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गोरखपुर: सीमा विस्तार के बाद नगर निगम के वार्डों की संख्या 70 से बढ़कर 90 हो सकती
Tue, 10 Dec 2019 12:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 12:41 PM IST
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nagar nigam gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश कैबिनेट की ओर से नगर निगम गोरखपुर के सीमा विस्तार को स्वीकृति देने के साथ ही 31 गांवों में विकास की नई राह खुल गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद ये गांव नगर निगम का हिस्सा बन जाएंगे। फिर सरकार की विभिन्न योजनाओं से इन इलाकों की सुविधाएं मिल सकेंगी। सीमा विस्तार के बाद नगर निगम के वार्डों की संख्या 70 से बढ़कर 90 हो सकती है।
ये गांव होंगे नगर निगम में शामिल
सिक्टौर तप्पा हवेली, रानीडीहा, खोराबार उर्फ सूबा बाजार, जंगल सिकरी उर्फ खोराबार, भरवलिया बुजुर्ग, कजाकपुर, बड़गो, मनहट, गायघाट बुजुर्ग, पथरा, बाघरानी, गायघाट खुर्द, सेमरा देवी प्रसाद, गुलरिहा, मुंडिला उर्फ मुंडेरा, मिर्जापुर तप्पा खुटहन, करमहा उर्फ कम्हरिया, जंगल तिकोनिया नंबर-1, जंगल बहादुर अली, नुरुद्दीन चक, चकरा दोयम, रामपुर तप्पा हवेली, सेंदुली बिंदुली, कठवतिया उर्फ कठउर, पिपरा तप्पा हवेली, झरवा, हरसेवकपुर नंबर दो, लक्ष्मीपुर तप्पा कस्बा, उमरपुर तप्पा खुटहन, जंगल हकीम नंबर-2।
करीब 65 वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा नगर निगम का दायरा
विस्तार के बाद नगर निगम का दायरा भी तकरीबन 65 वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा। अभी नगर निगम का दायरा 147 वर्ग किमी में है, विस्तार के बाद यह 210 वर्ग किमी हो जाएगा। मतदाताओं की संख्या भी बढ़ जाएगी। अभी नगर निगम के मतदाताओं की संख्या करीब नौ लाख है, यह संख्या बढ़कर 15 लाख हो जाएगी। नए विस्तार में दो से तीन गांव या मोहल्ले मिलकर एक वार्ड बनाया जाएगा। ऐसे में वार्डों की संख्या बढ़कर 90 हो जाने की उम्मीद है। अभी शहर में 70 निर्वाचित और 10 मनोनीत पार्षद हैं। विस्तार के बाद 90 निर्वाचित और मनोनीत पार्षदों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी।
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ये गांव होंगे नगर निगम में शामिल
सिक्टौर तप्पा हवेली, रानीडीहा, खोराबार उर्फ सूबा बाजार, जंगल सिकरी उर्फ खोराबार, भरवलिया बुजुर्ग, कजाकपुर, बड़गो, मनहट, गायघाट बुजुर्ग, पथरा, बाघरानी, गायघाट खुर्द, सेमरा देवी प्रसाद, गुलरिहा, मुंडिला उर्फ मुंडेरा, मिर्जापुर तप्पा खुटहन, करमहा उर्फ कम्हरिया, जंगल तिकोनिया नंबर-1, जंगल बहादुर अली, नुरुद्दीन चक, चकरा दोयम, रामपुर तप्पा हवेली, सेंदुली बिंदुली, कठवतिया उर्फ कठउर, पिपरा तप्पा हवेली, झरवा, हरसेवकपुर नंबर दो, लक्ष्मीपुर तप्पा कस्बा, उमरपुर तप्पा खुटहन, जंगल हकीम नंबर-2।
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करीब 65 वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा नगर निगम का दायरा
विस्तार के बाद नगर निगम का दायरा भी तकरीबन 65 वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा। अभी नगर निगम का दायरा 147 वर्ग किमी में है, विस्तार के बाद यह 210 वर्ग किमी हो जाएगा। मतदाताओं की संख्या भी बढ़ जाएगी। अभी नगर निगम के मतदाताओं की संख्या करीब नौ लाख है, यह संख्या बढ़कर 15 लाख हो जाएगी। नए विस्तार में दो से तीन गांव या मोहल्ले मिलकर एक वार्ड बनाया जाएगा। ऐसे में वार्डों की संख्या बढ़कर 90 हो जाने की उम्मीद है। अभी शहर में 70 निर्वाचित और 10 मनोनीत पार्षद हैं। विस्तार के बाद 90 निर्वाचित और मनोनीत पार्षदों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी।
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2000 में हुआ था नगर निगम का विस्तार
वर्ष 2000 में नगर निगम का अंतिम बार विस्तार हुआ था। इसके पहले नगर निगम में कुल 60 वार्ड थे। उस समय सिंघडिय़ा, झरना टोला, जेल बाईपास शाहपुर, खजांची चौराहा, राप्तीनगर 10 नंबर बोरिंग, रसूलपुर, नेताजी सुभाष चंद बोस नगर, नदी के किनारे के बांध, महेवा, आजाद चौक, पैड़लेगंज के बीच का क्षेत्र नगर निगम में था। विस्तार के बाद चारों तरफ एक-एक किलोमीटर का दायरा बढ़ गया था।
दोगुनी हो जाएगी शहर की आबादी
