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लार्ड मैकाले से ज्यादा कपिल सिब्बल ने चौपट की भारत की शिक्षा व्यवस्था: डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी
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लार्ड मैकाले से ज्यादा कपिल सिब्बल ने चौपट की भारत की शिक्षा व्यवस्था: डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी
गोरखपुर। बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को लार्ड मैकाले से ज्यादा कांग्रेस नेता व पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने नुकसान पहुंचाया है। कपिल सिब्बल के पास कोई प्रतिनिधि मंडल जाकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रस्ताव देता था, उसे वह बिना सोचे-समझे मान लेते थे। इसी का नतीजा था कि विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना व प्रेरणा खत्म हो गए। एक स्तर पर बिना परीक्षा दिए पास होने की व्यवस्था लागू कर दी। इससे शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई। कपिल सिब्बल को सोचना चाहिए था कि विद्यार्थी आगे चलकर बोर्ड परीक्षा या फिर प्रतियोगी परीक्षा देंगे। यदि शुरू से परीक्षा देने की आदत नहीं रहेगी तो सफलता मुश्किल है। अब प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के कक्षा पांच और आठ में भी परीक्षा देकर पास होने की व्यवस्था लागू कर दी गई है।
बेसिक शिक्षामंत्री डॉ द्विवेदी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत सप्ताह समारोह में विशेष जागरूकता प्रकोष्ठ की ओर से ‘बुनियादी शिक्षा के रूपांतरण में सरकार और विश्वविद्यालय की भूमिका : उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में हिस्सा लेने आए। पहले मीडिया कर्मियों से बात की और कांग्रेस पर निशाना साधा। फिर व्याख्यान में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान बेसिक शिक्षामंत्री ने कहा कि बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रति वर्ष अभिव्यक्ति सप्ताह तथा स्वामी विवेकानंद जयंती पर 12 जनवरी को शिक्षा महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। इसमें शिक्षक व विद्यार्थी आपस मे संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज और ज्ञान के निर्माण में विश्वविद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। बुनियादी शिक्षा को समाज के लिए लाभप्रद बनाने के लिए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रशिक्षित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बुनियादी शिक्षा के रूपांतरण के लिए आधार विश्वविद्यालय ही तय करेंगे। बेसिक शिक्षा के स्तर को सुधारने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। आवश्यकता है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ की जाए। इसमें विश्वविद्यालय की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने कुछ गांवों को गोद लेकर उनके प्राथमिक विद्यालयों के रूपांतरण के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं। कार्यक्रम संयोजक प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने शिक्षा हर राष्ट्र के लिए विकास और सशक्तिकरण का आधार है। जब तक हमारी बुनियादी शिक्षा सर्वोत्तम परिणाम नहीं देगी, उच्च शिक्षा में अपेक्षित परिणाम कभी नहीं ला पाएंगे।
इस दौरान प्रति कुलपति प्रो हरिशरण, प्रो राजवंत राव, प्रो. हुमा सब्जपोश, प्रो. जीतेन्द्र मिश्रा, प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. मुरली मनोहर पाठक, प्रो मानवेंद्र सिंह, प्रो शरद मिश्रा, वीरेंद्र चौबे, प्रो प्रदीप यादव आदि मौजूद रहे।
परिषदीय स्कूलों में होंगे वर्कशॉप व प्रशिक्षण
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि बुनियादी शिक्षा में सुधार के लिए किए गए प्रयासों की गुणवत्ता को विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा मूल्यांकित कराया जाएगा। विश्वविद्यालयों के सहयोग से वर्कशॉप एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे। इससे प्राइमरी के शिक्षकों को मदद मिलेगी। बेसिक शिक्षा में शिक्षण अधिगम सामग्री (टीएलएम) के बेहतर उपयोग के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण होगा।
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गोरखपुर। बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को लार्ड मैकाले से ज्यादा कांग्रेस नेता व पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने नुकसान पहुंचाया है। कपिल सिब्बल के पास कोई प्रतिनिधि मंडल जाकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रस्ताव देता था, उसे वह बिना सोचे-समझे मान लेते थे। इसी का नतीजा था कि विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना व प्रेरणा खत्म हो गए। एक स्तर पर बिना परीक्षा दिए पास होने की व्यवस्था लागू कर दी। इससे शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई। कपिल सिब्बल को सोचना चाहिए था कि विद्यार्थी आगे चलकर बोर्ड परीक्षा या फिर प्रतियोगी परीक्षा देंगे। यदि शुरू से परीक्षा देने की आदत नहीं रहेगी तो सफलता मुश्किल है। अब प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के कक्षा पांच और आठ में भी परीक्षा देकर पास होने की व्यवस्था लागू कर दी गई है।
बेसिक शिक्षामंत्री डॉ द्विवेदी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत सप्ताह समारोह में विशेष जागरूकता प्रकोष्ठ की ओर से ‘बुनियादी शिक्षा के रूपांतरण में सरकार और विश्वविद्यालय की भूमिका : उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में हिस्सा लेने आए। पहले मीडिया कर्मियों से बात की और कांग्रेस पर निशाना साधा। फिर व्याख्यान में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान बेसिक शिक्षामंत्री ने कहा कि बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रति वर्ष अभिव्यक्ति सप्ताह तथा स्वामी विवेकानंद जयंती पर 12 जनवरी को शिक्षा महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। इसमें शिक्षक व विद्यार्थी आपस मे संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज और ज्ञान के निर्माण में विश्वविद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। बुनियादी शिक्षा को समाज के लिए लाभप्रद बनाने के लिए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रशिक्षित किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि बुनियादी शिक्षा के रूपांतरण के लिए आधार विश्वविद्यालय ही तय करेंगे। बेसिक शिक्षा के स्तर को सुधारने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। आवश्यकता है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ की जाए। इसमें विश्वविद्यालय की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने कुछ गांवों को गोद लेकर उनके प्राथमिक विद्यालयों के रूपांतरण के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं। कार्यक्रम संयोजक प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने शिक्षा हर राष्ट्र के लिए विकास और सशक्तिकरण का आधार है। जब तक हमारी बुनियादी शिक्षा सर्वोत्तम परिणाम नहीं देगी, उच्च शिक्षा में अपेक्षित परिणाम कभी नहीं ला पाएंगे।
इस दौरान प्रति कुलपति प्रो हरिशरण, प्रो राजवंत राव, प्रो. हुमा सब्जपोश, प्रो. जीतेन्द्र मिश्रा, प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. मुरली मनोहर पाठक, प्रो मानवेंद्र सिंह, प्रो शरद मिश्रा, वीरेंद्र चौबे, प्रो प्रदीप यादव आदि मौजूद रहे।
परिषदीय स्कूलों में होंगे वर्कशॉप व प्रशिक्षण
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि बुनियादी शिक्षा में सुधार के लिए किए गए प्रयासों की गुणवत्ता को विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा मूल्यांकित कराया जाएगा। विश्वविद्यालयों के सहयोग से वर्कशॉप एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे। इससे प्राइमरी के शिक्षकों को मदद मिलेगी। बेसिक शिक्षा में शिक्षण अधिगम सामग्री (टीएलएम) के बेहतर उपयोग के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण होगा।