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दागी इंस्पेक्टर को सौंप दी गोरखनाथ थाने की कुर्सी
Updated Sun, 30 Jul 2017 02:10 AM IST
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गोरखपुर।
दागी पुलिस वालों को थाने की जिम्मेदारी न देने के सीएम के फरमान को उनके ही शहर में दरकिनार कर दिया गया है। सीएम आवास (गोरखनाथ मंदिर) के थाने की कुर्सी पर दागी इंस्पेक्टर की तैनाती के बाद से ही पुलिस महकमे में चर्चाएं जोरों पर हैं। लंबे समय से विवादों में घिरे इंस्पेक्टर की तैनाती को पुलिस वाले एक सत्ताधारी विधायक की रसूख से जोड़कर देख रहे हैं।
डीसीआरबी में तैनात रहे यादवेंद्र पाल को गोरखनाथ का थानेदार बनाया गया है। शुक्रवार की देर रात वायरलेस सेट पर आदेश होते ही पुलिस महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। यादवेंद्र पाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। सहजनवां में थानेदार रहने के दौरान उनपर एक गैंगरेप पीड़िता को परेशान करने का आरोप लगा था। उसके मेडिकल कराने में हुई देरी को कोर्ट ने गंभीरता से लिया था और फिर कैंट थाने में यादवेंद्र के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ। कुशीनगर जिले में तैनाती के दौरान भी एसपी से बदसलूकी का आरोप यादवेंद्र पर लग चुका है। तब वायरलेस सेट से एसपी को अपशब्द कहने का मामला सुर्खियों में आया था। इसके बाद उन्हें गोरखपुर के गोला थाने की जिम्मेदारी दी गई। यहां पर भी डीएम और एसएसपी निरीक्षण के लिए पहुंचे तो प्रोटोकाल में यादवेंद्र सलामी देने नहीं आए थे और उसके बाद से ही डीसीआरबी में थे।
तैनाती को लेकर एसएसपी ने की थी शिकायत
एसएसपी रहे आरपी पांडेय से इसी इंस्पेक्टर की तैनाती को लेकर बहस हुई थी। बताया जाता है कि इसके बाद एसएसपी ने शासन स्तर तक लिखित शिकायत की थी। इसी बीच शहर के एक डॉक्टर से रंगदारी का मामला गर्म हो गया और एसएसपी का स्थानांतरण हो गया।
दागी पुलिस वालों को थाने की जिम्मेदारी न देने के सीएम के फरमान को उनके ही शहर में दरकिनार कर दिया गया है। सीएम आवास (गोरखनाथ मंदिर) के थाने की कुर्सी पर दागी इंस्पेक्टर की तैनाती के बाद से ही पुलिस महकमे में चर्चाएं जोरों पर हैं। लंबे समय से विवादों में घिरे इंस्पेक्टर की तैनाती को पुलिस वाले एक सत्ताधारी विधायक की रसूख से जोड़कर देख रहे हैं।
डीसीआरबी में तैनात रहे यादवेंद्र पाल को गोरखनाथ का थानेदार बनाया गया है। शुक्रवार की देर रात वायरलेस सेट पर आदेश होते ही पुलिस महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। यादवेंद्र पाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। सहजनवां में थानेदार रहने के दौरान उनपर एक गैंगरेप पीड़िता को परेशान करने का आरोप लगा था। उसके मेडिकल कराने में हुई देरी को कोर्ट ने गंभीरता से लिया था और फिर कैंट थाने में यादवेंद्र के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ। कुशीनगर जिले में तैनाती के दौरान भी एसपी से बदसलूकी का आरोप यादवेंद्र पर लग चुका है। तब वायरलेस सेट से एसपी को अपशब्द कहने का मामला सुर्खियों में आया था। इसके बाद उन्हें गोरखपुर के गोला थाने की जिम्मेदारी दी गई। यहां पर भी डीएम और एसएसपी निरीक्षण के लिए पहुंचे तो प्रोटोकाल में यादवेंद्र सलामी देने नहीं आए थे और उसके बाद से ही डीसीआरबी में थे।
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तैनाती को लेकर एसएसपी ने की थी शिकायत
एसएसपी रहे आरपी पांडेय से इसी इंस्पेक्टर की तैनाती को लेकर बहस हुई थी। बताया जाता है कि इसके बाद एसएसपी ने शासन स्तर तक लिखित शिकायत की थी। इसी बीच शहर के एक डॉक्टर से रंगदारी का मामला गर्म हो गया और एसएसपी का स्थानांतरण हो गया।
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