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खत्म होगा फोरेंसिक रिपोर्ट का लंबा इंतजार

Fri, 14 Jun 2019 01:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2019 01:36 AM IST
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खत्म होगा फोरेंसिक रिपोर्ट का लंबा इंतजार
बदल रहा गोरखपुर
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खत्म होगा फोरेंसिक रिपोर्ट का लंबा इंतजार
- फोरेंसिक लैब के काम की तेजी को 23 करोड़ और मिले
- अगस्त तक एक ब्लॉक शुरू करने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिला अस्पताल रोड पर पुरानी जेल परिसर में बन रहे फोरेंसिक लैब के निर्माण में तेजी को 23 करोड़ रुपये और मिले हैं। कोशिश है कि जल्द ही इसके एक ब्लॉक की शुरुआत की जाए ताकि महीनों तक फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार खत्म हो सके। हालांकि तीन में से एक ब्लॉक शुरू करने का लक्ष्य मई में ही था मगर चुनाव आचार संहिता के दौरान बजट ना आने की वजह से काम ठप हो गया था। अब जब बजट मिल गया है तो अगस्त तक एक ब्लॉक शुरू करने की उम्मीद है।
2015 के अंत में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम इसका निर्माण शुरू कराया था। फोरेंसिक लैब के निर्माण को कई बार बजट का रोड़ा आया। मगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एजेंडे में होने की वजह से 2016 में लैब के लिए शासन ने 28.6 करोड़ रुपये का बजट पास किय। इससे चार मंजिला भवन बनाया गया। ए, बी और सी ब्लॉक का निर्माण होना है। ए ब्लॉक को पहले शुरू करने की योजना है। इसमें अत्याधुनिक मशीनें होंगी, जिसमें हत्या, दुष्कर्म, चोरी, आदि घटनाओं में एकत्र साक्ष्य का परीक्षण हो सकेगा। अभी तक लखनऊ स्थित लैब में परीक्षण कराया जाता है। इस वजह से परीक्षण रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है।
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- एक साल की देरी से चल रहा है काम
शासन ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए फरवरी 2018 तक की समय सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि निर्माण कार्य की शुरुआत निर्धारित समय से एक माह देरी से हो सकी। जिसका असर अब भी देखने को मिल रहा है। बीच में बजट ना आने की वजह से तीन महीने तक काम ही रुका हुआ था।
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यह होगा फायदा
फोरेंसिक लैब में हत्या, दुष्कर्म और चोरी जैसे अपराधों में जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य का परीक्षण करने के साथ ही विसरा परीक्षण, मादक पदार्थ, लाई डिटेक्टर, ब्लड सेंपल आदि का परीक्षण होगा। इससे एक तरफ मुकदमों की तफ्तीश में जहां तेजी आएगी वहीं आरोपियों को सजा दिलाना भी आसान होगा।

कोट
- 33 करोड़ का बजट मांगा गया था। 23 करोड़ रुपये कार्यदायी संस्था को मिले हैं। काम कराया जा रहा है, जल्द ए ब्लॉक को शुरू करने की कोशिश है।
एके तिवारी, प्रभारी, फोरेंसिक लैब
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