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देवरिया: यहां लगातार जीतना है तो दल बदलो या चेहरा

Sun, 28 Apr 2019 09:56 AM IST
vivek shukla मनीष जायसवाल, अमर उजाला, देवरिया
मनीष जायसवाल, अमर उजाला, देवरिया Published by: vivek shukla Updated Sun, 28 Apr 2019 09:56 AM IST
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Lok sabha election 2019: story of Deoria Lok sabha seat
लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

संसदीय सीट देवरिया के साथ एक अजब संयोग जुड़ा है। वर्ष 1971 के बाद से यहां कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं जीता, जो लगातार दूसरी बार अपने ही दल से चुनाव लड़ रहा हो। अगर उसी दल को जीत मिली तो प्रत्याशी का चेहरा नया था और अगर चेहरा वही था तो दल बदला हुआ था। अब तक के चुनावी इतिहास में सिर्फ विश्वनाथ राय ही ऐसे रहे हैं, जिन्हें लगातार एक ही दल से तीन बार जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 

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वर्ष 1952 के पहले चुनाव में यहां से तीन सांसद सोशलिस्ट पार्टी से रामजी वर्मा और कांग्रेस से विश्वनाथ राय व सरजू प्रसाद मिश्र चुने गए थे। 1957 के चुनाव में रामजी वर्मा को जीत मिली। 1962 में कांग्रेस के विश्वनाथ राय ने सोशलिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता अशोक मेहता को हराकर जीत का क्रम शुरू किया और 1971 तक लगातार तीन बार कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीतते रहे। इसके बाद से किसी को इतिहास दोहराने का मौका नहीं मिला। 
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इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के चुनाव में जेपी लहर ने कांग्रेसी किले को ध्वस्त कर दिया। तब उग्रसेन सिंह जनता पार्टी से सांसद चुने गए थे। 1980 में कांग्रेस से रमायन राय निर्वाचित हुए और फिर 1984 में भी कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन तब रमायन राय की जगह राजमंगल पांडेय मैदान में थे। 1989 में राजमंगल पांडेय लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए, मगर इस बार वह जनता दल में शामिल हो चुके थे। 
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1991 में भी यह सीट जनता दल के खाते में ही गई, लेकिन विजेता मोहन सिंह थे। 1996 में भाजपा के श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी जीते तो 1998 में सपा के मोहन सिंह। 1999 में फिर से भाजपा के श्रीप्रकाश मणि ने जीत हासिल की और 2004 में सपा के मोहन सिंह को जीत मिली। वर्ष 2009 में पहली बार बसपा का खाता खोलते हुए गोरख प्रसाद जायसवाल निर्वाचित हुए थे।


इस बार भी कायम रहेगा मिथक
एक ही दल और चेहरे पर लगातार दूसरी जीत हासिल करने का मौका इस बार भी नहीं है। चुनावी दंगल में ताल ठोंक रहे सभी उम्मीदवार नए हैं। वर्ष 2014 में भाजपा के कलराज मिश्र को जीत मिली थी। इस बार रमापति राम त्रिपाठी भाजपा से मैदान में है। बसपा से नियाज अहमद चुनाव लड़े थे, जो अबकी कांग्रेस के सिंबल पर वोट मांग रहे हैं। बसपा ने विनोद जायसवाल को प्रत्याशी बनाया है।

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