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स्वास्थ्य विभाग में कर्मियों के नाम पर 38 लाख रुपये का गबन

Sat, 16 Nov 2019 11:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2019 11:12 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग में कर्मियों के नाम पर 38 लाख रुपये का गबन
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बगैर तैनाती के ही सीएमओ ने सेवा प्रदाता को कर दिया भुगतान
आरटीआई से हुआ खुलासा, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तक पहुुंची शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर व सेवा प्रदाता की मिलीभगत से 38 लाख 37 हजार 934 रुपये सरकारी धन का गबन करने का मामला प्रकाश में आया है। जनपद के सीएचसी, पीएचसी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की तैनाती बगैर संबंधित सेवा प्रदाता को भुगतान कर दिया गया। आरटीआई से हुए खुलासे के बाद संपूर्ण मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य को शिकायती पत्र भेजा गया है।

वित्तीय वर्ष 2017-18 में सेवा प्रदाता द्वारा जनपद के किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मैन पावर यथा वार्ड ब्वाय, स्वीपर कम चौकीदार, वार्ड आया व स्वीपर उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बावजूद तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीपी शर्मा ने 17 अक्तूबर 2017 से 31 मार्च 2018 तक के बीच योगदान दिखाते हुए 15 वार्ड ब्वाय, 26 स्वीपर कम चौकीदार, 11 वार्ड आया एवं 12 स्वीपर की आउट सोर्सिंग के माध्यम से आपूर्ति दिखाकर 38 लाख 37 हजार 934 रुपये का अनियमित भुगतान कर दिया गया। इसका खुलासा मुख्यालय से सटे भीमापार गांव निवासी देवेश मणि त्रिपाठी की ओर से जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना से हुई। इस संबंध में सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्साधिकारियों ने भी अलग-अलग दी गई सूचना में अवगत कराया कि संबंधित सेवा प्रदाता की संलिप्तता, मानदेय भुगतान बाउचर, पंजिका की कूट रचित निर्माण-सृजन करने में भी है, साथ ही मानदेय प्राप्तकर्ता के द्वारा बगैर कार्य किए ही मानदेय का कुछ अंश प्राप्त कर प्राप्तकर्ता के रूप में हस्ताक्षर किए जाने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। आरटीआई कार्यकर्ता देवेश मणि त्रिपाठी ने प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को शिकायती पत्र भेजकर कूट रचित प्रपत्र तैयार कर फर्जी भुगतान कराने, शासकीय धनराशि की क्षति करने व बंदरबाट किए जाने में दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों व सेवा प्रदाता के खिलाफ जांच कराकर कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया है। इस संबंध में डीएम दीपक मीणा ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद जो भी निष्कर्ष निकलेगा, उसके अनुसार कार्रवाई होगी।
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