{"_id":"57485c6a4f1c1b6072691438","slug":"postman-will-help-you-to-search-the-way-in-unknown-city","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंजान शहर में आपका हमराह बनेगा डाकिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंजान शहर में आपका हमराह बनेगा डाकिया
अनुपम सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 30 May 2016 01:17 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब अंजान शहर में डाकिए न सिर्फ डाक महकमे से जुड़े कार्यों में मदद करेंगे बल्कि शहर में आपको रास्ता भी बताएंगे। इसके लिए डाक विभाग डाकियों का मोबाइल नंबर वेबसाइट पर अपलोड करेगा। फोन आते ही जिस इलाके में आप खड़े हैं, वहां का डाकियाआपके पास हाजिर होगा। यह सब विभाग अपनी आय बढ़ाने के लिए कर रहा है।
विभागीय कामकाज को अंजाम देने के लिए देश में करीब एक लाख 55 हजार डाक घर चल रहे हैं। जहां पर लाखों की तादाद में डाकिये काम कर रहे हैं, जो चिट्ठी-पत्री और मनीआर्डर को पहुंचाने का काम अपने-अपने इलाकों में कर रहे हैं। इन डाकियों का अधिक से अधिक सदुपयोग किया जा सके, इसके लिए विभाग ने योजना बनाई है, जिस तरह से डाकिये लोगों के घरों तक दस्तक दे रहे हैं। अब वह लोगों के हमराह भी बनेंगे।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तमाम लोग दूसरे शहर में जाते हैं और वह जिस शहर में पहुंचते हैं। वहां के रास्ते से भी अंजान होेते हैं। उन्हें अगर रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट आदि करना होता है तो डाकघर कहां है? इसकी जानकारी नहीं होती है। इसलिए उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
विज्ञापन
लिहाजा विभाग के केंद्रीय मुख्यालय ने डिवीजन, जिला, तहसील, पोस्ट ऑफिस, डाकियों के बीट नंबर, मोबाइल नंबर आदि की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, जिसे विभाग की वेबसाइट पर लोड कर दिया जाएगा। तत्पश्चात अंजान शहर में पहुंचे लोग जहां पर खड़े होंगे। वहां से वेबसाइट में देखकर उस क्षेत्र के पोस्टमास्टर व डाकिये के मोबाइल नंबर पर फोन करेंगे और थोड़ी देर में डाकिया पहुंच जाएगा। वह विभागीय कामकाज करने के साथ ही डाकिया रास्ते की जानकारी भी देगा।
पिनकोड की तर्ज कर सकेंगे सर्च
गोरखपुर। अभी आप क्षेत्र का नाम डाल करके जिस तरह से गूगल में पिनकोड सर्च कर लेते हैं, उसी तरह से डाटा फीड होने के बाद उस क्षेत्र के डाकिये का नाम व मोबाइल नंबर सर्च कर सकेंगे।
अधिकांश लोग एंड्रॉयड मोबाइल का उपयोग करते हैं। इसलिए वह आसानी से डाकिये का नंबर, पता आदि गूगल में ढूंढ सकेंगे। देश के साथ ही गोरखपुर मंडल के 78 डाकघरों यह सुविधा शुरू होगी।
- डीबी त्रिपाठी, एसएसपी, डाक विभाग गोरखपुर
विज्ञापन
विभागीय कामकाज को अंजाम देने के लिए देश में करीब एक लाख 55 हजार डाक घर चल रहे हैं। जहां पर लाखों की तादाद में डाकिये काम कर रहे हैं, जो चिट्ठी-पत्री और मनीआर्डर को पहुंचाने का काम अपने-अपने इलाकों में कर रहे हैं। इन डाकियों का अधिक से अधिक सदुपयोग किया जा सके, इसके लिए विभाग ने योजना बनाई है, जिस तरह से डाकिये लोगों के घरों तक दस्तक दे रहे हैं। अब वह लोगों के हमराह भी बनेंगे।
विज्ञापन
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तमाम लोग दूसरे शहर में जाते हैं और वह जिस शहर में पहुंचते हैं। वहां के रास्ते से भी अंजान होेते हैं। उन्हें अगर रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट आदि करना होता है तो डाकघर कहां है? इसकी जानकारी नहीं होती है। इसलिए उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
विज्ञापन
लिहाजा विभाग के केंद्रीय मुख्यालय ने डिवीजन, जिला, तहसील, पोस्ट ऑफिस, डाकियों के बीट नंबर, मोबाइल नंबर आदि की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, जिसे विभाग की वेबसाइट पर लोड कर दिया जाएगा। तत्पश्चात अंजान शहर में पहुंचे लोग जहां पर खड़े होंगे। वहां से वेबसाइट में देखकर उस क्षेत्र के पोस्टमास्टर व डाकिये के मोबाइल नंबर पर फोन करेंगे और थोड़ी देर में डाकिया पहुंच जाएगा। वह विभागीय कामकाज करने के साथ ही डाकिया रास्ते की जानकारी भी देगा।
पिनकोड की तर्ज कर सकेंगे सर्च
गोरखपुर। अभी आप क्षेत्र का नाम डाल करके जिस तरह से गूगल में पिनकोड सर्च कर लेते हैं, उसी तरह से डाटा फीड होने के बाद उस क्षेत्र के डाकिये का नाम व मोबाइल नंबर सर्च कर सकेंगे।
अधिकांश लोग एंड्रॉयड मोबाइल का उपयोग करते हैं। इसलिए वह आसानी से डाकिये का नंबर, पता आदि गूगल में ढूंढ सकेंगे। देश के साथ ही गोरखपुर मंडल के 78 डाकघरों यह सुविधा शुरू होगी।
- डीबी त्रिपाठी, एसएसपी, डाक विभाग गोरखपुर