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Gorakhpur News: सहारा एस्टेट में चार दिन से बंद कमरे में मिली इंजीनियर की लाश
Sat, 12 Sep 2026 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 12 Sep 2026 02:42 AM IST
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खोराबार। सहारा स्टेट के मल्हार में चार दिन से बंद कमरे से शुक्रवार सुबह दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सिक्टौर चौकी पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तो प्रथम तल के कमरे में 45 वर्षीय इंजीनियर अभिषेक त्रिपाठी का शव सोफे पर पड़ा मिला। वह कमरे में अकेले रहते थे। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ फॉरेंसिक टीम से कमरे की जांच कराई। पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित किया है।
अभिषेक मूलरूप से कुशीनगर के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के महासोन गांव के रहने वाले थे। वह आईआईटी से पढ़े थे और दिल्ली की एक निजी कंपनी में इंजीनियर थे। करीब चार साल पहले उनकी नौकरी छूट गई थी। इसके बाद से वह मानसिक परेशानी से जूझ रहे थे। परिजनों के मुताबिक, करीब चार साल पहले उन्हें लखनऊ में इलाज के लिए भी भर्ती कराया गया था। बाद में भी उनका इलाज चलता रहा। उनकी शादी नहीं हुई थी और सहारा स्टेट के निजी कमरा नंबर 2/202 में अकेले रहते थे।
परिजनों के अनुसार, अभिषेक की मानसिक स्थिति अक्सर ठीक नहीं रहती थी और वह कई बार लोगों से अभद्र भाषा में बात करते थे। इस वजह से रिश्तेदार भी उनसे दूरी बनाए रखते थे। आसपास रहने वाले लोगों से उनकी नियमित बातचीत होती थी। पिछले करीब चार दिनों से कमरे का दरवाजा बंद था। शुक्रवार सुबह कमरे के बाहर तेज दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सिक्टौर चौकी प्रभारी जितेंद्र निर्मल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर अभिषेक मृत मिले। पुलिस ने कमरे की स्थिति की जांच करने के साथ आसपास के लोगों से भी जानकारी ली। फॉरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं।
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एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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छोटा भाई उठाता था इंजीनियर का खर्च
बहन अर्चना ने बताया कि , अभिषेक के पिता सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और करीब 10 वर्ष पहले उनका निधन हो गया था। मां की भी करीब तीन साल पहले मौत हो चुकी है। उनकी बहन अर्चना त्रिपाठी पत्नी विनोद त्रिपाठी पैडलेगंज में रहती हैं और घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचीं। छोटा भाई अंब्रिश अमेरिका में रहता है। परिजनों के मुताबिक, छोटा भाई ही अभिषेक के खर्च का इंतजाम करता था और परिवार के लोग समय-समय पर उनसे मिलने भी आते थे।
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अभिषेक मूलरूप से कुशीनगर के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के महासोन गांव के रहने वाले थे। वह आईआईटी से पढ़े थे और दिल्ली की एक निजी कंपनी में इंजीनियर थे। करीब चार साल पहले उनकी नौकरी छूट गई थी। इसके बाद से वह मानसिक परेशानी से जूझ रहे थे। परिजनों के मुताबिक, करीब चार साल पहले उन्हें लखनऊ में इलाज के लिए भी भर्ती कराया गया था। बाद में भी उनका इलाज चलता रहा। उनकी शादी नहीं हुई थी और सहारा स्टेट के निजी कमरा नंबर 2/202 में अकेले रहते थे।
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परिजनों के अनुसार, अभिषेक की मानसिक स्थिति अक्सर ठीक नहीं रहती थी और वह कई बार लोगों से अभद्र भाषा में बात करते थे। इस वजह से रिश्तेदार भी उनसे दूरी बनाए रखते थे। आसपास रहने वाले लोगों से उनकी नियमित बातचीत होती थी। पिछले करीब चार दिनों से कमरे का दरवाजा बंद था। शुक्रवार सुबह कमरे के बाहर तेज दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सिक्टौर चौकी प्रभारी जितेंद्र निर्मल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर अभिषेक मृत मिले। पुलिस ने कमरे की स्थिति की जांच करने के साथ आसपास के लोगों से भी जानकारी ली। फॉरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं।
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एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छोटा भाई उठाता था इंजीनियर का खर्च
बहन अर्चना ने बताया कि , अभिषेक के पिता सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और करीब 10 वर्ष पहले उनका निधन हो गया था। मां की भी करीब तीन साल पहले मौत हो चुकी है। उनकी बहन अर्चना त्रिपाठी पत्नी विनोद त्रिपाठी पैडलेगंज में रहती हैं और घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचीं। छोटा भाई अंब्रिश अमेरिका में रहता है। परिजनों के मुताबिक, छोटा भाई ही अभिषेक के खर्च का इंतजाम करता था और परिवार के लोग समय-समय पर उनसे मिलने भी आते थे।