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तारीख गलत लिखने से मरीज, तीमारदार हुए परेशान
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2015 01:36 AM IST
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सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक किशोर का दर्द जिला अस्पताल के डॉक्टर की छोटी सी चूक ने और बढ़ा दिया। इसी के चलते मेडिकल कॉलेज ने मरीज को भर्ती करने से इंकार कर दिया। बच्चे को तड़पता देख घर वाले अंतत: उसे प्राइवेट अस्पताल ले गए। सरकारी अस्पताल में मामूली खर्च पर इलाज कराने की उनकी उम्मीद तो टूट ही गई, मरीज के साथ-साथ घर वाले भी बेहद परेशान हुए।
अब घर वाले डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सहजनवां क्षेत्र के खरैला गांव के पास सड़क हादसे में बृहस्पतिवार को शिवम मिश्रा (14) गंभीर रूप से घायल हो गया। घर वाले उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीज मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, मगर गलती से पर्चे पर तारीख 27 दिसंबर लिख दी। इधर शिवम के घर वाले जब उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो डॉक्टर ने पर्चे पर दर्ज तारीख का हवाला देते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया। अब घर वालों के पास प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। किसी तरह से रिश्तेदारों की मदद से उसका नर्सिंग होम में उपचार कराया जा रहा है।
मेडिकल कालेज के एसआईसी डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा कि ट्रीटमेंट के लिए रेफर पर्चे की नहीं जरूरत होती है। यदि ऐसा किया गया है तो गंभीर बात है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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अब घर वाले डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सहजनवां क्षेत्र के खरैला गांव के पास सड़क हादसे में बृहस्पतिवार को शिवम मिश्रा (14) गंभीर रूप से घायल हो गया। घर वाले उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीज मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, मगर गलती से पर्चे पर तारीख 27 दिसंबर लिख दी। इधर शिवम के घर वाले जब उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो डॉक्टर ने पर्चे पर दर्ज तारीख का हवाला देते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया। अब घर वालों के पास प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। किसी तरह से रिश्तेदारों की मदद से उसका नर्सिंग होम में उपचार कराया जा रहा है।
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मेडिकल कालेज के एसआईसी डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा कि ट्रीटमेंट के लिए रेफर पर्चे की नहीं जरूरत होती है। यदि ऐसा किया गया है तो गंभीर बात है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।