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मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में आग लगी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2015 01:37 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में आग लगी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के निचले तल पर लगे बिजली के बोर्ड में शुक्रवार को शार्ट सर्किट से आग लग गई। इसके चलते वहां अफरा-तफरी मच गई। सेंटर में मौजूद मरीज, उसके तीमारदार और डॉक्टर सभी भाग निकले। आईसीयू के मरीज आनन-फानन पुरानी इमरजेंसी में शिफ्ट कर दिए गए। बिजली विभाग के कर्मचारियों के प्रयास से आधे घंटे बाद आग पर काबू पाया गया।
दोपहर 12 बजे जब ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के देखने-दिखाने का सिलसिला पूरी रौ में था। इसी बीच वहां की सिस्टर इंचार्ज उर्मिला दयाल को तार जलने की बदबू आई। जब उन्होंने इसकी पड़ताल शुरू की तो उन्हेें बोर्ड से धुआं निकलता दिखा। यह देखते ही उनके होश उड़ गए और उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। आग लगने की बात सुनते ही सभी सेंटर से बाहर की ओर भागने लगे। उर्मिला ने सूचना बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी। सूचना पाते ही बिजली कर्मचारियों ने पहले तो सप्लाई बंद की और फिर मौके पर पहुंच कर आग को काबू में किया। आधे घंटे के प्रयास के बाद आग तो बुझ गई लेकिन उससे ट्रॉमा सेंटर में फैला धुआं निकलने में दो घंटे लग गए। जब तक धुआं निकल नहीं गया तब तक लोग सेंटर के भवन में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उधर, बाद में फायर बिग्रेड की गाड़ी भी पहुंच गई लेकिन आग बुझने की जानकारी मिलने के बाद लौट गई। जानकारी मिलने पर प्राचार्य प्रो. आरपी शर्मा और एसआईसी डॉ. बीएन शुक्ला मौके पर पहुंचे और अस्त-व्यस्त माहौल सामान्य होने तक जमे रहे। शुक्र यही रहा कि आग पर विकराल रूप पकड़ने से पहले ही काबू पा लिया गया और बड़ी दुर्घटना होने से बच गई।
ट्रॉमा सेंटर से बाहर चली इमरजेंसी सेवा
गोरखपुर। आग की सूचना पर डॉक्टर की टीम ट्रॉमा सेंटर से बाहर तो आ गई लेकिन बाहर से आने वाले मरीजों की इलाज प्रक्रिया आगे बढ़ाने का संकट बरकरार रहा। लेकिन प्राचार्य और एसआईसी ने सूझबूझ से काम लेते हुए इमरजेंसी सेवा के लिए टेबल और कुर्सी लगवा दी और जब तक स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तब तक इमरजेंसी वहीं चली। हालांकि, इस दौरान यूजेज चार्जेज काउंटर को भी कुछ देर के लिए बंद कर दिया, इससे मरीजों की आवक कम रही।
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तीन घंटे ठप रही पैथॉलजी जांच
गोरखपुर। ट्रॉमा सेंटर में जहां बिजली बोर्ड था, उससे कुछ ही दूरी पर पैथॉलजी लैब है। जब आग को लेकर शोर सुनाई दिया तो लैब के कर्मचारी भी लैब बंद कर भाग लिए। चूंकि लैब की सारी मशीनों का बिजली से सीधा संबंध है, इसलिए जब तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हुई, तब तक लैब का दरवाजा बंद ही रहा। ऐसे में लैब में पूरे तीन घंटे किसी तरह की जांच नहीं हो सकी ओर मरीज भटकते रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के निचले तल पर लगे बिजली के बोर्ड में शुक्रवार को शार्ट सर्किट से आग लग गई। इसके चलते वहां अफरा-तफरी मच गई। सेंटर में मौजूद मरीज, उसके तीमारदार और डॉक्टर सभी भाग निकले। आईसीयू के मरीज आनन-फानन पुरानी इमरजेंसी में शिफ्ट कर दिए गए। बिजली विभाग के कर्मचारियों के प्रयास से आधे घंटे बाद आग पर काबू पाया गया।
दोपहर 12 बजे जब ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के देखने-दिखाने का सिलसिला पूरी रौ में था। इसी बीच वहां की सिस्टर इंचार्ज उर्मिला दयाल को तार जलने की बदबू आई। जब उन्होंने इसकी पड़ताल शुरू की तो उन्हेें बोर्ड से धुआं निकलता दिखा। यह देखते ही उनके होश उड़ गए और उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। आग लगने की बात सुनते ही सभी सेंटर से बाहर की ओर भागने लगे। उर्मिला ने सूचना बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी। सूचना पाते ही बिजली कर्मचारियों ने पहले तो सप्लाई बंद की और फिर मौके पर पहुंच कर आग को काबू में किया। आधे घंटे के प्रयास के बाद आग तो बुझ गई लेकिन उससे ट्रॉमा सेंटर में फैला धुआं निकलने में दो घंटे लग गए। जब तक धुआं निकल नहीं गया तब तक लोग सेंटर के भवन में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उधर, बाद में फायर बिग्रेड की गाड़ी भी पहुंच गई लेकिन आग बुझने की जानकारी मिलने के बाद लौट गई। जानकारी मिलने पर प्राचार्य प्रो. आरपी शर्मा और एसआईसी डॉ. बीएन शुक्ला मौके पर पहुंचे और अस्त-व्यस्त माहौल सामान्य होने तक जमे रहे। शुक्र यही रहा कि आग पर विकराल रूप पकड़ने से पहले ही काबू पा लिया गया और बड़ी दुर्घटना होने से बच गई।
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ट्रॉमा सेंटर से बाहर चली इमरजेंसी सेवा
गोरखपुर। आग की सूचना पर डॉक्टर की टीम ट्रॉमा सेंटर से बाहर तो आ गई लेकिन बाहर से आने वाले मरीजों की इलाज प्रक्रिया आगे बढ़ाने का संकट बरकरार रहा। लेकिन प्राचार्य और एसआईसी ने सूझबूझ से काम लेते हुए इमरजेंसी सेवा के लिए टेबल और कुर्सी लगवा दी और जब तक स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तब तक इमरजेंसी वहीं चली। हालांकि, इस दौरान यूजेज चार्जेज काउंटर को भी कुछ देर के लिए बंद कर दिया, इससे मरीजों की आवक कम रही।
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तीन घंटे ठप रही पैथॉलजी जांच
गोरखपुर। ट्रॉमा सेंटर में जहां बिजली बोर्ड था, उससे कुछ ही दूरी पर पैथॉलजी लैब है। जब आग को लेकर शोर सुनाई दिया तो लैब के कर्मचारी भी लैब बंद कर भाग लिए। चूंकि लैब की सारी मशीनों का बिजली से सीधा संबंध है, इसलिए जब तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हुई, तब तक लैब का दरवाजा बंद ही रहा। ऐसे में लैब में पूरे तीन घंटे किसी तरह की जांच नहीं हो सकी ओर मरीज भटकते रहे।