{"_id":"574eeb784f1c1baa481090cb","slug":"meeting-on-dry-and-flood-simultaneaously","type":"story","status":"publish","title_hn":"सूखे और बाढ़ पर एक साथ होगा मंथन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सूखे और बाढ़ पर एक साथ होगा मंथन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 01 Jun 2016 07:34 PM IST
विज्ञापन
सूखा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपदा न्यूनिकरण योजना 2016-17 के तहत सूखे और बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के साथ ही नए उपायों पर भी छह जून को मंथन होगा। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक के लिए पुलिस महकमे से लेकर एयरफोर्स, जीआरडी, पीएसी एनडीआरएफ रेलवे, सिंचाई, लोनिवि समेत 52 महकमों के अफसर बुलाए गए हैं।
इन सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी-अपनी तैयारियों के साथ ही ड्यूटी पर लगाए गए संबंधित अफसरों-कर्मचारियों के नाम, पदनाम की सूची मोबाइल नंबर सहित चार जून तक एडीएम (फाइनेंस) के दफ्तर में उपलब्ध करा दें।
उधर डीएम ओएन सिंह ने बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही सभी बंधों की मरम्मत का निर्देश दिया है। उन्होंने सभी एसडीएम को बंधों का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट देने को कहा है। नगर निगम को नालों की सफाई और जलभराव से निपटने के सभी प्रबंध कर लेने को कहा गया है।
विज्ञापन
पंचायतीराज महकमे को निर्देश दिया गया है कि वे एनडीआरएफ के अलावा खुद भी गांव के लोगों को बाढ़ से बचाव के तरीके बताएं और प्रधान समेत कुछ सक्रिय लोगों के मोबाइल नंबर जुटा लें ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान में आसानी हो।
विज्ञापन
इन सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी-अपनी तैयारियों के साथ ही ड्यूटी पर लगाए गए संबंधित अफसरों-कर्मचारियों के नाम, पदनाम की सूची मोबाइल नंबर सहित चार जून तक एडीएम (फाइनेंस) के दफ्तर में उपलब्ध करा दें।
विज्ञापन
उधर डीएम ओएन सिंह ने बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही सभी बंधों की मरम्मत का निर्देश दिया है। उन्होंने सभी एसडीएम को बंधों का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट देने को कहा है। नगर निगम को नालों की सफाई और जलभराव से निपटने के सभी प्रबंध कर लेने को कहा गया है।
विज्ञापन
पंचायतीराज महकमे को निर्देश दिया गया है कि वे एनडीआरएफ के अलावा खुद भी गांव के लोगों को बाढ़ से बचाव के तरीके बताएं और प्रधान समेत कुछ सक्रिय लोगों के मोबाइल नंबर जुटा लें ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान में आसानी हो।