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मंच पर जीवंत होने को तैयार ‘योगी युग’

Thu, 07 Dec 2017 01:12 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Thu, 07 Dec 2017 01:12 AM IST
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play on Life of CM Yogi aaditynath
सैयद अहमद रिजवी और नाटक योगी युग का कवर पृष्ठ। - फोटो : Amar Ujala
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के योगी से सांसद और फिर मुख्यमंत्री बनने की कहानी अब मंच पर उतरेगी। जनसामान्य से जुड़े किरदार नाटक ‘योगी युग’ से यह कहानी बयां करेंगे। योगी के हाथों में सूबे की कमान आने से लोगों में जगी उम्मीद के साथ इस नाटक का कथानक उनके जनकल्याणकारी व्यक्तित्व का भी दर्शन कराएगा। लेखक की आत्मानुभूति से कागज पर उतरकर ‘योगी युग’ मंच पर जीवंत होने की तैयारी में है। वरिष्ठ रंगकर्मी सुल्तान अहमद रिजवी की कलम से निकला यह नाटक फरवरी तक छपकर बाजार में उतरेगा। 
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तीन तलाक का इंसाफ
नाटक की शुरुआत बरकत और उनकी पत्नी नजमा के बीच चल रहे संवाद से होती है। बेटे असलम के शराबी होने से चिंतित बरकत को तब हृदयाघात हो जाता है, जब बहू के साथ तीन तलाक की बात सामने आती है। गुरु गोरक्षनाथ सेवार्थ अस्पताल में उनकी जान बच जाती है। सस्ता इलाज पाकर बरकत और नजमा योगी को दिल से दुआ देते हैं। यहां योगी बुजुर्ग दंपति और उसके बहू को इंसाफ दिलाते हैं।
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कर्ज में डूबे किसानों की गुहार
परता पार्टी का नेता कर्ज में डूबे किसानों को बैंक का डर दिखाकर वसूली की फिराक में होता है। किसानों की टोली को सांसद योगी आदित्यनाथ में उम्मीद की लौ दिखती है। मंदिर में योगी के लोग उनकी फरियाद सुनकर आश्वासन देते हैं। फिर मंदिर में भूजा खाते मुस्लिम बुजुर्ग योगी के सीएम होने की दुआ करते हैं। तभी पटाखों के शोर में योगी के सीएम बनने की जानकारी मिलती है। कर्ज माफी से इन किसानों की खुशी देखते ही बनती है।
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बिना भेदभाव जनता का कल्याण
कथानक के विभिन्न दृश्यों के जरिये कभी योगी मनमाने दामों पर अंकुश लगाकर जनता को महंगाई से राहत देते हैं तो किसी में ‘योगी युग’ भ्रष्टाचारियों को डराता नजर आता है। किसी दृश्य में ‘योगी युग’ लोगों को सुरक्षा का अहसास देता है तो वहीं दृश्यांतर में विवाह के लिए मेहर न होने के चलते लटके दो मुस्लिम युवकों के पक्ष में योगी सरकार की ओर से आया अनुदान का फैसला उनकी खुशी का सबब बन सामने आता है।


लिख चुके हैं अब तक 80 नाटक
मूलत: हल्लौर (सिद्धार्थनगर) के सुल्तान अहमद रिजवी अब तक 80 नाटक लिख चुके हैं। उन्होंने 1300 गीत, 70 भजन, पांच फिल्मों की पटकथा, 25 रेडियो नाटक, दूरदर्शन पर प्रसारित सीरियल ‘घमछहियां’ का भी लेखन किया है। प्रेमचंद की 16 कहानियों का उन्होंने रेडियो रूपांतरण किया और प्रेमचंद की कहानी ‘ठाकुर का कुआं’ में 17 अन्य किरदार शामिल करके इसे पूर्ण कालिक नाटक बना चुके हैं।
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