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तब निर्दोष, अब दोषी बताएं तो अपना दोष कैसे छिपाएं
Sun, 06 Jan 2019 12:46 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Sun, 06 Jan 2019 12:46 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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गोरखपुर। चर्चित राखी श्रीवास्तव मर्डर केस की जांच में जिला पुलिस फिर सवालों के घेरे में हैं। नवंबर 2018 में जांच कर आरोपी डॉक्टर डीपी सिंह को क्लीन चिट देने वाले चौकी इंचार्ज कौवाबाग राजाराम द्विवेदी को ही फिर प्रकरण की विवेचना सौंपी गई है। नेपाल से दूसरी बार जांच कर लौटे चौकी इंचार्ज ने पूछे जाने पर पुन: कहा कि वहां डॉक्टर के जाने के साक्ष्य नहीं मिले। इधर पुलिस सूत्रों का कहना है कि सीओ सर्किल और सह विवेचक पुराने हैं।
जांच में साक्ष्य नए होंगे तो उन्हें खुद की ही अपनी पुरानी जांच को गलत ठहराना होगा। इससे उनकी गर्दन फंसेगी। ऐसे में जांच की निष्पक्षता सवालों के घेरे में है। गत वर्ष विवेचक चौकी इंचार्ज की जांच के आधार पर ही सीओ सर्किल ने 12 नवंबर को रेखा के पति मनीष व ससुर के आरोपों को खारिज करते हुए डॉक्टर डीपी सिंह को क्लीन चिट दी थी। सीओ ने रिपोर्ट में मनीष द्वारा बार-बार की शिकायत को खुद अपहरण के आरोपों से बचने की कोशिश बताया था।
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जांच में साक्ष्य नए होंगे तो उन्हें खुद की ही अपनी पुरानी जांच को गलत ठहराना होगा। इससे उनकी गर्दन फंसेगी। ऐसे में जांच की निष्पक्षता सवालों के घेरे में है। गत वर्ष विवेचक चौकी इंचार्ज की जांच के आधार पर ही सीओ सर्किल ने 12 नवंबर को रेखा के पति मनीष व ससुर के आरोपों को खारिज करते हुए डॉक्टर डीपी सिंह को क्लीन चिट दी थी। सीओ ने रिपोर्ट में मनीष द्वारा बार-बार की शिकायत को खुद अपहरण के आरोपों से बचने की कोशिश बताया था।
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एसटीएफ ने बनाया है हत्यारोपी
राखी के लापता होने पर उनके पति मनीष सिन्हा ने अपहरण की आशंका जताकर तहरीर दी थी। बाद में रेखा के भाई की तहरीर पर मनीष को ही अपहरण का आरोपी बनाया गया। नेपाल जांच करने गए चौकी इंचार्ज राजाराम द्विवेदी ने रिपोर्ट में आरोपी डॉक्टर की नेपाल में मौजूदगी के साक्ष्य न मिलने की रिपोर्ट दी। एसटीएफ की जांच में न केवल डॉक्टर की मौजूदगी नेपाल में साबित हुई और हत्या का आरोप भी उनपर ही लगा। इससे हुई किरकिरी से भी पुलिस ने सबक नहीं लिया।
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