पूछताछ काउंटर पर ताला, भटकते हैं मरीज
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना बिहार और नेपाल तक के मरीज भी आते हैं। मगर कर्मचारियों के कमी का हवाला देते हुए अस्पताल प्रशासन ने पूछताछ काउंटर को बंद कर दिया। ओपीडी, पर्ची काउंटर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ओटी और ब्लड बैंक जैसे महत्वपूर्ण विभाग में काफी दूरी है और कोई ऊपर तो कोई नीचे है मगर बाहर से आने वाले मरीज उसे खोजने के लिए भटकते ही रहते हैं। सहजनवां के रामप्रीत आज इस शिकायत को लेकर एक सीनियर डॉक्टर के पास पहुंच गए। वह मरीज को दिखाने के लिए आए थे और डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट करवाकर लाने को कहा। वह वार्डों में घूमते रह गए और समय बीत गया। उन्होंने एक सीनियर डॉक्टर के पास पहुंचकर इसकी शिकायत की।
पुरानी पर्ची काउंटर के पास बना पूछताछ काउंटर बंद है जिसे जल्द ही खोल दिया जाएगा
- डॉ. एमक्यू बेग, एसआईसी
लिक्विफाइड ऑक्सीजन टैंक की बढ़ेंगी निगरानी
लिक्विफाइड ऑक्सीजन को बंद किए जाने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। प्राचार्य ने ऑक्सीजन टैंक के चारों ओर दीवार बनाने का आदेश दे दिया है। इसके साथ ही दो टेक्नीशियन और गार्ड भी मेडिकल कॉलेज के तैनात होंगे।
बीते दिनों एक सुपरवाइजर द्वारा अचानक लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी गई थी। इमरजेंसी में भी ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने पर आनन-फानन में ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की गई और रोगियों की जान बचाई गई थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी थी जिसमें सुपरवाइजर दोषी पाया गया था। तभी से वह फरार है। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ऑक्सीजन की निगरानी के लिए सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों के साथ ही खुद के भी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाएगा। इसके लिए प्राचार्य ने आदेश जारी कर दिया है।
सिलिंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई का आदेश
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने 100 बेड और वार्ड नंबर 6 में सिलिंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई का आदेश दिया है। मंगलवार को इस संबंध में उन्होंने पत्र जारी किया है। मेडिकल कॉलेज के 100 व 6 नंबर वार्ड में केवल सिलिंडर से आक्सीजन की सप्लाई होगी। वहीं एनिस्थिसिया विभाग के सभी ओटी, 12 नंबर वार्ड और मेन आईसीयू इमरजेंसी में लिक्विड सप्लाई होगी।
यूं तो सिलिंडर ऑक्सीजन काफी महंगा पड़ता है, लेकिन कॉलेज प्रशासन पैनल खराब न होने का तर्क देकर यह आदेश दिया है।
पिछले महीने लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई अचानक बंद होने पर इसी का सहारा लेना पड़ा था। इस वजह से वैकल्पिक तौर पर इसे इस्तेमाल में रखने का निर्णय लिया गया है।