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काश! एक बार कहा तो होता....
Tue, 05 Feb 2019 12:42 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Tue, 05 Feb 2019 12:42 AM IST
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गोरखपुर। अंतर्मुखी स्वभाव के कारण रमेश गुप्ता की परेशानी और ज्यादा बढ़ी। रिश्तेदार तो दूर उन्होंने अपने भाइयों तक से कभी अपनी समस्या नहीं बताई। भीतर ही भीतर घुटते रहे। जब लेनदार बार-बार घर पर दस्तक देने लगे तो वह गहरे अवसाद में चले गए।
रमेश के भाई नरेश से बात करने की कोशिश की गई तो उनका गला रुंध गया। घर के पास ही नरेश की पान की गुमटी है। वे बोले, कभी रमेश ने जिक्र नहीं किया कि कर्ज लिया है और देने वाले उन्हें इतना परेशान कर रहे हैं। शादी में जब कर्ज देने वालों ने उनकी बेइज्जती की तब सबको पता चला। पड़ोसी विकास को यकीन नहीं हो रहा कि रमेश इतना कठोर हो सकते थे। उनकी नजर में रमेश तो जिंदादिल इंसान थे। अपने विनम्र स्वभाव से सभी के प्रिय थे। बोले, ‘मेरे साथ ही सुबह मंदिर जाते थे। कभी भी यह जिक्र नहीं किया कि कर्ज देने वाले परेशान कर रहे हैं।’ वे अफसोस भी जाहिर करते हैं कि काश, रमेश जी ने व्यापारियों के बीच ही बातें रखी होती। रकम इतनी ज्यादा नहीं थी कि बीच का रास्ता नहीं निकलता।
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रमेश के भाई नरेश से बात करने की कोशिश की गई तो उनका गला रुंध गया। घर के पास ही नरेश की पान की गुमटी है। वे बोले, कभी रमेश ने जिक्र नहीं किया कि कर्ज लिया है और देने वाले उन्हें इतना परेशान कर रहे हैं। शादी में जब कर्ज देने वालों ने उनकी बेइज्जती की तब सबको पता चला। पड़ोसी विकास को यकीन नहीं हो रहा कि रमेश इतना कठोर हो सकते थे। उनकी नजर में रमेश तो जिंदादिल इंसान थे। अपने विनम्र स्वभाव से सभी के प्रिय थे। बोले, ‘मेरे साथ ही सुबह मंदिर जाते थे। कभी भी यह जिक्र नहीं किया कि कर्ज देने वाले परेशान कर रहे हैं।’ वे अफसोस भी जाहिर करते हैं कि काश, रमेश जी ने व्यापारियों के बीच ही बातें रखी होती। रकम इतनी ज्यादा नहीं थी कि बीच का रास्ता नहीं निकलता।
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बेटे का अलग रहना भी खलता था
पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि बेटे रजत उर्फ सोनू के अलग रहने से रमेश की उलझनें ज्यादा बढ़ गई थीं। रजत, रमेश की पहली पत्नी के बेटे हैं। उनसे रमेश का लगाव भी ज्यादा था। घटना के एक दिन पहले वाली रात में उन्होंने बेटे से बात की थी। बकौल रजत, उन्होंनेे उन्हें दिलासा भी दिया कि ‘घबराइए मत, जो होगा देखा जाएगा। उन लोगों से सप्ताह भर का समय ले लीजिए। धीरे-धीरे कर्ज चुका देंगे।’ परेशानी में इतना बड़ा कदम उठा लेंगे, सपने में भी नहीं सोचा था।
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