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कामकाज की गुणवत्ता पर 1700 आपत्तियां, फिर भी 100 करोड़ का भुगतान

Mon, 08 Jul 2019 06:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संतोष सिंह, गोरखपुर
संतोष सिंह, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 08 Jul 2019 06:43 AM IST
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corruption in payments in Gorakhpur UP
आईपीडीएस भष्टाचार की भेंट चढ़ी - फोटो : Social Media

शहर में इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आईपीडीएस) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। चार कंपनियों के कामकाज की मानीटरिंग करने वाली एजेंसी मेसर्स मेधज टेक्नो कांसेप्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 1700 शिकायतें कीं, फिर भी बिजली निगम के जिम्मेदारोें ने कोई कार्रवाई नहीं की है। कामकाज की गुणवत्ता पर आपत्ति के बाद भी 100.26 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। अभी 60.50 करोड़ का भुगतान और होना है।

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केंद्र सरकार की आईपीडीएस के तहत गोरखपुर में 160 करोड़ रुपये का काम कराया जा रहा है। यह काम चार अलग-अलग कंपनियों को दिया गया। केईआई इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मेसर्स एनसीसी लिमिटेड को दो-दो काम मिले हैं। मानीटरिंग एजेंसी ने इन कंपनियों के कामकाज पर सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद सवालों को अनदेखा करते हुए मनमाने तरीके से भुगतान कर दिया गया। नखास क्षेत्र में केईआई की तरफ से काम कराया गया था। इस क्षेत्र में फाल्ट ढूंढने में दिक्कत आ रही है।
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बिजली निगम ने 7 जुलाई तक के जो आंकड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए हैं, उसके मुताबिक इस कंपनी को 51 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है। नौ करोड़ से अधिक का भुगतान अभी होना है। इसी तरह मेसर्स एनसीसी लिमिटेड को 41 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। 23 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान अभी होना है। भाजपा विधायक की फर्म ने भी काम कराने में गड़बड़ी की थी। इसकी जानकारी विभागीय अफसरों को थी लेकिन भुगतान नहीं रोका गया।
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विधायक की फर्म भी काली सूची में डाली जाएगी

अंडरग्राउंड वायरिंग का काम कराने वाली भाजपा विधायक की फर्म मेसर्स एसटी इलेक्ट्रिकल्स प्राइवेट लिमिटेड पुणे को भी काली सूची में डाला जाएगा। इसकी सिफारिश सिटी मजिस्ट्रेट अजित सिंह की कमेटी ने की है। अब तक हुए भुगतान की रिकवरी की सिफारिश भी बिजली निगम के अफसरों से की गई है।

मेसर्स मेधज के खिलाफ भी केस दर्ज

कंपनियों के कामकाज की गुणवत्ता की रिपोर्ट देने वाली एजेंसी मेसर्स मेधज टेक्नो कांसेप्ट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कैंट थाने में केस दर्ज करा दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट सहित तीन सदस्यीय कमेटी ने एजेंसी के कामकाज पर सवाल उठाए और रिकवरी की सिफारिश भी की है। अब बिजली निगम एजेंसी को काली सूची में डालने की तैयारी में जुटा है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी को ठेकेदारों के कामकाज पर सवाल उठाना महंगा पड़ सकता है।

छोटे नपे, बड़े बचे

आईपीडीएस का जो अनुबंध है, उसके मुताबिक मानीटरिंग की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता शहरी की बनती है। मेसर्स मेधज की तरफ से अलग-अलग स्थान की रिपोर्ट भी भेजी गई। कहा गया कि काम की गुणवत्ता ठीक नहीं है। अब अधिशासी अभियंता, एसडीओ और अवर अभियंता को जिम्मेदार ठहराकर पूरे मामले में खानापूरी कर दी गई है। बड़े अफसरों को साफ बचा लिया गया है।


मुख्य अभियंता बिजली निगम देवेंद्र सिंह ने कहा कि मेसर्स मेधज की तरफ से झूठ बोला जा रहा है। अगर कामकाज की गुणवत्ता खराब होने की रिपोर्ट मिलती तो जरूर कार्रवाई की जाती। इस मामले में बिजली निगम की तरफ से जांच कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गड़बड़ी करने वाली फर्मों को काली सूची में डाला जाएगा।

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