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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   The investigation by CCTV footage

सीसीटीवी फुटेज बनी जांच का आधार

Fri, 29 May 2015 03:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 29 May 2015 03:07 AM IST
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यूनिवर्सिटी गेट पर बवाल में नगर विधायक और भाजपा विधायक दल के
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मुख्य सचेतक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के खिलाफ बुधवार देर रात मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी की सीसीटीवी फुटेज को आधार बनाकर जांच शुरू कर दी।
इस बीच घटना के समय मौके पर मौजूद रहे लोगों और सर्राफा मंडल के पदाधिकारी मुखर हो गए हैं। विधायक के खिलाफ केस पर आपत्ति जताते हुए मुकदमा वापस लेने या विधायक की जगह मौके पर रहे शहरियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग उठाते हुए सर्राफा मंडल ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

कैंट थाने में यह मुकदमा यूनिवर्सिटी के गार्ड लालजी यादव की तहरीर पर दर्ज किया गया है। इसमें विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल सहित 50 लोगों को बलवा, तोड़फोड़, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धाराओं में अभियुक्त बनाया है। बृहस्पतिवार से जांच शुरू करते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखी। इसमें नजर आने वाले चेहरों के आधार पर पुलिस बयान लेने का क्रम शुरू करेगी।

इस बीच पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सर्राफा मंडल के पदाधिकारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। सर्राफा मंडल की अध्यक्ष शरद चंद्र अग्रहरी के नेतृत्व में हुई बैठक में कहा गया कि विधायक लोगों की समस्या को देखकर मौके पर पहुंचे थे। उनके खिलाफ दर्ज केस वापस होना चाहिए या विधायक की जगह उन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाए जो यूनिवर्सिटी गेट पर ताले का विरोध कर रहे थे। बैठक में ऐलान किया गया कि इस मांग को लेकर शुक्रवार सुबह सर्राफा मंडल के पदाधिकारी यूनिवर्सिटी परिसर में सैर के लिए जाने वाले लोगों को साथ लेकर कैंट थाने पहुंचेंगे और न्याय संगत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे।

यूनिवर्सिटी गेट का ताला तोड़कर सुरक्षाकर्मियों से अभद्रता करने वालों को सीसीटीवी फुटेज से चिन्हित किया जा रहा है। कैंट पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी।
- प्रदीप कुमार, एसएसपी

ताला टूटने के लिए प्रशासन दोषी : विधायक
नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने यूनिवर्सिटी गेट का ताला टूटने के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और यूनिवर्सिटी प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।
लखनऊ से जारी विज्ञप्ति में विधायक ने कहा है कि बुधवार की सुबह यूनिवर्सिटी गेट पर शहर के लोग डेढ़ घंटे धरना देते रहे। अगर किसी अधिकारी ने वहां पहुंचकर उन्हें समझा दिया होता तो ऐसी स्थिति नहीं आती। यूनिवर्सिटी कैंपस में टहलने वालों को मनमाने तरीके से नहीं रोका जा सकता है। यह रोक सिर्फ शासन से लगाई जा सकती है। कुलपति को इसके लिए शासनादेश जारी कराना चाहिए था।
अपने खिलाफ केस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, नागरिकों के मूल अधिकारों के हनन पर मूक नहीं रह सकता। नागरिकों के साथ किसी तरह के अन्याय का विरोध करना मेरा राजनीतिक धर्म है। ऐसे में मुकदमे दर्ज होना राजनीतिक माल्यार्पण है। नागरिक हित की लड़ाई में किसी सीमा तक जाने के लिए तैयार हूं।

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