{"_id":"5c33bcebbdec2256e27b8e59","slug":"121546894571-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"150 एकड़ भूमि आवंटन की होगी एसआईटी जांच","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
150 एकड़ भूमि आवंटन की होगी एसआईटी जांच
Tue, 08 Jan 2019 02:26 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Tue, 08 Jan 2019 02:26 AM IST
विज्ञापन
land slide
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र स्थित 150 एकड़ जमीन उद्यमी और बिल्डर को आवंटित करने के मामले में गोरखपुर विकास प्राधिकरण(जीडीए) के सचिव राम सिंह गौतम ने एसआईटी जांच की सिफारिश की है। इसके लिए शासन को पत्र भी लिखा है। जांच हुई तो प्राधिकरण में तैनात कई पूर्व अफसर-कर्मचारी कार्रवाई की जद में आएंगे। जीडीए का कहना है कि इस मामले में प्राधिकरण और सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये ब्याज का नुकसान हुआ है। वर्तमान में भूमि की बाजार कीमत 750 करोड़ है।
प्राधिकरण ने वर्ष 1997 में 150 एकड़ भूमि शहर के उद्यमी ओम प्रकाश जालान और बिल्डर अनिल त्रिपाठी को नीलाम की थी। ओम प्रकाश जालान ने 8.31 करोड़ रुपए और अनिल त्रिपाठी ने करीब पांच करोड़ रुपये जमा किए थे। बाद में मामला हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट गया लेकिन हर जगह जीडीए को हार मिली। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को उद्यमी, कारोबारी के पक्ष में रजिस्ट्री करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले ही जीडीए ने एसआईटी जांच की सिफारिश कर दी है। प्राधिकार के वर्तमान अफसरों का कहना है कि भूमि की नीलामी में नियमों का अनुपालन नहीं किया गया। इस वजह से प्राधिकरण और यूपी सरकार को बड़ा नुकसान हुआ है। मामले की जांच और दोषी अफसर, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। यही वजह है कि जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने अफ सरों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखकर एसआईटी जांच कराने की सिफारिश की है।
ओम प्रकाश जालान और अनिल त्रिपाठी को जमीन रजिस्ट्री करने की तैयारी चल रही है। पूर्व के अफ सरों और कर्मचारियों के चलते जीडीए को करीब 400 करोड़ रुपये ब्याज का भी नुकसान हुआ है। इसके लिए दोषी अफसरों, कर्मचारियों की भूमिका जांचने के लिए एसआईटी जांच की मांग की गई है। -
विज्ञापन
राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए
एसआईटी जांच का विरोध नहीं है लेकिन यह मामले को और लटकाने की साजिश हो सकती है। हम यह भी चाहते हैं कि जांच हो और मामले को 21 साल से लटकाकर रखने वाले अफसर, कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ओम प्रकाश जालान, प्रबंध निदेशक जालान कॉन कास्ट
जीडीए ने बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। 1997 से अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन हमारे पक्ष में रजिस्ट्री नहीं हुई। लंबे समय से मामले को लटकाने वाले अफसर, कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। यह सब जांच से सामने आ जाएगा।
अनिल त्रिपाठी, प्रबंध निदेशक भव्या कालोनाइजर्स
विज्ञापन
प्राधिकरण ने वर्ष 1997 में 150 एकड़ भूमि शहर के उद्यमी ओम प्रकाश जालान और बिल्डर अनिल त्रिपाठी को नीलाम की थी। ओम प्रकाश जालान ने 8.31 करोड़ रुपए और अनिल त्रिपाठी ने करीब पांच करोड़ रुपये जमा किए थे। बाद में मामला हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट गया लेकिन हर जगह जीडीए को हार मिली। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को उद्यमी, कारोबारी के पक्ष में रजिस्ट्री करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले ही जीडीए ने एसआईटी जांच की सिफारिश कर दी है। प्राधिकार के वर्तमान अफसरों का कहना है कि भूमि की नीलामी में नियमों का अनुपालन नहीं किया गया। इस वजह से प्राधिकरण और यूपी सरकार को बड़ा नुकसान हुआ है। मामले की जांच और दोषी अफसर, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। यही वजह है कि जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने अफ सरों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखकर एसआईटी जांच कराने की सिफारिश की है।
विज्ञापन
ओम प्रकाश जालान और अनिल त्रिपाठी को जमीन रजिस्ट्री करने की तैयारी चल रही है। पूर्व के अफ सरों और कर्मचारियों के चलते जीडीए को करीब 400 करोड़ रुपये ब्याज का भी नुकसान हुआ है। इसके लिए दोषी अफसरों, कर्मचारियों की भूमिका जांचने के लिए एसआईटी जांच की मांग की गई है। -
विज्ञापन
राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए
एसआईटी जांच का विरोध नहीं है लेकिन यह मामले को और लटकाने की साजिश हो सकती है। हम यह भी चाहते हैं कि जांच हो और मामले को 21 साल से लटकाकर रखने वाले अफसर, कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ओम प्रकाश जालान, प्रबंध निदेशक जालान कॉन कास्ट
जीडीए ने बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। 1997 से अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन हमारे पक्ष में रजिस्ट्री नहीं हुई। लंबे समय से मामले को लटकाने वाले अफसर, कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। यह सब जांच से सामने आ जाएगा।
अनिल त्रिपाठी, प्रबंध निदेशक भव्या कालोनाइजर्स