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सुनिधि के गीतों पर थिरका शहर
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Feb 2016 02:18 AM IST
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गोरखपुर महोत्सव के आगाज से ही शुरू हुआ बॉलीवुड नाइट का इंतजार सोमवार की शाम खत्म हो गया। मंच पर फिल्म जगत की नामचीन गायक सुनिधि चौहान और जावेद अली थे तो सामने उनका इस्तकबाल करने के लिए हजारों की भीड़। हालांकि सर्द रात शिमला के मौसम का अहसास करा रही थी लेकिन लोगों का जोश उसमें गरमाहट भरने के लिए बेताब था। सुनिधि के गीतों ने लोगों को थिरक कर साथ देने को मजबूर कर दिया तो जावेद के सूफी गीतों पर हर किसी ने इबादत की। दोनों अपने मशहूर फिल्मी गीतों से देर रात तक श्रोताओं को लुभाते रहे।
कार्यक्रम शाम सात बजे से शुरू होना था लेकिन पांच बजे ही यूनिवर्सिटी की ओर बढ़ते हजारों कदम महोत्सव के सबसे खास दिन होने की तस्दीक कर रहे थे। सात बजे तक परिसर में तिल रखने तक जगह नहीं रही। साढ़े सात बजे संचालक साक्षी ने जब मंच से ‘हैलो गोरखपुर’ कहकर लोगों को नमस्कार किया तो सबकी नजरें मंच पर गड़ गईं। प्रिंस डांस ट्रुप के कलाकारों के बांसुरी की धुन पर भगवान विष्णु के दशावतार की पेशगी से सुरमयी शाम की शुरुआत हुई। सुर छेड़ने की जिम्मेदारी संचालक ने सबसे पहले मुंबई से आई कलाकार मनीषा को सौंपी, जिसने जावेद के मंच पर आने की पृष्ठभूमि तैयार की।
‘जोधा अकबर’ फिल्म के मशहूर गीत ‘कहने को जश्ने को बहारा है...’ से जब जावेद ने मंच पर दस्तक दी तो भीड़ बेकाबू हो गई। जावेद ने भी लोगों की इच्छा का पूरा सम्मान किया। गजनी, रॉकस्टार, बजरंगी भाईजान, इश्कजादे, तुम मिले जैसे फिल्म के गीतों पर जब उन्होंने सुर छेड़े तो मैदान में पसरी गलन ने किनारा कस लिया। फायाकुन फायाकुन... और मौला मेरे मौला... जैसे गीतों से परिसर का माहौल सूफियाना हो गया। जब नगाड़ा-नगाड़ा बजा.. तो श्रोता भी सुर में सुर मिलाने लगे। इंडियन आइडल के गायक राकेश मैनी के कुछ गीतों के बाद लोगों का इंतजार पूरा हुआ और सुनिधि ने मंच संभाल लिया।
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उन्हें मंच पर देख मैनी गीतों के दौरान बिखरी भीड़ एक बार फिर मंच की ओर मुखातिब हो गई। ‘धूम मचा ले धूम...’ के मशहूर गीत से सुनिधि की एंट्री का उत्साह हर चेहरे पर साफ झलक रहा था। डांस पर चांस, सजना जी वारी-वारी..., लाइफ की नाटी कहानी..., मन सात समंदर... जैसे दर्जन से अधिक गीतों को सुनिधि पेश करती गईं और श्रोता के उनके साथ ताल से ताल मिलाते गए। देर रात तक यह सिलसिला चलता रहा।
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कार्यक्रम शाम सात बजे से शुरू होना था लेकिन पांच बजे ही यूनिवर्सिटी की ओर बढ़ते हजारों कदम महोत्सव के सबसे खास दिन होने की तस्दीक कर रहे थे। सात बजे तक परिसर में तिल रखने तक जगह नहीं रही। साढ़े सात बजे संचालक साक्षी ने जब मंच से ‘हैलो गोरखपुर’ कहकर लोगों को नमस्कार किया तो सबकी नजरें मंच पर गड़ गईं। प्रिंस डांस ट्रुप के कलाकारों के बांसुरी की धुन पर भगवान विष्णु के दशावतार की पेशगी से सुरमयी शाम की शुरुआत हुई। सुर छेड़ने की जिम्मेदारी संचालक ने सबसे पहले मुंबई से आई कलाकार मनीषा को सौंपी, जिसने जावेद के मंच पर आने की पृष्ठभूमि तैयार की।
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‘जोधा अकबर’ फिल्म के मशहूर गीत ‘कहने को जश्ने को बहारा है...’ से जब जावेद ने मंच पर दस्तक दी तो भीड़ बेकाबू हो गई। जावेद ने भी लोगों की इच्छा का पूरा सम्मान किया। गजनी, रॉकस्टार, बजरंगी भाईजान, इश्कजादे, तुम मिले जैसे फिल्म के गीतों पर जब उन्होंने सुर छेड़े तो मैदान में पसरी गलन ने किनारा कस लिया। फायाकुन फायाकुन... और मौला मेरे मौला... जैसे गीतों से परिसर का माहौल सूफियाना हो गया। जब नगाड़ा-नगाड़ा बजा.. तो श्रोता भी सुर में सुर मिलाने लगे। इंडियन आइडल के गायक राकेश मैनी के कुछ गीतों के बाद लोगों का इंतजार पूरा हुआ और सुनिधि ने मंच संभाल लिया।
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उन्हें मंच पर देख मैनी गीतों के दौरान बिखरी भीड़ एक बार फिर मंच की ओर मुखातिब हो गई। ‘धूम मचा ले धूम...’ के मशहूर गीत से सुनिधि की एंट्री का उत्साह हर चेहरे पर साफ झलक रहा था। डांस पर चांस, सजना जी वारी-वारी..., लाइफ की नाटी कहानी..., मन सात समंदर... जैसे दर्जन से अधिक गीतों को सुनिधि पेश करती गईं और श्रोता के उनके साथ ताल से ताल मिलाते गए। देर रात तक यह सिलसिला चलता रहा।