2011 की जनगणना के अनुसार गोरखपुर शहर की आबादी 6.85 लाख और जिले की आबादी 44.41 लाख है। इस हिसाब से यहां पर शहरी आबादी केवल 15 फीसदी है जबकि नए परिसीमन में शहरी आबादी 30 प्रतिशत होनी चाहिए।
दायरा बढ़ने से मिलेगा कई योजनाओं का फायदा
दायरा बढ़ने के बाद गोरखपुर नगर निगम को केंद्र की कई योजनाओं का फायदा मिलने लगेगा। दरअसल 10 लाख से कम जनसंख्या होने की वजह से गोरखपुर नगर निगम को केंद्र सरकार के जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) का लाभ नहीं मिलता है। जनगणना 2011 के अनुसार नगर निगम क्षेत्र गोरखपुर की जनसंख्या करीब सात लाख है, लेकिन वर्तमान में यह 13-14 लाख के पास पहुंच गई है। दायरा बढ़ने पर जनसंख्या भी बढ़ेगी और इसका फायदा नगर निगम को मिलेगा।
दोगुनी हो जाएगी शहर की आबादी
2011 की जनगणना के अनुसार गोरखपुर शहर की आबादी 6.85 लाख और जिले की आबादी 44.41 लाख है। इस हिसाब से यहां पर शहरी आबादी केवल 15 फीसदी है जबकि नए परिसीमन में शहरी आबादी 30 प्रतिशत होनी चाहिए।
दायरा बढ़ने से मिलेगा कई योजनाओं का फायदा
दायरा बढ़ने के बाद गोरखपुर नगर निगम को केंद्र की कई योजनाओं का फायदा मिलने लगेगा। दरअसल 10 लाख से कम जनसंख्या होने की वजह से गोरखपुर नगर निगम को केंद्र सरकार के जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) का लाभ नहीं मिलता है। जनगणना 2011 के अनुसार नगर निगम क्षेत्र गोरखपुर की जनसंख्या करीब सात लाख है, लेकिन वर्तमान में यह 13-14 लाख के पास पहुंच गई है। दायरा बढ़ने पर जनसंख्या भी बढ़ेगी और इसका फायदा नगर निगम को मिलेगा।
31 गांवों में अब प्रधान नहीं पार्षदों चुने जाएंगे
गजट नोटिफिकेशन के साथ ही 31 गांव नगर निगम सीमा में शामिल हो जाएंगे। ऐसे में इन गांवों में प्रधान चुने जाने का प्रावधान भी समाप्त हो जाएगा। नवंबर 2020 में पंचायत का चुनाव प्रस्तावित है। नगर निगम क्षेत्र में इन गांवों के शामिल हो जाने के बाद यहां प्रधान का चुनाव नहीं होगा।
नगर निगम में शामिल होने वाले गांवों के लिए विकास फंड भी दे सरकार: नगर विधायक
गोरखपुर। नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने नगर निगम में 31 गांवों को शामिल करने के निर्णय का स्वागत किया। साथ ही कहा कि नगरीय विकास की दृष्टि से पूरी तरह पिछड़े इन गांव के विकास के साथ अलग से आर्र्थिक विकास फंड का भी प्रावधान किया जाए। उन्होंने कैबिनेट के फैसले के बाद नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह से बात की।
कहा कि पहले ही नगर निगम का सीमा विस्तार करके 17-18 वार्ड जोड़े गए, लेकिन उनके विकास के लिए अतिरिक्त रकम की व्यवस्था नहीं की गई। इसवजह से आज तक उन वार्डों का विकास पिछड़ा हुआ है। वार्डों को धन का वितरण करते समय नगर निगम भी जनसंख्या, क्षेत्र और पिछड़ेपन के आधार पर नए जुड़ने वाले वार्डों को अतिरिक्त धन का आवंटन नही करता है। उन्होंने कहा कि जीडीए भी जब नगर निगम को कॉलोनियां स्थानांतरित करता है तो मूलभूत सुविधाएं विकसित करके ही देता है, लेकिन यहां तो पूरी तरह अविकसित गांव ही बिना अवस्थापना सुविधाओं के नगर निगम को स्थानांतरित हो रहे हैं।
नगर निगम में शामिल होने वाले गांवों के लिए विकास फंड भी दे सरकार: नगर विधायक
गोरखपुर। नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने नगर निगम में 31 गांवों को शामिल करने के निर्णय का स्वागत किया। साथ ही कहा कि नगरीय विकास की दृष्टि से पूरी तरह पिछड़े इन गांव के विकास के साथ अलग से आर्र्थिक विकास फंड का भी प्रावधान किया जाए। उन्होंने कैबिनेट के फैसले के बाद नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह से बात की।
कहा कि पहले ही नगर निगम का सीमा विस्तार करके 17-18 वार्ड जोड़े गए, लेकिन उनके विकास के लिए अतिरिक्त रकम की व्यवस्था नहीं की गई। इसवजह से आज तक उन वार्डों का विकास पिछड़ा हुआ है। वार्डों को धन का वितरण करते समय नगर निगम भी जनसंख्या, क्षेत्र और पिछड़ेपन के आधार पर नए जुड़ने वाले वार्डों को अतिरिक्त धन का आवंटन नही करता है। उन्होंने कहा कि जीडीए भी जब नगर निगम को कॉलोनियां स्थानांतरित करता है तो मूलभूत सुविधाएं विकसित करके ही देता है, लेकिन यहां तो पूरी तरह अविकसित गांव ही बिना अवस्थापना सुविधाओं के नगर निगम को स्थानांतरित हो रहे हैं।