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कलश यात्रा के साथ हुआ कथा का शुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Tue, 24 May 2016 01:21 AM IST
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गाजे-बाजे के साथ शहर में अल सुबह निकली भव्य कलश यात्रा के साथ दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की भागवत कथा सोमवार को पूरे विधि-विधान से शुरू हो गई। कथा से पहले मंगल कलश यात्रा कथा स्थल एमपी इंटर कॉलेज से शुरू हुई जो गोलघर, हरिओमनगर, इंदिरा बाल बिहार, गणेश चौराहा, विजय चौराहा, बैंक रोड होते हुए कथा स्थल पहुंच कर समाप्त हो गई।
कलश यात्रा का शुभारंभ मेयर डॉ. सत्या पांडेय और समाजसेवी पुष्पदंत जैन ने झंडी दिखाकर किया। इसमें सबसे आगे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कतारबद्ध होकर करीब 800 महिलाएं कलश लिए चल रही थीं। उनके पीछे सैकड़ों की संख्या में चल रहे महिला और पुरुष दिव्य ज्योति जागृति संस्था का पताका लिए आशुतोष महराज का जयकारा लगा रहे थे। बग्गियों में सजी झांकियां कलश यात्रा को और भव्य बना रही थीं। इसमें श्रद्धालुओं के साथ-साथ संस्थान के स्वामी अर्जुनानंद, विष्णु प्रकाशानंद, स्वामी हरिदासानंद, विश्वरूपानंद आदि शामिल रहे।
कलश यात्रा के बाद दूसरे सत्र में शुरू हुआ कथा वाचन। आशुतोष महराज की शिष्या कथा व्यास साध्वी विश्वंभरा ने मनुष्य के सामाजिक प्राणी होने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दवा के नाम पर जहर बेचने वाला, खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाला, मानवीय अंगों का व्यापार करने वाला मनुष्य सामाजिक प्राणी कैसे हो सकता है? साध्वी ने कहा कि दरअसल मनुष्य की पाशविकता उसे सामाजिकता के दायरे से बाहर कर देती है। केवल तत्वज्ञानी संत ही वो विभूति है, जो मानव में मानवता का फिर से संचार कर सकते हैं। ऐसे में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्यों के लिए बेहद जरूरी है। इसके माध्यम से धर्म के शाश्वत स्वरूप का ज्ञान पाकर मानव श्रेष्ठता को प्राप्त किया जा सकता है।
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कलश यात्रा का शुभारंभ मेयर डॉ. सत्या पांडेय और समाजसेवी पुष्पदंत जैन ने झंडी दिखाकर किया। इसमें सबसे आगे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कतारबद्ध होकर करीब 800 महिलाएं कलश लिए चल रही थीं। उनके पीछे सैकड़ों की संख्या में चल रहे महिला और पुरुष दिव्य ज्योति जागृति संस्था का पताका लिए आशुतोष महराज का जयकारा लगा रहे थे। बग्गियों में सजी झांकियां कलश यात्रा को और भव्य बना रही थीं। इसमें श्रद्धालुओं के साथ-साथ संस्थान के स्वामी अर्जुनानंद, विष्णु प्रकाशानंद, स्वामी हरिदासानंद, विश्वरूपानंद आदि शामिल रहे।
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कलश यात्रा के बाद दूसरे सत्र में शुरू हुआ कथा वाचन। आशुतोष महराज की शिष्या कथा व्यास साध्वी विश्वंभरा ने मनुष्य के सामाजिक प्राणी होने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दवा के नाम पर जहर बेचने वाला, खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाला, मानवीय अंगों का व्यापार करने वाला मनुष्य सामाजिक प्राणी कैसे हो सकता है? साध्वी ने कहा कि दरअसल मनुष्य की पाशविकता उसे सामाजिकता के दायरे से बाहर कर देती है। केवल तत्वज्ञानी संत ही वो विभूति है, जो मानव में मानवता का फिर से संचार कर सकते हैं। ऐसे में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्यों के लिए बेहद जरूरी है। इसके माध्यम से धर्म के शाश्वत स्वरूप का ज्ञान पाकर मानव श्रेष्ठता को प्राप्त किया जा सकता है।
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