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हड्डी टूटने पर प्लास्टर लगाया तो टेढ़ी हो सकती है कलाई
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सरवर पोर्टिको में जीओसी मीट का उद्घाटन करते डाक्टर महेन्द्र अग्रवाल, डाक्टर अशोक यादव,डाक्टर आर ?
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हड्डी टूटने पर प्लास्टर लगाया तो टेढ़ी हो सकती है कलाई
गोरखपुर। फिसलकर नीचे गिर रहे लोग अक्सर कलाई से खुद को चोट लगने से रोकने का प्रयास करते हैं। ऐसे में कभी-कभी कलाई की हड्डी टूट जाती है। घरेलू महिलाओं में अक्सर ऐसी शिकायत पाई जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक हड्डी टूटने की 10 प्रतिशत शिकायत घरेलू काम के दौरान आती है। ऐसे में एक छोटे और आसान आपरेशन से दस दिनों के भीतर कलाई पूरी तरह ठीक हो सकती है। इस तरह की स्थिति में प्लास्टर चढ़ाए जाने की तकनीकी ज्यादा सफल नहीं है। रविवार को प्रत्यारोपण और हड्डी संबंधी बीमारियों की नई तकनीकी को लेकर आयोजित कार्यशाला में गोरखपुर के अलावा दिल्ली, बनारस से आए हड्डी रोग विशेषज्ञों ने नई तकनीकी व सुगम इलाज की जानकारी दी।
होटल सरोवर पोर्टिको में में आयोजित कार्यशाला में कुल्हा, घुटना, कंधा प्रत्यारोपण फेल होने या कुछ सालों बाद शिकायत आने समेत अन्य विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. एल तोमर, डॉ. अमित जायसवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अशोक यादव संग डॉ. इमरान अख्तर ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। डॉ अशोक यादव ने बताया कि घुटने में दर्द हो तो तत्काल एक्सरे करना चाहिए। दर्द नजरअंदाज करते रहने से अर्थराइटिस सहित अन्य कई बीमारियां हो जाती हैं। डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण के कुछ सालों के बाद अगर मरीज संतुष्ट नहीं है तो दुबारा भी प्रत्यारोपण करवा सकता है। इसमें किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता।
डॉ, अंबुज श्रीवास्तव ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण के मामलों में अक्सर शुरूआती में लापरवाही से ही दोबारा प्रत्यारोपण की नौबत आती है। डॉ. सतपाल सिसौदिया ने बताया कि अगर शरीर के किसी अंग में टीबी का संक्रमण है तो खून के माध्यम से वह हड्डी के टीबी में भी बदल सकता है। सबसे पहले इसका असर रीढ़ की हड्डी मे दिखेगा फिर जोड़ों में जाएगा।
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शारीरिक सक्रियता की कमी बढ़ा रही समस्या
घुटने व कूल्हों के प्रत्यारोपण की स्थिति का कारण शारीरिक गतिविधियों का अभाव व खराब जीवनशैली है। मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि शारीरिक सक्रियता की कमी के चलते गृहिणियों में घुटने और कूल्हों के दर्द की समस्या ज्यादा होती है। लंबे समय तक समस्या टालने या सही इलाज न मिलने पर धीरे-धीरे जोड़ों के मूवमेंट में मददगार चिकना पदार्थ खत्म हो जाता है व हड्डियां टकराने लगती हैं। तब रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ती है।
कैसे समझें, कब है जरूरत
डॉ अमित जायसवाल ने बताया कि सामान्य कामकाज के दौरान जोड़ों में असहनीय दर्द हो तो विशेषज्ञ से संपर्क करें। कई रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं पड़ती, दवाओं व व्यायाम से समस्या का समाधान हो जाता है।
सर्जरी के बाद फि ट होने में कितना समय लगता है
डॉ आरए अग्रवाल ने बताया कि 6 - 7 दिनों में मरीज का घुटना 90 डिग्री पर घूमने लगता है तब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। 21 दिनों तक वॉकर से चलने की सलाह देते हैं। तीन माह बाद वह फि ट हो जाता है। हालांकि सर्जरी के बाद उकड़ू, आलती पालती व जमीन पर बैठने से परहेज करना चाहिए।
कोट
बच्चों की हड्डी में ट्यूमर होना खतरनाक होता है। इस तरह की समस्या आने पर जरा सी चोट लगने पर हड्डी टूट जाती है। ऐेसे में पहले ट्यूमर का संक्रमण साफ कर उसके अंदर आर्टिफीशियल हड्डी डाल देते हैं। जिसे हड्डी धीरे धीरे जुड जाती है। - डॉ. अमित मिश्रा
कंधे के फ्रैक्चर का अब एक छोटे से चीरे के साथ रॉड डालकर इलाज किया जा सकता है। इससे जल्द ही आराम मिल जाएगा। प्लास्टर करने से महीनों हड्डी के जुड़ने का इंतजार करना पड़ता है। रॉड डालने के बाद फिजीयोथेरेपी से पूरी तरह आराम मिल जाता है। - डॉ. इमरान अख्तर
किसी व्यक्ति की कलाई की हड्डी या कुल्हे के कप की हड्डी में फ्रैक्चर होने पर ऑपरेशन किया जाना बेहतर विकल्प है। ऐसे मामलों में लापरवाही नही करनी चाहिए। प्लास्टर लगाकर इलाज किया जाना भी विकल्प है पर यह चोट की गंभीरता पर निर्भर करता है- डॉ. असहर अली
