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किशोरियों में फिर सामने आई खून की कमी
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sun, 24 Jul 2016 07:00 PM IST
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मंडल भर में हुए हेल्थ सर्वे ने स्वास्थ्य महकमे की हकीकत सामने ला दी है। तमाम प्रयास के बावजूद एक बार फिर गोरखपुर-बस्ती मंडल की किशोरियों में खून की कमी पाई गई है। वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमा भी आत्ममंथन में जुट गया है। दोनों ही मंडलों में ऐसा कोई जिला नहीं है, जहां की किशोरियों में खून की कमी न हो।
गोरखपुर मंडल में कुशीनगर जिले की स्थिति सबसे बदतर है। यहां की 97.8 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया (खून की कमी) की शिकार हैं। जबकि बस्ती मंडल के संतकबीरनगर की 98.1 प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी है। दोनों मंडलों में बाकी जिलों के मुकाबले गोरखपुर बेहतर स्थिति में है। यहां की 84.2 प्रतिशत किशोरियों एनीमिया से पीड़ित हैं।
महिला विशेषज्ञ डॉ. रीमा गोयल ने बताया कि खून की कमी एक आम समस्या है जो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक देखी जाती है। जब खून में लाल रक्त कणिकाओं की कमी हो जाती है तो शरीर में हीमोग्लोबिन की भी कमी होने लगती है। हीमोग्लोबिन एक तरह का प्रोटीन होता है। यह शरीर में ऑक्सीजन के संचरण का काम करता है। इसकी कमी से एनिमिया नाम का रोग हो जाता है।
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रिपोर्ट में जिलेवार प्रतिशत
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गोरखपुर मंडल में कुशीनगर जिले की स्थिति सबसे बदतर है। यहां की 97.8 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया (खून की कमी) की शिकार हैं। जबकि बस्ती मंडल के संतकबीरनगर की 98.1 प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी है। दोनों मंडलों में बाकी जिलों के मुकाबले गोरखपुर बेहतर स्थिति में है। यहां की 84.2 प्रतिशत किशोरियों एनीमिया से पीड़ित हैं।
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महिला विशेषज्ञ डॉ. रीमा गोयल ने बताया कि खून की कमी एक आम समस्या है जो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक देखी जाती है। जब खून में लाल रक्त कणिकाओं की कमी हो जाती है तो शरीर में हीमोग्लोबिन की भी कमी होने लगती है। हीमोग्लोबिन एक तरह का प्रोटीन होता है। यह शरीर में ऑक्सीजन के संचरण का काम करता है। इसकी कमी से एनिमिया नाम का रोग हो जाता है।
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रिपोर्ट में जिलेवार प्रतिशत
- संतकबीरनगर 98.1
- कुशीनगर 97.8
- महराजगंज 95.5
- देवरिया 94.8
- बस्ती 94.0
- गोरखपुर 84.2
- आयरन की कमी
- विटामिन बी-12 की कमी
- फोलिक एसिड की कमी
- बहुत ज्यादा खून की कमी होने पर
- पेट में इंफेक्शन के कारण
- स्मोकिंग
- पेट में कीड़े
- कुछ दवाईयों का अधिक इस्तेमाल
- ज्यादा सुस्ती, थकान महसूस होना
- सांस लेने में दिक्कत या घबराहट
- सर्दी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होना
- पैरों और हाथों में सूजन
- ज्यादा पसीना आना