फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   prof. shibban lal saxena famous as lenin of east uttar pradesh

पूर्वांचल के गांधी के रूप में जाने जाते थे प्रोफेसर सक्सेना, बन गए थे पूर्वी उत्तर प्रदेश के 'लेनिन'

Fri, 15 Mar 2019 03:43 PM IST
देव कश्यप रिशु राज सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: देव कश्यप Updated Fri, 15 Mar 2019 03:43 PM IST
विज्ञापन
prof. shibban lal saxena famous as lenin of east uttar pradesh
Prof. shibban lal saxena (File Photo)

शिब्बन लाल सक्सेना भारत के शिक्षाविद, स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनेता थे। वे संविधान सभा के सदस्य तथा सांसद रहे। पेशे से डिग्री कॉलेज के अध्यापक शिब्बन लाल सक्सेना ने 1932 में महात्मा गांधी के आह्वान पर राष्ट्रीय आन्दोलन में हिस्सा लिया था। महराजगंज के किसानों और मजदूरों के सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए कार्य किया। वे 'महराजंगज के मसीहा' के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्हे पूर्वांचल का गांधी और लेनिन कह कर संबोधित किया जाता है। शिब्बनलाल सक्सेना जीवन भर अविवाहित रहे और दलितों, शोषितों के उत्थान के लिए संघर्षरत रहे। अपने 58 वर्ष के राजनीतिक जीवन में वे 17 बार गिरफ्तार किए गए थे। कुल 13 वर्ष तक विभिन्न जेलों में बिताए जिसमें से 10 वर्ष कठिन श्रम के साथ कारावास की सजा थी।

विज्ञापन


राजनीति विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शिब्बनलाल सक्सेना का जन्म 13 जुलाई 1906 में अपने मामा के घर आगरा में हुआ। इनके पिता का नाम छोटेलाल सक्सेना था जो पोस्टमास्टर थे। बरेली में आवला तहसील, बल्लिया नामक गांव के मूल निवासी थे। शिब्बनलाल की प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा कानपुर के शासकीय हाई स्कूल, क्राइस्ट चर्च इण्टर कॉलेज, और डीएवी कॉलेज में हुई।
विज्ञापन


इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिब्बनलाल ने 1927 में अपनी बी. ए. की परीक्षा गणित और दर्शनशास्त्र विषयों के साथ स्वर्ण पदक के साथ उत्तीर्ण की। 1929 में इन्होंने एम. ए. की परीक्षा स्वर्ण पदक प्राप्त करते हुये गणित विषय के साथ उत्तीर्ण की। सन 1930 में शिब्बनलाल गोरखपुर के सेन्ट एण्ड्रूयूज कालेज में गणित के प्रवक्ता के रुप में नियुक्त हुए। उनके राजनैतिक में बहुत उतार चढ़ाव आया। वर्ष 1957 में पहली बार निर्दल सांसद चुने गए। निकटतम प्रतिद्वंदी हरिशंकर को 27 हजार वोटों से हराए। वर्ष 1962 में महादेव प्रसाद से हार गए। 1967 में महंथ दिग्विजय नाथ को 42 हजार वोट से हराए। 1971 में निर्दलीय चुनाव जिते। 1977 में रघुबर प्रसाद का हराकर सांसद बने। 

विज्ञापन
विज्ञापन

स्वराज आंदोलन से काफी प्रभावित थे

शिब्बनलाल शुरू से ही स्वराज आंदोलन से काफी प्रभावित थे जिसकी वजह से वह हमेशा ही लोगों की नजरों में चढ़े रहे। विश्वविद्यालय में एक बार किसी उत्सव में भाग लेने पहुंचे शिब्बनलाल ने शेरवानी पहना था जिसे देखकर प्राचार्य ने उन्हे देशी पहनावा पहनने के लिये टोक दिया। शिब्बनलाल ने उसी समय से अंग्रेजी वेश-भूषा को त्यागने का प्रण किया आजीवन धोती और कुर्ता ही पहनते रहे। शिब्बनलाल पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी पूरा महत्व देते थे और यह मानते थे कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है। वे पहलवानी करते थे और विश्वविद्यालय में फुटबाल टीम के कप्तान थे। 

13 साल की उम्र में विरोध जुलूस का नेतृत्व किए 
वर्ष 1919 में हुए जलियावाला कांड ने जब पूरे भारत को हिला कर रख दिया तब कानपुर में शिब्बनलाल ने भी 13 वर्ष की उम्र में एक विरोध जुलूस का नेतृत्व किया और पकड़े गये। उस समय उन्हे तीन बेतों की सजा मिली उनका विश्वास और भी मजबूत बना दिया और आजादी के लिये लड़ी जा रही लड़ाई में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिये प्रेरित किया। 

एक लाख पच्चीस हजार किसानों को मिला हक 
1937  से लेकर 1940 तक शिब्बनलाल ने विभिन्न किसान आन्दोलनो से अंग्रेज सरकार की नाक में दम कर दिया जिसकी वजह से सरकार को जमीनों का एक बार फिर से सर्वे कराना पड़ा और जमीनों का पुनः आबंटन करना पड़ा। यह वही व्यवस्था थी जिसकी वजह से तत्कालीन महराजगंज के एक लाख पच्चीस हजार किसानों को उनकी जमीनों पर मालिकाना हक प्राप्त हुआ। अखबारों ने शिब्बनलाल को 'पूर्वी उत्तर प्रदेश का लेनिन' कहकर संबोधित किया था। किसानों की जमीनों पर मालिकाना हक की इस व्यवस्था को 'गण्डेविया बंदोबस्त' कहते हैं। 13 मार्च 1965 में उन्होने जवाहर लाल नेहरू पोस्ट ग्रेजुएट कालेज महराजगंज आरम्भ किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed