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खुद के साथ जीडीए अफसरों को भी डूबोता आरएस यादव
Updated Thu, 03 Aug 2017 02:02 AM IST
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गोरखपुर। करोड़ों की बेनामी संपत्ति के मामले में हिरासत में लिए गए निलंबित एआरटीओ आरएस यादव ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अफसरों को भी फंसाने की तैयारी कर डाली थी। मानचित्र की जांच में गड़बड़ी मिलने पर कंपाउंडिंग (जुर्माने) के लिए उसने करीब आठ साल पहले मर चुके अपने पिता फौजदार यादव के नाम से ही आवेदन करा डाला। गनीमत रही कि प्राधिकरण के अफसरों ने इस जालसाजी को पकड़ लिया। मामला प्रकाश में आने के बाद जीडीए के सभी अफसर, कर्मचारी सन्न रह गए।
मामले की जांच कर रहे जीडीए के जेई ज्ञानेश्वर सिंह ने प्राधिकरण में वाद दाखिल करते हुए आरएस यादव को फिर नोटिस देकर पीठासीन अधिकारी के सामने उपस्थित होकर कंपाउंडिंग के लिए मानचित्र समेत अपना पूरा आवेदन पत्र प्रस्तुत करने को कहा है। आरएस यादव ने बेतियाहाता स्थित अपने आलीशान कांप्लेक्स के मानचित्र के लिए पिता फौजदार यादव के नाम से वर्ष 2004-05 में आवेदन किया था।
करीब डेढ़ महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय ने एआरटीओ आरएस यादव की लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और गोरखपुर में अकूत बेनामी संपत्ति पकड़ी थी। इसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। हाल ही में जौनपुर से उसकी गिरफ्तार भी हो गई। इसके बाद हरकत में आए जीडीए के अफसरों ने आरएस यादव के बेतियाहाता स्थित कांप्लेक्स के मानचित्र की जांच शुरू कर दी। 30 जून 2017 को सेवानिवृत्त हुए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने जेई ज्ञानेश्वर सिंह को मामले की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान मानचित्र तो स्वीकृत पाया गया, मगर निर्माण में मानचित्र की अनदेखी होना पाया गया। बिना पार्किंग के बेसमेंट का व्यवसायिक इस्तेमाल होता मिला। वहां यूनियन बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय संचालित हो रहा है।
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इसपर जेई ने कंपांउडिंग के लिए 15 दिन में मानचित्र पेश करने के लिए उसे नोटिस जारी किया था। प्रार्थनापत्र के साथ जो मानचित्र उपलब्ध कराया गया वह फ ौजदार यादव के नाम से मुहैया कराया गया। दस्तखत के तौर पर फौजदार यादव के अंगूठे के छाप थे। जब फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद जेई ने वाद दाखिल करते हुए आरएस यादव को पीठासीन अधिकारी के सामने उपस्थित होकर मानचित्र पेश करने को कहा है।
मामले की जांच कर रहे जीडीए के जेई ज्ञानेश्वर सिंह ने प्राधिकरण में वाद दाखिल करते हुए आरएस यादव को फिर नोटिस देकर पीठासीन अधिकारी के सामने उपस्थित होकर कंपाउंडिंग के लिए मानचित्र समेत अपना पूरा आवेदन पत्र प्रस्तुत करने को कहा है। आरएस यादव ने बेतियाहाता स्थित अपने आलीशान कांप्लेक्स के मानचित्र के लिए पिता फौजदार यादव के नाम से वर्ष 2004-05 में आवेदन किया था।
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करीब डेढ़ महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय ने एआरटीओ आरएस यादव की लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और गोरखपुर में अकूत बेनामी संपत्ति पकड़ी थी। इसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। हाल ही में जौनपुर से उसकी गिरफ्तार भी हो गई। इसके बाद हरकत में आए जीडीए के अफसरों ने आरएस यादव के बेतियाहाता स्थित कांप्लेक्स के मानचित्र की जांच शुरू कर दी। 30 जून 2017 को सेवानिवृत्त हुए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने जेई ज्ञानेश्वर सिंह को मामले की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान मानचित्र तो स्वीकृत पाया गया, मगर निर्माण में मानचित्र की अनदेखी होना पाया गया। बिना पार्किंग के बेसमेंट का व्यवसायिक इस्तेमाल होता मिला। वहां यूनियन बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय संचालित हो रहा है।
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इसपर जेई ने कंपांउडिंग के लिए 15 दिन में मानचित्र पेश करने के लिए उसे नोटिस जारी किया था। प्रार्थनापत्र के साथ जो मानचित्र उपलब्ध कराया गया वह फ ौजदार यादव के नाम से मुहैया कराया गया। दस्तखत के तौर पर फौजदार यादव के अंगूठे के छाप थे। जब फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद जेई ने वाद दाखिल करते हुए आरएस यादव को पीठासीन अधिकारी के सामने उपस्थित होकर मानचित्र पेश करने को कहा है।