठी की बेहतरीन अभिनय को देखने के लिए दर्शक देर रात तक टिके रहे।
आयोजन के अंत में कार्यक्रम संयोजक श्रीनारायण पांडेय ने बताया कि नवंबर महीने में संस्था की ओर से शहर में पहली बार अखिल भारतीय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश भर के थिएटर कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा।
सम्मानित होने वाले निर्देशक व कलाकार
निर्देशक : श्रीनारायण पांडेय (चरनदास चोर), डॉ. मुमताज खान (महातीर्थ), आसिफ म्हात्रे (महमूद), मानवेंद्र त्रिपाठी (किस्सा अजनबी लाश का), धर्मेंद्र भारती (ऑक्टोपस)।
कलाकार : राधेश्याम गुप्त (सैंया भए कोतवाल), आकाश यादव (चरणदास चोर), मीरा सिकदर (महमूद), अभिषेक यादव (किस्सा अजनबी लाश का व हवालात), रोशन श्रीवास्तव (महातीर्थ), राधेश्याम गुप्त (सैंया भए कोतवाल),
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दोनों ही नाटकों के कलाकारों के जीवंत अभिनय ने महोत्सव के समापन समारोह को यादगार बना दिया। अंतिम दिन नाटकों के निर्देशक और बेहतर अभिनय के लिए कलाकार सम्मानित भी किए गए। यह सम्मान रैंपस स्कूल के प्रबंधक प्रेमचंद श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
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अंतिम दिन के मंचन की शुरुआत ‘महातीर्थ’ से हुई। तीर्थ के मायने समझाने वाले इप्टा की ओर से प्रस्तुत इस नाटक में समाज में फैल रहे दिखावे के रोग खूबसूरत प्रस्तुति थी। नाटक में दिखाया गया कि इंद्रमणि नाम के एक व्यक्ति की संतान रुद्र का घर की नौकरानी कैलासी से बेहद लगाव हो जाता है। मालकिन द्वारा घर से निकाले जाने के बाद कैलासी तीर्थ यात्रा को जाने की तैयारी करने लगती है, इस बीच उसे पता चलता है कि रुद्र की तबियत बेहद खराब हो गई है और इसकी वजह उसका घर छोड़ना है तो वह यात्रा रद्द कर रुद्र की सेवा में जुट जाती है।
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अपने इस सुकृत्य से कैलासी यह साबित कर देती है कि सेवा ही महातीर्थ है। कहानी का नाट्य रूपांतरण और निर्देशन करने वाले रंगकर्मी डॉ. मुमताज खान की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। रीना श्रीवास्तव, प्रियंका अग्रहरी, विनोद चंद्रेश, रोशन श्रीवास्तव, धर्मेंद्र दुबे, तनवीर आजाद, एस रफत हुसैन आदि ने बतौर कलाकार वाहवाही बटोरी।
मजदूरों की दुर्दशा पर आधारित नाटक ‘ऑक्टोपस’ के मंचन की शुरुआत मानव के आदिकालीन जीवन से शुरू हुई और यह दिखाया गया कि किस तरह मजदूर तब से लेकर आज तक शोषण का शिकार होते रहे हैं। जागृति सेवा संस्थान की ओर प्रस्तुत और मलय पाल द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन धर्मेंद्र भारती ने किया। मुकेश विद्यार्थी, अमित मौर्य और विक्रांत त्रिपाठी की बेहतरीन अभिनय को देखने के लिए दर्शक देर रात तक टिके रहे।
आयोजन के अंत में कार्यक्रम संयोजक श्रीनारायण पांडेय ने बताया कि नवंबर महीने में संस्था की ओर से शहर में पहली बार अखिल भारतीय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश भर के थिएटर कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा।
सम्मानित होने वाले निर्देशक व कलाकार
निर्देशक : श्रीनारायण पांडेय (चरनदास चोर), डॉ. मुमताज खान (महातीर्थ), आसिफ म्हात्रे (महमूद), मानवेंद्र त्रिपाठी (किस्सा अजनबी लाश का), धर्मेंद्र भारती (ऑक्टोपस)।
कलाकार : राधेश्याम गुप्त (सैंया भए कोतवाल), आकाश यादव (चरणदास चोर), मीरा सिकदर (महमूद), अभिषेक यादव (किस्सा अजनबी लाश का व हवालात), रोशन श्रीवास्तव (महातीर्थ), राधेश्याम गुप्त (सैंया भए कोतवाल),