शरीर के किसी हिस्से में अगर टीबी की शिकायत है तो वह संक्रमित होकर खून के माध्यम से हड्डी की टीबी में परिवर्तित हो सकती है। इसके अलावा स्टेरॉयड के प्रयोग से भी हड्डी पर असर पड़ता है। स्टेरॉयड से कुल्हे की हड्डी का गलना अब आम हो गया। -डॉ. सतपाल सिसौदिया
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गोरखपुर। फिसलकर नीचे गिर रहे लोग अक्सर कलाई से खुद को चोट लगने से रोकने का प्रयास करते हैं। ऐसे में कभी-कभी कलाई की हड्डी टूट जाती है। घरेलू महिलाओं में अक्सर ऐसी शिकायत पाई जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक हड्डी टूटने की 10 प्रतिशत शिकायत घरेलू काम के दौरान आती है। ऐसे में एक छोटे और आसान आपरेशन से दस दिनों के भीतर कलाई पूरी तरह ठीक हो सकती है। इस तरह की स्थिति में प्लास्टर चढ़ाए जाने की तकनीकी ज्यादा सफल नहीं है। रविवार को प्रत्यारोपण और हड्डी संबंधी बीमारियों की नई तकनीकी को लेकर आयोजित कार्यशाला में गोरखपुर के अलावा दिल्ली, बनारस से आए हड्डी रोग विशेषज्ञों ने नई तकनीकी व सुगम इलाज की जानकारी दी।
होटल सरोवर पोर्टिको में में आयोजित कार्यशाला में कुल्हा, घुटना, कंधा प्रत्यारोपण फेल होने या कुछ सालों बाद शिकायत आने समेत अन्य विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. एल तोमर, डॉ. अमित जायसवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अशोक यादव संग डॉ. इमरान अख्तर ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। डॉ अशोक यादव ने बताया कि घुटने में दर्द हो तो तत्काल एक्सरे करना चाहिए। दर्द नजरअंदाज करते रहने से अर्थराइटिस सहित अन्य कई बीमारियां हो जाती हैं। डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण के कुछ सालों के बाद अगर मरीज संतुष्ट नहीं है तो दुबारा भी प्रत्यारोपण करवा सकता है। इसमें किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता।
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डॉ, अंबुज श्रीवास्तव ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण के मामलों में अक्सर शुरूआती में लापरवाही से ही दोबारा प्रत्यारोपण की नौबत आती है। डॉ. सतपाल सिसौदिया ने बताया कि अगर शरीर के किसी अंग में टीबी का संक्रमण है तो खून के माध्यम से वह हड्डी के टीबी में भी बदल सकता है। सबसे पहले इसका असर रीढ़ की हड्डी मे दिखेगा फिर जोड़ों में जाएगा।
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शारीरिक सक्रियता की कमी बढ़ा रही समस्या
घुटने व कूल्हों के प्रत्यारोपण की स्थिति का कारण शारीरिक गतिविधियों का अभाव व खराब जीवनशैली है। मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि शारीरिक सक्रियता की कमी के चलते गृहिणियों में घुटने और कूल्हों के दर्द की समस्या ज्यादा होती है। लंबे समय तक समस्या टालने या सही इलाज न मिलने पर धीरे-धीरे जोड़ों के मूवमेंट में मददगार चिकना पदार्थ खत्म हो जाता है व हड्डियां टकराने लगती हैं। तब रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ती है।
कैसे समझें, कब है जरूरत
डॉ अमित जायसवाल ने बताया कि सामान्य कामकाज के दौरान जोड़ों में असहनीय दर्द हो तो विशेषज्ञ से संपर्क करें। कई रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं पड़ती, दवाओं व व्यायाम से समस्या का समाधान हो जाता है।
सर्जरी के बाद फि ट होने में कितना समय लगता है
डॉ आरए अग्रवाल ने बताया कि 6 - 7 दिनों में मरीज का घुटना 90 डिग्री पर घूमने लगता है तब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। 21 दिनों तक वॉकर से चलने की सलाह देते हैं। तीन माह बाद वह फि ट हो जाता है। हालांकि सर्जरी के बाद उकड़ू, आलती पालती व जमीन पर बैठने से परहेज करना चाहिए।
कोट
बच्चों की हड्डी में ट्यूमर होना खतरनाक होता है। इस तरह की समस्या आने पर जरा सी चोट लगने पर हड्डी टूट जाती है। ऐेसे में पहले ट्यूमर का संक्रमण साफ कर उसके अंदर आर्टिफीशियल हड्डी डाल देते हैं। जिसे हड्डी धीरे धीरे जुड जाती है। - डॉ. अमित मिश्रा
कंधे के फ्रैक्चर का अब एक छोटे से चीरे के साथ रॉड डालकर इलाज किया जा सकता है। इससे जल्द ही आराम मिल जाएगा। प्लास्टर करने से महीनों हड्डी के जुड़ने का इंतजार करना पड़ता है। रॉड डालने के बाद फिजीयोथेरेपी से पूरी तरह आराम मिल जाता है। - डॉ. इमरान अख्तर
किसी व्यक्ति की कलाई की हड्डी या कुल्हे के कप की हड्डी में फ्रैक्चर होने पर ऑपरेशन किया जाना बेहतर विकल्प है। ऐसे मामलों में लापरवाही नही करनी चाहिए। प्लास्टर लगाकर इलाज किया जाना भी विकल्प है पर यह चोट की गंभीरता पर निर्भर करता है- डॉ. असहर अली
शरीर के किसी हिस्से में अगर टीबी की शिकायत है तो वह संक्रमित होकर खून के माध्यम से हड्डी की टीबी में परिवर्तित हो सकती है। इसके अलावा स्टेरॉयड के प्रयोग से भी हड्डी पर असर पड़ता है। स्टेरॉयड से कुल्हे की हड्डी का गलना अब आम हो गया। -डॉ. सतपाल सिसौदिया