फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   pregnent lady died due to lack of facility in hospital

बदइंतजामी ने ले ली गर्भवती की जान

Tue, 18 Oct 2016 10:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Tue, 18 Oct 2016 10:21 PM IST
विज्ञापन
pregnent lady died due to lack of facility in hospital
इसी एंबुलेंस में लाई गई थी पीड़िता। - फोटो : Rajesh Kumar
देवरिया जिला अस्पताल में इलाज न मिल पाने की वजह से एक गर्भवती की मौत हो गई। वहां पर डॉक्टरों के न होने की बात कहते हुए स्टाफ ने मरीज को मेडिकल कॉलेज जाने को कहा, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन


देवरिया, शाही नौतन के रहने वाले प्रदीप सिंह की पत्नी नीलम (25) को प्रसव पीड़ा होने पर घरवाले सुबह दस बजे के करीब देवरिया जिला अस्पताल लेकर गए। वहां पर स्टाफ ने कहा कि अभी डॉक्टर नहीं हैं। वे दो बजे आएंगे, इसके पहले ऑपरेशन नहीं हो पाएगा। इसके बाद स्टाफ ने मेडिकल कॉलेज जाने की बात कही। इस पर घरवाले प्राइवेट एंबुलेंस से लेकर मेडिकल कॉलेज के लिए निकले लेकिन रास्ते में नीलम की मौत हो गई। यहां पर डॉक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। पति ने बताया कि देवरिया में काफी देर तक वे स्टाफ से मिन्नतें करते रहे लेकिन कोई मदद नहीं की गई। समय से ऑपरेशन हुआ होता तो शायद उसकी जान बच जाती। 
विज्ञापन

ओपीडी में गर्भवती ने जन्मा बच्चा

जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही ने फिर गर्भवती की जान सांसत में डाल दी। मंगलवार को प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती को समय से इलाज नहीं मिला तो वह ओपीडी में ही तड़पने लगी। दाई की नजर पड़ी तो उसे लेकर ओपीडी के एक कमरे में गई और प्रसव कराया। दीवान बाजार की रहने वाली रूबी देवी मंगलवार की सुबह साढ़े सात बजे के करीब महिला अस्पताल पहुंची थीं। वैसे तो नाइट में ड्यूटी कर रहीं डॉक्टर की शिफ्ट आठ बजे बदली जानी थी, मगर डॉक्टर दाई के भरोसे इमरजेंसी छोड़कर चली गईं थीं। रूबी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। पति हरिकेश भी डॉक्टर को खोज रहे थे मगर कोई नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन


आधे घंटे तड़पने के बाद ओपीडी हाल में ही महिला लेट गई और कुछ तीमारदारों की मदद से दाई ने ओपीडी कक्ष में लेकर टेबल पर लिटाया और वहीं पर प्रसव कराया। इसके बाद इनडोर से डॉ. सविता ने आकर जच्चा-बच्चा की जांच की और वार्ड में भर्ती किया। महिला अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। आए दिन ही इस तरह की घटनाएं वहां पर होती हैं। मगर अस्पताल प्रशासन सिर्फ जांच का आश्वासन देता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed