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प्रेमचंद के साहित्य में देश की जिंदगी: डॉ. सईद

Mon, 05 Dec 2016 08:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 05 Dec 2016 08:57 PM IST
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pramchand literary life in the country
सेंट एंड्रयूज कालेज में प्रेमचंद पर आयोजित सेमिनार में मंचासीन मुख्य अतिथि कलीमुल्लाह खाँ, डा.साकिब हासनी (नेपाल), डा सईद गुल रौशन(कुवैद), डा.अफरोज आलम, डा.अजीज अहमद व अन्य। - फोटो : ‌‌shivharsh
इलाहाबाद के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कलीमुल्लाह खां ने मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं को ‘वर्ल्ड लिटरेचर’ बताते हुए कहा कि मुंशी जी ने आम आदमी के दुख दर्द और उनकी समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। स्वराज्य की अवधारणा को पेश करके जेहनों को आजाद करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि मुल्क में एकता व अखंडता को कायम रखना हिंदुस्तान की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने सेंट एंड्रयूज कॉलेज के असेंबेली हॉल में गोरखपुर जॉब इंफ ार्मेशन एंड ट्रेनिंग सेंटर व उर्दू विभाग सेंट एंड्रयूज कॉलेज के तत्वावधान में आयोजित मुंशी प्रेमचंद शताब्दी स्मरण के तहत आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में अध्यक्षीय उद्बोधन के दौरान कहीं।
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उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं को किसी एक जबान या वर्ग में बांटना सही नहीं है। वह जहां हिंदी के बड़े साहित्यकार थे वहीं उर्दू में भी उनका कोई जोड़ नहीं था। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केसी लाल ने कहा कि मुंशी जी राष्ट्रीयता के सच्चे हामी थे। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि उन्होंने अपनी रचनाओं में हिंदुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब को जोरदार तरीके से उठाया है। कुवैत के डॉ. अफ रोज आलम ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने अफ सानों में देहात की जो तस्वीर पेश की है, वह आज भी बरकरार है। उनका कहना था कि प्रेमचंद के अफ साने उस वक्त तक जिंदा रहेंगे जब तक देहातों के मसायल हल नहीं हो जाते। नेपाल के खदीजतुल कुब्रा गर्ल्स स्कूल के डायरेक्टर मौलना जाहिद आजाद ने कहा कि प्रेमचंद की व्यक्तित्व उर्दू दुनिया के लिए भुलाया नहीं जा सकता।
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कुवैत के डॉ. सईद रौशन ने प्रेमचंद के 15 नॉवेलों के शोध की रोशनी में बताया कि इंसानियत को बेदार करना और उच्च विचार को पैदा करना उनका मकसद था। प्रेमचंद के साहित्य में सारे हिंदुस्तान की जिंदगी नजर आती है। नेपाल उर्दू अकादमी के चेयरमैन डॉ. साकिब हारुनी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद व फि राक गोरखपुरी ने गोरखपुर की तारीख में चार चांद लगाया। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के प्रो. अनिल राय, वरिष्ठ चिकित्सक व प्रोग्राम के संयोजक डॉ. अजीज अहमद ने भी सेमिनार को संबोधित किया। संचालन  डॉ. कलीम कैसर ने किया। इस दौरान अशफ ाक अहमद की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. साजिद हुसैन ने किया। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. जेके लाल, शहर काजी मुफ्ती वलीउल्लाह, डॉ. शमसाद, डॉ. सुशील राय, आसिम रउफ , अशोक चौधरी आदि मौजूद थे।
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