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देवरहा बाबा की भूमि पर दांवपेच में उलझी सियासत

Wed, 15 May 2019 05:00 AM IST
देव कश्यप महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, देवरिया
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, देवरिया Published by: देव कश्यप Updated Wed, 15 May 2019 05:00 AM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: Ground report of Deoria lok sabha constituency, Land of Devraha Baba
रमापति राम त्रिपाठी (भाजपा), विनोद कुमार जायसवाल (गठबंधन) और नियाज अहमद खां (कांग्रेस) - फोटो : अमर उजाला

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प्रसिद्ध संत देवरहा बाबा की पुण्यभूमि देवरिया सियासत के जटिल दांवपेच में उलझी है। यहां लोग मोदी-मोदी जपते मिल जाते हैं तो, गठबंधन की जय-जयकार करने वाले भी खूब नजर आते हैं। कांग्रेस के नियाज अहमद को गठबंधन का रोड़ा बताने वाले मिले तो यह बताने वाले भी कि कांग्रेस प्रत्याशी को हल्का आंकना गलत साबित हो सकता है। ऐसे में लड़ाई फिलहाल त्रिकोणीय नजर आ रही है। चुनाव के दिन यह आमने-सामने में बदल जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। वजह, तमाम जगह मुस्लिम मतदाता भाजपा को हराने वाले को वोट करने की बात खुलकर कर रहे हैं। ये अभी देख रहे हैं कि भाजपा को टक्कर नियाज दे रहे हैं या विनोद।

देवरिया संसदीय सीट में पथरदेवा, देवरिया और रामपुर कारखाना विधानसभा सीट देवरिया जिले की, जबकि तमकुहीराज और फाजिलनगर कुशीनगर जिले में आती हैं। देवरिया के भटौली बुजुर्ग निवासी सुरेश चौहान कहते हैं, हाथी व कमल में टक्कर है। यहां के विधायक गरीबों की सुनवाई नहीं करते हैं, लेकिन गरीब मोदी के काम से खुश हैं। बैतालपुर सोपरी बुजुर्ग में प्रमोद गुप्ता ने बताया कि वे गठबंधन को सपोर्ट कर रहे हैं। नंदलाल गुप्ता ने बताया कांग्रेस और भाजपा में लड़ाई है। देवरिया बुजुर्ग दौरी में मिले संतोष यादव बोले, मोदी और हाथी की लड़ाई है। पहले मुलायम के नाम पर वोट देते थे। इस बार मोदी के नाम पर वोट देंगे।
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डुमरी चौराहा रामपुर कारखाना में विश्वनाथ राव मिले। बताया, यहां कलराज मिश्र ने काफी काम किया। महिलाओं के लिए अस्पताल बनवाया। मेडिकल कॉलेज बन रहा है। रामपुर कारखाना के हरपुर निजाम में तेजू रैदास ने कहा, सरकार योजना दे रही है, लेकिन लाभ नहीं मिल रहा है। लेकिन जब एकतरफा सरकार में लाभ नहीं मिला तो खिचड़ी में क्या मिलेगा? 

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पथरदेवा के विधायक सूर्य प्रताप शाही प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री हैं। पथरदेवा ब्लॉक के सामने राहुल यादव ने बताया कि सामने वाली सड़क पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समय में बनी थी। 24 घंटे बिजली इस सरकार में मिलनी शुरू हुई। शौचालय बनने से गंदगी कम हुई। फिर भी यहां गठबंधन तेज चल रहा है। बघौच घाट बजरहा टोला में शफील्लाह ने कहा कि कांग्रेस भी हल्की नहीं है। वोट गठबंधन को मिलेगा या नियाज को जाएगा, यह चुनाव के दिन ही तय हो पाएगा। फाजिलनगर पटहेरवा में विकास राय ने दावा किया कि छोटी जातियों के साथ ही कई यादव भी भाजपा के साथ हैं।

तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र के सलेमगढ़ में देशबंधु पब्लिक स्कूल चलाते हैं। कहते हैं कि लाख मोदी लहर है, लेकिन वोट ही नहीं पड़ा, तो चौंकाने वाले नतीजे आ सकते हैं। वहीं, गोरखपुर विवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत मिश्र ने बताया कि लड़ाई त्रिकोणीय ही है, लेकिन आवास, शौचालय, उज्ज्वला कनेक्शन और 20 से 24 घंटे बिजली के साथ किसानों में 2000-2000 रुपये की बात हो रही है। राष्ट्रवाद की भी चर्चा है। 

