फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   सवा लाख रुपये की भेंट चढ़ीं पांच जानें

सवा लाख रुपये की भेंट चढ़ीं पांच जानें

Tue, 05 Feb 2019 12:42 AM IST
ajay Kumar अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर Published by: ajay Kumar Updated Tue, 05 Feb 2019 12:42 AM IST
विज्ञापन
सवा लाख रुपये की भेंट चढ़ीं पांच जानें
गोरखपुर। व्यापारी रमेश गुप्ता पर कर्ज तो आठ से दस लाख रुपये का था मगर मात्र सवा लाख रुपये के तगादे ने पांच जानें ले लीं। एक फर्म के तीन लोग इसी रकम के लिए भारी दबाव बनाए हुए थे। शादी समारोह में उनके द्वारा की गई गालीगलौज से गुप्ता परिवार की सहनशक्ति जवाब दे गई। फिर जो हादसा हुआ उस सदमे पूरा शहर सन्न रह गया।
विज्ञापन


राजघाट थाना पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रमेश ने तीन फर्मों से कर्ज लिया था। इसमें एक फर्म का 1.24 लाख रुपये उन्हें देने थे। इस रकम की वसूली के लिए उनपर नियमित रूप से घर जाकर डराने-धमकाने वाला फर्म संचालक रमेश की भतीजी की शादी में भी पहुंच गया। वहां सबके सामने बेइज्जत भी किया। दो और फर्मों की उधारी तो थी लेकिन उनका दबाव नहीं था। हालांकि उनके बेटे द्वारा शिकायत न करने की वजह से कार्रवाई नहीं हो सकी है। राजघाट थाना पुलिस तहरीर न मिलने का हवाला देकर मुकदमा नहीं दर्ज कर रही है। पुलिस का कहना है कि एक व्यापारी समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में दो व्यापारियों ने उधारी की बात तो कबूली है लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने नगद नहीं बल्कि सामान दिया था।
विज्ञापन

कमेटी में डूब गए आठ लाख

व्यापार के घाटे से उबरने के लिए रमेश ने एक कमेटी में आठ लाख रुपये लगाए थे। रजत के मुताबिक दुर्गाबाड़ी में किराए पर रहने वाले संतकबीरनगर के मुखलिसपुर निवासी अनिल और अनूप श्रीवास्तव कमेटी चलाते थे। कुछ दिन बाद सगे भाई रुपये लेकर फरार हो गए। रमेश मुखलिसपुर गए। वहां अनिल-अनूप तो नहीं मिले। पता चला कि दोनों के पास दो बीघा भूमि है, जिसे बेचकर भी वे इतनी रकम नहीं दे पाते।
विज्ञापन
विज्ञापन

बैंक से कर्ज मिला होता तो...

रमेश को बैंक से कर्ज मिल गया होता तो शायद आत्मघाती कदम न उठाते। करीब 25 दिन पहले ही रमेश ने ऋण के लिए आवेदन किया था। पर्याप्त दस्तावेज न होने के कारण ऋण नहीं मिला। बेटे के मुताबिक रमेश बैंक से कर्ज लेकर पहले लिया कर्ज चुका देते। फिर व्यापार से होने वाली कमाई से बैंक का ऋण अदा करते।

कमेटी नहीं, लोगों से लिए थे कर्ज

पुलिस की जांच में कमेटी से कर्ज लेने की बात से रजत ने इनकार किया। उनके मुताबिक महेवा मंडी और शहर के कुछ अन्य लोगों से पिता ने आठ से दस लाख रुपये का कर्ज लिया था।

व्यापार की आड़ में सूद का धंधा

पांच लोगाें की खुदकुशी के बाद व्यापार की आड़ में सूद पर रुपये देने का धंधा करने वाले कुछ लोगों के नाम भी उजागर हो गए हैं। इनके पास लाइसेंस तो नहीं है लेकिन ये लोगों की जरूरत पर उन्हें रकम देते हैं। नाम ना छापने की शर्त पर एक व्यापारी ने बताया कि ऐसे सूद कारोबारियों की वजह से बदनामी सभी व्यापारियों को झेलनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed