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मानबेला की तरह नहीं दिखी मोदी में आक्रमकता

Sat, 23 Jul 2016 01:41 AM IST
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sat, 23 Jul 2016 01:41 AM IST
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PM comment on opposition party with silently
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का माला पहनाकर स्वागत करते भाजपाई - फोटो : Shivharsh Dwivedi
तकरीबन दो साल का फासला पर श्रोता और वक्ता एक ही। फर्क था तो प्रधानमंत्री के बोलने की शैली में। मानबेला की तरह मोदी आक्रामक नहीं दिखे। बड़े ही सलीके से विपक्षी दलों पर सियासी वार किया और पूरे भाषण के दौरान विकास को ही तरजीह दी।
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प्रधानमंत्री पूरी तरह चुनावी रौ में दिखे। उन्होंने जहां अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को बताकर जनता से सीधे जुड़ने को कोशिश की वहीं गैर भाजपा सरकार में यूरिया की कालाबाजारी और किसानों पर बरसीं लाठियों का जिक्र और खाद कारखाना खुलने की अहमियत बताकर लोगों की दुखती रग पर हाथ भी रखा। यही नहीं, प्रधानमंत्री ने ‘दिल्ली के लोगों को ही एम्स की सुविधा क्यों’ का मुद्दा उछालकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की। बड़े ही चालाकी से हर मुद्दों को विकास के पैमाने पर तराश कर जनता को संदेश भी दे दिया कि अगले विधानसभा चुनाव का मुद्दा विकास ही होगा। परिवारवाद और जातिवाद पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कांग्रेस और सपा सरकार पर परोक्ष रूप से निशाना भी साधा।
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दूसरी हरित क्रांति की शुरुआत पूर्वी उत्तर प्रदेश से होने और पूर्वांचल को टूरिज्म का बड़ा सेंटर बनाने का सपना दिखाकर जनता को उन्होंने सीधा संदेश दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में अगर कमल खिलता है तो ये सपने जरूर साकार होंगे। प्रधानमंत्री का यह कहना कि लोकसभा चुनाव की जीत का कर्ज यूपी में चुका रहा हूं और अभी पूर्वी उत्तर प्रदेश में विकास को लेकर केंद्र सरकार की कई योजनाएं हैं, भी यही दर्शाता है।
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प्रधानमंत्री ने एम्स और खाद कारखाना का श्रेय महंत आदित्यनाथ के साथ ही जनता जनार्दन को देकर न सिर्फ लोगों से जुड़ने की कोशिश की बल्कि विधानसभा चुनाव में भी कमल खिलाने के लिए पहले की ही तरह जनादेश मांगा। हालांकि दलित मुद्दे और बसपा सुप्रीमो पर भाजपा नेता द्वारा अभद्र टिप्पणी से आए सियासी भूचाल पर प्रधानमंत्री खामोश ही रहे।

पीएम की रैली में बेकाबू हुई भीड़

प्रधानमंत्री की रैली में कुछ देर के लिए भीड़ बेकाबू हो गई। डी के घेरे के पास मीडिया के लिए बने सर्किल में जाने के लिए भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। उन्हें रोकने में पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं को काफी मशक्कत करनी पड़ी। हुआ यूं कि मीडिया गैलरी में काफी जगह बची थी। मंच से एक नेता ने भीड़ से कहा कि आप लोग आगे आ जाइए। बस क्या था, भीड़ आक्रामक हो गई। इस दौरान कुछ के पैर में चोटें भी आईं। पुलिस वालों ने भीड़ को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन लोग मानने को तैयार ही नहीं थे। कुछ ही देर में मीडिया गैलरी भर गई और भीड़ के दबाव से बैरिकेेडिंग चरमरा गई। इसी बीच आरएएफ के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया। वहां से भीड़ को वापस भेजा जाने लगा तो स्थिति असहज हो गई। भीड़ को आगेे बुलाने वाले नेता को कुछ कार्यकर्ता और पुलिस वाले कोसते भी नजर आए।
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