भाजपा, गठबंधन व कांग्रेस में त्रिकोणीय लड़ाई 
रमापति राम त्रिपाठी (भाजपा) - भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। गोरखपुर के रहने वाले हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खास माने जाते हैं। 2017 के विस चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र की पांच में से चार सीटें जीती थीं।

विनोद कुमार जायसवाल (बसपा)- इनके ससुर गोरख प्रसाद जायसवाल 2009 में सांसद रहे हैं। जड़ें तो जिले से जुड़ी हैं, लेकिन अर्से से उनका कार्यक्षेत्र बिहार रहा है।

नियाज अहमद खां (कांग्रेस)- पिछले चुनाव में बसपा के प्रत्याशी थे। तीनों प्रमुख दलों में अकेले स्थानीय प्रत्याशी हैं। पूर्वांचल में एक मात्र तमकुहीराज ही एक ऐसी सीट है, जहां से कांग्रेस का विधायक है। 

2014 में ढाई लाख से ज्यादा वोटों से जीतने के बावजूद भाजपा की मुश्किलें कम नहीं

भाजपा ने 2014 के चुनाव में यह सीट 2,65,386 वोटों से जीती थी। इसके बावजूद यहां भाजपा की मुश्किलें कम नही हैं। लगातार दूसरी बार भाजपा ने बाहरी प्रत्याशी उतारा है। इससे कई स्थानीय दावेदार नाखुश बताए जा रहे हैं। बसपा से वैश्य प्रत्याशी आने से भाजपा के परंपरागत जायसवाल वोट बैंक में सेंध की चर्चा भी कम नहीं है। भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय भी यहां से मैदान में हैं। उन्हें मिले वोटों से भाजपा को नुकसान होगा। भाजपा के लिए राहत की बात इतनी भर है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाला और राष्ट्रवाद की सीढ़ी पर सवार एक नया मतदाता वर्ग उसके साथ खड़ा नजर आ रहा है।

यह झुकाव अन्य चुनौतियों की कितनी काट बनेगा, यह देखने वाली बात होगी। सेना के एएससी बटालियन में सिपाही और जम्मू-कश्मीर के राजौरी में तैनात पथरदेवा ब्लॉक के जयप्रकाश जायसवाल का कहना है कि सरकार ने सेना को खुली छूट दी है। पहली बार सेना को तैनाती स्थल पर ही वोटिंग का अधिकार मिला है। किसान नंदलाल मौर्य कहते हैं कि वोट तो मोदी व गठबंधन में जा रहा है, लेकिन यहां बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। चीनी मिलें बंद हैं। युवाओं को बाहर जाना पड़ रहा है। 

संतकबीरनगर जूताकांड का देवरिया कनेक्शन
संतकबीर नगर के जूताकांड से यहां का तगड़ा इलेक्शन कनेक्शन है। संतकबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी अपनी ही पार्टी के विधायक पर जूते बरसाकर चर्चा में आए थे। इससे पूर्वांचल की कई सीटों पर ठाकुरवाद बनाम ब्राह्मणवाद अचानक चरम पर पहुंच गया था। लेकिन भाजपा ने शरद का टिकट काटकर ठाकुरों को शांत किया तो उनके पिता डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से टिकट देकर शरद के टिकट काटने से होने वाली ब्राह्मण नाराजगी थाम ली। हालांकि कई जगह यह चर्चा है कि ऊपर से सब जरूर शांत दिख रहा है, लेकिन अंदर से वैसा है नहीं।
 

2014 का परिणाम

कलराज मिश्रा (भाजपा)    4,96,500
नियाज अहमद (बसपा)    2,31,114
बालेश्वर यादव (सपा)        1,50,852
सभा कुंवर (कांग्रेस)           37,752
जीत का अंतर                2,65,386

जातीय समीकरण
ब्राह्मण    2.10 लाख
मुस्लिम    1.80 लाख
यादव    1.10 लाख
कुर्मी, सैंथवार    1.20 लाख
कुशवाहा    40 हज़ार
वैश्य     1.50 लाख
एससी    1.30 लाख
भूमिहार    75 हजार
राजपूत    90 हजार
राजभर    50 हजार
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