{"_id":"582b1e874f1c1b7b388feb0d","slug":"effect-of-rupee-s-ban","type":"story","status":"publish","title_hn":"फुटकर की किल्लत बनीं मुलाकातियों की मुसीबत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फुटकर की किल्लत बनीं मुलाकातियों की मुसीबत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:18 AM IST
विज्ञापन
जेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1000 और 500 के नोटों पर पाबंदी का असर जेल में आने वाले मुलाकातियों पर भी पड़ रहा है। पाबंदी से पहले जहां कैदियों से मिलने वाले मुलाकातियों की लंबी कतार जिला जेल के बाहर नजर आती थी। अब वहां का नजारा बदल सा गया है। एक सप्ताह में तकरीबन 25 फीसदी मुलाकातियों की संख्या में कमी आई है। फुटकर के अभाव में घर से निकलने से लेकर जिला जेल पहुंचने तक उन्हें तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मुलाकाती तो परिवार को छोड़कर अकेले ही अपने रिश्तेदारों से मिलने पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना आसपास के जिलों या देहात क्षेत्र से आने वाले मुलाकातियों को करना पड़ रहा है। साधन से लेकर भोजन तक फुटकर की कमी ने उनकी दुश्वारियां बढ़ा दी हैं।
सौ की जगह पांच सौ खर्च
घर से निकलने से पहले फुटकर की व्यवस्था करनी पड़ रही है। अगर फुटकर पास में नहीं है तो जबरदस्ती पुराने नोट खर्च करने पड़ रहे हैं। जहां सौ रुपये के तेल में काम चल जा रहा था, वहां पांच सौ का तेल भराना पड़ा है। फल बेचने वाले पुराने नोट लेने से साफ इंकार कर दे रहे हैं।
- शहरयार अहमद, रमवापुर, पिपराइच
रिश्तेदार से लेना पड़ा उधार
अपने गांव के रिश्तेदार से मिलने आया हूं। उनके जरूरत के सामान लेने के लिए जब दुकान पर गया तो दुकानदार ने फुटकर देने से मना कर दिया। बाद में अपने एक रिश्तेदार को फोन कर फुटकर रुपया मंगवाया तब जाकर सामान मिला।
विज्ञापन
- सुजीत सिंह, बिछिया
विज्ञापन
सौ की जगह पांच सौ खर्च
घर से निकलने से पहले फुटकर की व्यवस्था करनी पड़ रही है। अगर फुटकर पास में नहीं है तो जबरदस्ती पुराने नोट खर्च करने पड़ रहे हैं। जहां सौ रुपये के तेल में काम चल जा रहा था, वहां पांच सौ का तेल भराना पड़ा है। फल बेचने वाले पुराने नोट लेने से साफ इंकार कर दे रहे हैं।
विज्ञापन
- शहरयार अहमद, रमवापुर, पिपराइच
रिश्तेदार से लेना पड़ा उधार
अपने गांव के रिश्तेदार से मिलने आया हूं। उनके जरूरत के सामान लेने के लिए जब दुकान पर गया तो दुकानदार ने फुटकर देने से मना कर दिया। बाद में अपने एक रिश्तेदार को फोन कर फुटकर रुपया मंगवाया तब जाकर सामान मिला।
विज्ञापन
- सुजीत सिंह, बिछिया