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धूमधाम से मना गुह्यराज निषाद का जन्मोत्सव
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 11 Apr 2016 08:44 PM IST
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चेतना तिराहा के पास राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद की ओर से निकाली गई शोभायात्रा
- फोटो : shivharsh
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राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद ने चंपा देवी पार्क में महाराजा गुह्यराज निषाद का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। शहर के प्रमुख चौराहों से काली मंदिर, गोलघर होते हुए चंपा देवी पार्क में झांकी, म्यूजिक की धुन पर नाचते गाते निषाद समुदाय के लोग चंपा देवी पार्क में एकत्र हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने महाराजा गुह्यराज निषाद के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि रामायण काल के चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को महाराजा गुह्यराज निषाद का जन्म हुआ था।
डॉ. संजय ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक दल के कुछ सामंतवादी विचारधारा के लोग निषाद समाज का वोट दलालों एवं छोटे-छोटे संगठनों के माध्यम से खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब महाराजा गुह्यराज निषाद का शासन था तो देश महान था।
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समारोह के विशिष्ट अतिथि पिपराइच विधायक प्रतिनिधि अमरेंद्र निषाद ने कहा कि निषाद समाज कि सभी उपजातियां सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई है। इस अवसर पर कमलेश निषाद, रामस्नेही निषाद, डॉ. निदेश निषाद, चंचला निषाद, गुंजा निषाद, रामभोग निषाद, रामरतन निषाद, कन्हैया निषाद, मोती निषाद, जगदीश, रामरुप, वीरेंद्र, दुर्गेश, रामेरखा आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने महाराजा गुह्यराज निषाद के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि रामायण काल के चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को महाराजा गुह्यराज निषाद का जन्म हुआ था।
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डॉ. संजय ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक दल के कुछ सामंतवादी विचारधारा के लोग निषाद समाज का वोट दलालों एवं छोटे-छोटे संगठनों के माध्यम से खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब महाराजा गुह्यराज निषाद का शासन था तो देश महान था।
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समारोह के विशिष्ट अतिथि पिपराइच विधायक प्रतिनिधि अमरेंद्र निषाद ने कहा कि निषाद समाज कि सभी उपजातियां सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई है। इस अवसर पर कमलेश निषाद, रामस्नेही निषाद, डॉ. निदेश निषाद, चंचला निषाद, गुंजा निषाद, रामभोग निषाद, रामरतन निषाद, कन्हैया निषाद, मोती निषाद, जगदीश, रामरुप, वीरेंद्र, दुर्गेश, रामेरखा आदि मौजूद रहे।